Latest Updates
-
Gandhi Jayanti Wishes 2026: हाथ में लाठी थी...गांधी जयंती पर अपनों को ये खास मैसेज भेजकर दें शुभकामनाएं -
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका
शारदीय नवरात्रि 2020: आज पहला दिन, इस विधि से करें मां शैलपुत्री की पूजा

शारदीय नवरात्र आज यानी 17 अक्टूबर से आरंभ हो रहे हैं। सभी भक्तजन पूरे जोश और उत्साह के साथ देवी माँ के स्वागत के लिए तैयार हैं। कहा जाता है कि शारदीय नवरात्र की शुरुआत सबसे पहले प्रभु श्री राम ने की थी। भगवान ने समुद्र के किनारे बैठकर नौ दिनों तक माता की पूजा की थी तब जाकर वे रावण को पराजित कर पाए थे इसलिए दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है।
नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। अर्थात हर एक दिन माता के एक रूप को समर्पित होता है। आज इस लेख में हम माता के सबसे पहले स्वरूप माँ शैलपुत्री के विषय में आपको बताएंगे। नवरात्रि के प्रथम दिन देवी शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
तो आइए जानते हैं क्या है इन देवी की उत्पत्ति के पीछे की कथा और कैसे करें नवरात्रों में माता शैलपुत्री की आराधना।

पर्वतराज हिमालय के घर हुआ जन्म
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्रजापति दक्ष के हाथों अपने पति शिव जी का अनादर होने के बाद देवी सती ने हवनकुंड में छलांग लगाकर खुद को भस्म कर लिया था जिसके बाद उनका अगला जन्म पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती जी के रूप में हुआ था। पर्वतराज की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री के नाम से भी जाना जाता है।
नवदुर्गाओं में प्रथम मानी जाने वाली इन देवी का वाहन वृषभ है इसलिए इन्हे वृषारूढ़ा भी कहते हैं। अपने इस रूप में माता ने श्वेत वस्त्र धारण किया हुआ है। देवी के दाएं हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है।

माँ शैलपुत्री की पूजा विधि
किसी भी पूजा का आरंभ सबसे पहले प्रथम पूजनीय गणेश जी की पूजा के साथ किया जाता है इसलिए नवरात्रि की पूजा की शुरुआत भी श्री गणेश की पूजा के साथ ही होती है। सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं फिर उस पर माता की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें। तत्पश्चात उसी चौकी पर नवग्रह बनाएं फिर कलश की स्थापना करें अब दोनों हाथों में पुष्प और अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें। माता की पूजा पुष्प, कुमकुम, अक्षत, इत्र आदि अर्पित करके करें।

इस चढ़ावे से होती है माता प्रसन्न
जैसा कि हमने आपको बताया माता शैलपुत्री अपने इस रूप में सफ़ेद वस्त्र धारण किये हुए है। माता को सफ़ेद रंग बहुत ही प्रिय है इसलिए आप इन देवी को सफ़ेद वस्त्र और सफ़ेद पुष्प ज़रूर चढ़ाएं। इसके अलावा आप 16 श्रृंगार की वस्तुएं, चंदन, रोली, हल्दी, बिल्वपत्र, फूल, दुर्वा, आभूषण, पान आदि भी चढ़ा सकते हैं।

शुद्ध देसी घी से बनी चीज़ों का भोग लगाएं
माँ शैलपुत्री को सफेद चीज़ों का भोग लगाना चाहिए जैसे सफ़ेद मिठाई। यदि माता का भोग शुद्ध गाय के घी से बना होगा तो और भी अच्छा होता है। ऐसी मान्यता है कि इससे माता प्रसन्न होती हैं और आपके सभी रोग दूर करती है। इसके अलावा आप माता को कंद मूल, मौसमी फलों का भोग भी लगा सकते हैं।

इन मंत्रों का करें जाप
देवी शैलपुत्री की पूजा करते समय इन मंत्रों का जाप करना न भूलें।
1. वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्
2. "ॐ शैल पुत्रैय नमः"

देवी शैलपुत्री की पूजा का महत्व
कहते हैं जो भी भक्त नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक सच्चे मन से माता की पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। देवी शैलपुत्री के आशीर्वाद से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं को माता की कृपा से मनचाहा वर मिलता है। इसके अलावा मनुष्य के जीवन में सुख और शांति बनी रहती है।



Click it and Unblock the Notifications
