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Matsya Jayanti 2022 : मत्स्य जयंती व्रत और पूजा के साथ इस दिन जरूर करें यह काम, बरसेगी ईश्वर की कृपा
भगवान विष्णु के 10 प्रमुख अवतारों में से उनका मत्स्य रूप भी एक है। मत्स्य यानी मछली जिस प्रकार उन्होंने सृष्टि के कल्याण के लिए अपने बाकी अवतार लिए थे ठीक उसी तरह भगवान का यह रूप भी संसार की सुरक्षा के लिए ही था। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मत्स्य जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिन श्री हरी विष्णु के मत्स्य अवतार को समर्पित है। मत्स्य जयंती के दिन विष्णु जी की विशेष पूजा की जाती है। भक्त पूरी श्रद्धा के साथ पूजा, पाठ व्रत आदि करते हैं।
मत्स्य जयंती से जुड़ी कुछ खास जानकारियां यहां हम देने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं भगवान के मत्स्य रूप के पीछे का रहस्य और इससे जुड़ी पौराणिक कथा।

प्रलय से बचाने के लिए लिया मत्स्यावतार
कहा जाता है कि एक बार इतनी भारी बारिश हुई कि पूरी धरती जल में डूब गई थी। सिर्फ कैलाश पर्वत की चोटी और ओंमकारेश्वर स्थित मार्केण्डेय ऋषि का आश्रम डूबने से बचा रहा। इस जल प्रलय का जिक्र अलग अलग धार्मिक किताबों में किया गया है। यही वजह है कि संसार को इस विपत्ति से बचाने के लिए विष्णु जी को मत्स्य अवतार लेना पड़ा।

प्रलय के अंत तक विष्णु जी खींचते रहे नांव
एक पौराणिक कथा के अनुसार द्रविड़ देश के राजर्षि सत्यव्रत एक दिन कृतमाला नदी में स्नान करने गए थे। अचानक नहाते करते समय उनके हाथों में एक छोटी सी मछली आ गई। उन्होंने उस मछली को वापस पानी में छोड़ दिया, तभी पानी में से मछली की आवाज आई की आप मुझे यहां न छोड़ें अन्यथा पानी के बड़े जीव मुझ जैसे छोटे जीवों को खा जाएंगे। यह सुनकर सत्यव्रत ने उस छोटी मछली को अपने कमंडल में डाल लिया। रात गुजरते ही उन्होंने देखा कि मछली अचानक बड़ी हो गई। तब सत्यव्रत ने उसे कमंडल से निकालकर एक मटके में रख दिया, लेकिन फिर वह मछली और बड़ी हो गई। इसके बाद राजा ने उस मछली को सरोवर में डाल दिया पर सरोवर भी उसके लिए छोटा पड़ गया। अब राजा समझ चुके थे कि यह कोई साधारण मछली नहीं है।
राजा ने हाथ जोड़कर मछली के सामने विनती की जिसके बाद स्वयं विष्णु जी ने अपने मत्स्य अवतार में सत्यव्रत को दर्शन दिया। भगवान ने राजा को बताया कि जल प्रलय से भूमि समुद्र में डूब जाएगी। श्री हरी ने सत्यव्रत को एक नौका बनवाने का आदेश दिया और उस पर खुद के साथ पशु, पक्षी, नर नारी, ऋषि मुनियों को रखने का आदेश दिया था ताकि जल प्रलय के समय सभी सुरक्षित रहें। भगवान ने राजा को बताया कि जल प्रलय के समय वे मत्स्य अवतार में सभी की रक्षा करेंगे।
विष्णु जी नांव को अपनी सिंग से तब तक खींचते रहे जब तक प्रलय का प्रकोप शांत नहीं हो गया। इसके बाद भगवान ने हयग्रीव नामक दैत्य का भी वध किया। हयग्रीव ने छल से सारे वेद ब्रह्मा जी से छीन लिए थे। विष्णु जी ने उन्हें हयग्रीव से लेकर ब्रह्मा जी को वापस दे दिया। राजा सत्यव्रत को भी वेद का ज्ञान मिला जिसके बाद वे वैवस्वत मनु भी कहलाए। बाद में उस नौके में बचे प्राणियों से ही संसार में जीवन आगे बढ़ा।

साल 2022 में इस दिन है मत्स्य जयंती
इस वर्ष मत्स्य जयंती 4 अप्रैल, सोमवार को है। कहते हैं इस दिन जो भी व्यक्ति सच्चे मन से पूजा करता है उसे भगवान का आशीर्वाद जरूर मिलता है।

मछलियों को खिलाएं खाना
इस दिन मछलियों को खाना खिलाना बहुत ही शुभ माना जाता है। कहते हैं यदि कोई व्यक्ति मत्स्य जयंती के दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के साथ मछलियों को आटे की गोली खिलाता है तो श्री हरी की विशेष कृपा उस पर बरसती है।



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