भीमना अमावस्या व्रत 2022: जानें तारीख, व्रत कथा और महत्व

भीमना अमावस या भीमना अमावस्या एक हिंदू त्यौहार है जो कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सहित भारत के दक्षिणी राज्यों में मनाया जाता है। यह त्यौहार कर्नाटक कैलेंडर के आषाढ़ मास की अमावस्या को मनाया जाता है। भीमना अमावस को 'पति संजीवनी व्रत', 'ज्योतिर्भेश्मेश्वर व्रत', 'दीपस्तंभ पूजा' और हीमना अमावस के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण कर्नाटक में, इस त्यौहार को 'आति अमावस्ये' और उत्तरी कर्नाटक में इस त्यौहार को 'कोडे अमावस्ये' कहा जाता है। यहां हम आपको भीमना अमावस्या के व्रत का महत्व, इसके पीछे की कथा और पूजा विधि बताने जा रहे है।

bheemana amavasya vrat 2022 know the rituals and vrat katha of bheema amavasya in Hindi

भीमना अमावस्या 2022 तारीख : 28 जुलाई 2022, गुरूवार

भीमना अमावस्या व्रत का महत्व

भीमना अमावस्या व्रत विशेषकर महिलाओं द्वारा रखा जाता है। जिसे ना सिर्फ सुहागिन महिलाएं बल्कि कुंवारी कन्याएं भी रख सकती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित महिलाएं इस व्रत को सुयोग्य वर पाने की कामना के साथ रखती हैं। कुछ महिलाएं इस दिन का ये व्रत भाई या घर के अन्य पुरूष सदस्यों की लंबी आयु और सुखद जीवन के लिए भी करती है। भीमना अमावस्या के दिन महिलाएं भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव, देवी पार्वती की भक्ति से प्रभावित हुए थे और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। ये मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और पार्वती की पूजा करने से समृद्धि, पवित्रता, सफलता, सुख सहित इच्छित वस्तुएं प्राप्त होती है।

भीमना अमावस्या व्रत के पीछे की कथा

एक बार की बात है, एक युवती थी। जिसने एक मरे हुए राजकुमार से शादी की थी। उसे विश्वास था कि वह अपने पति को वापस पा लेगी। तो अगले दिन, वह मिट्टी और आटे का दीपक बनाती है और अमावस्या के दिन भगवान शिव और पार्वती की पूजा करती है। उसकी भक्ति से प्रभावित होकर, भगवान शिव और पार्वती उसके सामने प्रकट होते हैं और उससे मनचाहा वर मांगने को कहते है। जिस पर राजकुमारी भगवान से अपने पति को फिर से जिंदा करने की प्रार्थना करती है। उस युवती की भक्ति से प्रसन्न हो शिव पार्वती उसके पति को जीवनदान देते है। और वे राजकुमारी द्वारा लगाई गई भोग की मिठाई 'कडुबू' को तोड़ते हैं। इसलिए इस दिन को भीमना अमावस के रूप में मनाया जाता है।

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भीमना अमावस्या पूजा विधि

भीमना अमावस्या का व्रत करने वाली महिलाओं को सुबह जल्दी उठना चाहिए, फिर नित्यकर्म करके नए कपड़े पहनकर घर के सामने रंगोली बनानी चाहिए। इसके बाद अपने हाथ पर 'कनकना' यानि कंगन बांधना चाहिए और ज्योतिर्पीमेश्वर या शिव पार्वती की पूजा करके व्रत शुरू करना चाहिए। पूजा के लिए चावल को एक थाली में रखें और चावल पर दो तेल के दीपक जलाएं। इस दीपक थाली पर शिव-पार्वती का आह्वान कर उनकी पूजा करें। पूजा करने वाली महिलाओं को व्रत की सभी आवश्यक वस्तुओं के साथ, पवित्र गौरीधारा को 9 गांठों के साथ रखना चाहिए और इसकी भी पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद उन्हें उस पवित्र धागे को अपने हाथों पर बांधना चाहिए। चूंकि किसी भी काम की शुरूआत में गणेशजी की पूजा सर्वोपरि मानी गई है,इसलिए पहले गणेश की पूजा करें और फिर भीमेश्वर की पूजा करें। फिर भगवान को 9 करीकड़ौबू की मिठाई चढ़ाएं। शिव परिवार की पूजा करने के बाद पति के पैरों की पूजा करके आशीर्वाद प्राप्त करें।

Story first published: Tuesday, July 26, 2022, 16:10 [IST]
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