Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख -
कौन हैं 'हनुमान अंश' की 21 साल की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर? विदेश की नौकरी छोड़ बनाई ब्लॉकबस्टर फिल्म -
दुआ के दूसरे बर्थडे पर दीपिका-रणवीर ने कराया मैटरनिटी फोटोशूट, बेबी बंप फ्लॉन्ट करते हुए शेयर की तस्वीरें -
Laddu Gopal Chatthi 2026: 9 या 10 सितंबर, कब है लड्डू गोपाल की छठी? नोट करें सही तिथि, पूजा विधि और भोग -
Krishna Chhathi 2026 Wishes: माखन-मिश्री का भोग...कृष्ण जी की छठी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
वायरल बुखार, खांसी-जुकाम और इंफेक्शन से बचने के लिए करें ये 5 योगासन, इम्यूनिटी होगी बूस्ट -
‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ के बाद निमिषा सजयन ने ऐसे घटाया 14 किलो वजन, एक्ट्रेस ने शेयर की वेट लॉस जर्नी -
Paryushana Mahaparva 2026: आज से शुरू हुआ हुआ पर्युषण महापर्व, जानें आठ दिनों का महत्व और नियम -
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम
हिंदू धर्म में सिंदूर का महत्व
आमतौर पर सिंदूर को हिंदू महिलाओं द्वारा लगाया जाता है तथा इसका महत्व हिंदू पौराणिक कथाओं में छुपा है। सिंदूर, एक स्त्री के विवाहित होने की निशानी है तथा इसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना करते लगाती हैं। इसे माथे पर बालों के बीच में लगाया जाता है। हिंदू धर्म में, इसे लगाने का हक केवल विवाहित महिलाओं को दिया गया है।
एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने अपने पति के सम्मान के लिए अपने जीवन की आहुति दी थी जिसके कारण सिंदूर को देवी पार्वती का प्रतीक माना जाता है। अतः, माना जाता है कि जो महिला अपने माथे पर सिंदूर धारण करती है, देवी पार्वती का हाथ उसके सर पर सदैव बना रहता है तथा देवी पार्वती हर समय उसके पति की रक्षा करती है। READ: भारतीय महिलाएं क्यूं पहनती हैं नोज रिंग?
इसके अलावा सिंदूर धारण करने के कई ऐतिहासिक प्रमाण भी मौजूद हैं। तो चलें, उन महत्वपूर्ण कारणों के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।

1 ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, मेष राशि का स्थान माथे पर होता है। मंगल, मेष राशि का स्वामी ग्रह है और क्योंकि मंगल ग्रह का रंग लाल होता है, इसे शुभ माना जाता है। अतः इसे सौभाग्य का संकेत भी माना जाता है।
2 सिंदूर को नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह शक्ति एक पत्नी को किसी भी मुश्किल घड़ी में अपने पति की रक्षा करने में मदद करती है।
3 उत्तर भारत में नवरात्रि व संक्राति के त्योहारों पर विवाहित स्त्रियों के लिए सिंदूर लगाना अत्यंत अनिवार्य है। इससे पता चलता है कि सिंदूर धार्मिक कारणों की वजह से भी बहुत महत्व रखता है। READ: हिंदू परंपराओं के पीछे छुपा हुआ है ये विज्ञान
4 सिंदूर लगाने का एक और दिलचस्प कारण भी है। सिंदूर को धातु पारे के साथ हल्दी व चूने के मिश्रण से तैयार किया जाता है। पारा रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है एवं महिलाओं की यौन इच्छा को सक्रिय करता है। जिसके कारण इसमें एक शारीरिक महत्व भी शामिल हो जाता है। इसलिए सिंदूर को हमारी भावनाओं के केन्द्र, पिट्यूटरी ग्रंथ पर लगाना चाहिए।



Click it and Unblock the Notifications
