आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2022: अष्ठमी पर महागौरी को प्रसन्न कर पाए आशीर्वाद

नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि मां महागौरी भक्तों के विचारों की तरंगों को सदमार्ग की ओर ले जाती है और भक्तों के अपवित्र व अनैतिक विचारों को नष्ट कर देती है। तो यहां हम आपको महागौरी की उत्पत्ति से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताने के साथ ही नवरात्रि के आठवें दिन के पूजा-विधान, भोग, मंत्र और आरती के बारे में बताने वाले है।

Ashadha gupt navratri 2022 day 8 maa Mahagauri puja vidhi shubh muhurat mantra bhog and aarti

मां महागौरी शांति और दया प्रसारित करती है

मां शक्ति के नौ रूपों में आठवां रूप देवी महागौरी का है। 2022 आषाढ़ सुदी गुप्त नवरात्रि में महागौरी की पूजा 7 जुलाई बुधवार को होगी। सांसारिक रूप में इनका स्वरूप बहुत ही उज्जवल , कोमल , सफेदवर्ण तथा चंद्रमा के समान सफेद है। चारों भुजाओं से युक्त इस देवी के एक हाथ में त्रिशूल , दूसरे हाथ में डमरू हैं। ये गायन संगीत की प्रिय देवी है , जो सफेद वृषभ यानि बैल पर सवार है। ये सफेदवस्त्र पहने हुए है। अपने भक्तों के लिए यह अन्नपूर्णा स्वरूप है। यह धन-वैभव और सुख-शान्ति की अधिष्ठात्री देवी है।

मां महागौरी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तप किया था।

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इन्हें स्वीकार किया और इनके शरीर को गंगा-जल से धोते गए जिससे देवी पुनः विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो गई जिसकी वजह से इनका नाम गौरी पड़ा।

मां महागौरी अपने भक्तों के विचारों को सही दिशा देती है

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा करने से भक्त से सभी पाप धुल जाते है। जिसके बाद मां का भक्त हर तरह से शुद्ध हो जाता है। मां महागौरी भक्तों के विचारों की तरंगों को सदमार्ग की ओर ले जाती है और भक्तों के अपवित्र व अनैतिक विचारों को नष्ट कर देती है।

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2022 महाष्टमी, दुर्गाष्ठमी

महाष्टमी को महादुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कुंवारी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। जिसे कुंवारी कन्या पूजन कहा जाता है। कई जगहों पर नवरात्रि के सभी नौ दिनों तक कन्या पूजन होता है।

महागौरी की पूजा का शुभ मूहुर्त

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:44 से दोपहर 13:42 तक।

मां महागौरी मंत्रः ओम महागौरियेः नमः, इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

आठवें दिन का रंगः गुलाबी

आठवें दिन का प्रसादः मिठाई जैसे मलाई बर्फी, पेडा, रसमलाई, एवं दूध व फल से निर्मित मिठाई

महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया । जय उमा भवानी जय महामाया ॥

हरिद्वार कनखल के पासा । महागौरी तेरा वहा निवास ॥

चंदेर्काली और ममता अम्बे, जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥

भीमा देवी विमला माता, कोशकी देवी जग विखियाता ॥

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥

सती (सत) हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥

तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥

Story first published: Wednesday, July 6, 2022, 9:00 [IST]
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