मुहर्रम 2019: हिजरी नव वर्ष की कहानी और इस दिन से जुड़ी महत्‍वपूर्ण तथ्‍य

इस्‍लामिक नववर्ष के साथ ही मुस्लिम संवत् की शुरुआत हो जाती है। इसे हिजरी नव वर्ष या हिजराह कहते हैं। यह 622 CE में मुहर्रम के पहले दिन मक्का से मदीना तक पैगंबर की यात्रा का प्रतीक है। इसे रमजान के बाद दूसरे पवित्र महीने के रूप में मनाया जाता है।

पैगंबर मोहम्मद को फांसी से बचाने के कारण स्थानांतरित करना पड़ा। उन्‍होंने मक्का से लगभग 320 किमी उत्तर में, यत्रिब नाम के शहर में जाने का निर्णय किया। आज के युग में यत्रिब को सऊदी अरब में स्थित मदीना के रूप में जाना जाता है जिसका अर्थ है 'शहर'।

Muharram 2019

इस्लामिक नववर्ष 31 अगस्त, 2019 की शाम से शुरू है। हालांकि, नए साल की शुरुआत निर्धारित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विधि के आधार पर सटीक तिथियां भिन्न हो सकती हैं: चंद्रमा के लिए स्थानीय चंद्रमा-दर्शन या खगोलीय गणना।

इस्‍लामिक नव वर्ष कैसे मनाते हैं

Muharram 2019

इस मौके पर उन बलिदानों के लिए प्रार्थना की जाती है तो आस्‍था स्‍थापना करने के लिए किए गए थे। नया साल बीते साल को पीछे छोड़कर आगामी वर्ष का स्‍वागत करता है। शिया मुसलमानों के लिए यह एक अशुभ अवधि होती है क्योंकि उनके लिए ये 10 दिन शोक दिवस के होते हैं जिनका अंत आशु के दिन होता है। कई शिया इस दौरान अपने सीने पर कोड़े मारते हैं। सुन्नी मुसलमानों के लिए, आशूरा उस दिन को चिह्नित करता है जब अल्‍लाह ने मिस्रियों से मूसा को बचाया था।

इस्‍लामिक नव वर्ष के बारे में तथ्‍य

Muharram 2019

इस्‍लामिक वर्ष के पहले महीने को मुहर्रम कहा जाता है। इसकी गणना चंद्र चक्र के अनुसार की जाती है और इस प्रकार यह ग्रेगोरियन कैलेंडर से भिन्न होता है।

680 ई. में कर्बला की लड़ाई ने पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन इब्न अली और उनकी सेना इस महीने के पहले दिन ही शहर में प्रवेश करने में सफल हुए थे।

हुसैन इब्न अली ने सातवें दिन पानी तक पहुंच काट दी थी।

दसवें दिन इस घेराबंदी के दौरान इमाम हुसैन इब्न अली को मार दिया गया। यह शिया मुसलमानों द्वारा बेहद सराहनीय घटना है।

धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए पैगंबर ने मक्का से आधुनिक-दिवस मदीना (तत्कालीन यत्रिब) में स्थानांतरण किया था, तभी से 622 ईसवी के बाद से इस्लामिक नव वर्ष मनाया जाता है।

पैगंबर के स्‍थानांतरण को अरबी में हिजराह कहते हैं।

इस्‍लामिक कैलेंडर में 12 महीने होते हैं लेकिन सिर्फ 354 दिन होते हैं जबकि ग्रेगोरिअन कैलेंडर में 365 दिन होते हैं।
इस्लामिक नव वर्ष पर आमतौर पर ज्‍यादा धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाता है।

कुछ मुस्लिम देशों में इस दिन आधिकारिक छुट्टी होती है लेकिन कुछ अन्य देशों में ऐसा नहीं होता है।

सुन्नी मुसलमानों के लिए यह उत्सव का दिन है, जबकि शिया मुसलमानों के लिए यह शोक का दिन है। इस्लाम के ये दोनों वर्ग आमतौर पर इस दिन उपवास रखते हैं। सुन्नी मुसलमान मुहर्रम से पहले या बाद में एक अतिरिक्त दिन के लिए उपवास रखते हैं। यह माना जाता है कि उपवास का यह अतिरिक्त दिन मुहम्मद पैगंबर की शिक्षाओं के अनुसार मनाया जाता है।

Story first published: Wednesday, September 4, 2019, 10:26 [IST]
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