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13 अक्टूबर को है शरद पूर्णिमा, इस दिन रखा जाता है खास व्रत
धार्मिक ग्रंथों में शरद पूर्णिमा का काफी महत्व बताया गया है। अश्विन माह की शुक्लपक्ष तिथि की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस साल शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी। ये शुभ दिन कौमुदी व्रत, रास पूर्णिमा और कोजगार पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस पूर्णिमा में चांद की किरणों में अमृत बसा होता है। इस दिन चंद्रमा भी अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है।

ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा विष्णु जी के चार महीने तक निद्रा अवस्था में रहने का अंतिम चरण है। पौराणिक कथाओं की मानें तो इसी दिन माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था। शरद पूर्णिमा के दिन ही भगवान श्री कृष्ण गोपियों के संग वृंदावन में रास रचाते थे।

शरद पूर्णिमा का महत्व
लोगों की आस्था है कि शरद पूर्णिमा के दिन व्रत करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। भगवान का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। इस दिन जो विवाहित महिलाएं व्रत करती हैं उन्हें जल्द संतान प्राप्ति होती है। वहीं जो महिलाएं अपने बच्चों के लिए इस दिन व्रत रखती हैं उनकी आयु लंबी होती है। इस दिन अविवाहित कन्याएं व्रत करती हैं तो उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।

शरद पूर्णिमा की चांदनी
शरद पूर्णिमा की रात में चांद सबसे ज्यादा चमकीला नजर आता है। इस रात चांद की किरणों में अलग ही तेज होता है। माना जाता है कि इससे व्यक्ति के शारीरिक, आध्यात्मिक शक्तियों का विकास करने में मदद मिलती है। इतना ही नहीं, चांद की इन पवित्र किरणों में असाध्य रोगों को दूर करने की ताकत भी होती है।

इस रात खीर का होता है खास महत्व
शरद पूर्णिमा के दिन खीर के सेवन को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। हिंदू धर्म के अनुसार इस रात दूध से बनी खीर अमृत के समान होती है। आप भी 13 अक्टूबर के दिन खीर जरूर खाएं और खिलाएं।



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