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महात्मा बुद्ध से जुड़ी इन कथाओं में छिपे हैं जीवन के सार!
महात्मा बुद्ध के जीवन के एक प्रसंग में उन्होंने कितने सटीक जवाब में बताया कि मुत्यु क्या है?
मृत्यु के बाद हमारी आत्मा कहा जाती है? क्या हमारा पुर्नजन्म होता है ऐसी कई बातें है जो हमारी दिमाग में आती है। जिसका सही सही जवाब हमें कभी नहीं मिलता है। हमारे शास्त्रों में इस विषय से संबंधित बहुत सी बातों का जवाब भी मिलता है। लेकिन फिर भी दिमाग इस सवाल को जानने के लिए हमेशा उत्सुक रहता है।
लेकिन महात्मा बुद्ध ने एक बार अपने जीवन में बताया था कि मुत्यु क्या है? इसी तरह उन्होंने अपने जीवन के एक प्रसंग पर भय के बारे में बताया तो आइए जानते है महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़ी उन दो कथाओं के बारे में जिससे हमें दो बड़ी सीख मिलती है।

पहली कथा - मुत्यु क्या है?
कथा के अनुसार एक बार महात्मा बुद्ध के शिष्य उनसे पूछते हैं कि शरीर त्यागने के बाद आत्मा की यात्रा कैसी होती है, वह क्या करती है और उसका क्या होता है। यह सवाल बहुत पेचीदा तो है, लेकिन सवाल सुनते ही महात्मा बुद्ध के शांत चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ गई।
महात्मा बुद्ध ने बड़ी ही शालीनता के साथ अपने शिष्य से पूछा "पहले तुम मुझे ये बताओ कि अगर कोई तीर सीधे आकर तुम्हारे हाथ पर लगता है तो तुम सबसे पहले उस तीर को निकालोगे या ये देखोगे कि वह तीर किस दिशा से आया है"? शिष्य ने कहा "निश्चित रूप में मैं सबसे पहले उस तीर को निकालूंगा, नहीं तो वह मेरे पूरे शरीर में जहर भर देगा"। इस जवाब को सुनते ही महात्मा बुद्ध ने कहा "बिल्कुल सही, मनुष्य को अपने मौजूदा जीवन की समस्याओं को सुलझाने में अपना समय और मेहनत झोंकनी चाहिए, नाकि ये सोचने में कि अगले जन्म में क्या होगा"।

दूसरी कथा - डर और भय
अन्य कथा के अनुसार एक बार महात्मा बुद्ध वृक्ष के नीचे बैठे ध्यान कर रहे थे, इतने में ही कुछ बच्चे वहां खेलते-खेलते पहुंच गए और जिस पेड़ के नीचे बुद्ध ध्यान में लीन थे उस पेड़ के ऊपर पत्थर बरसाने लगे, ताकि आम वृक्ष से नीचे गिर जाएं। तभी एक पत्थर महात्मा बुद्ध के सिर पर लग गया और उनके सिर से खून निकलना शुरु हो गया।
लेकिन इस घटना के बाद महात्मा बुद्ध की प्रतिक्रिया और भी ज्यादा हैरान कर देने वाली थी। महात्मा बुद्ध रो रहे थे, उन्होंने बच्चों के कहा, तुमने इस वृक्ष को पत्थर मारा, उसने तुम्हें फल दिया। लेकिन जब यह पत्थर मुझे लगा तो सिवाय डर और भय के मैं तुम्हें कुछ भी नहीं दे सका।



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