हिंदू धर्म में सिंदूर का महत्व

By Super

आमतौर पर सिंदूर को हिंदू महिलाओं द्वारा लगाया जाता है तथा इसका महत्व हिंदू पौराणिक कथाओं में छुपा है। सिंदूर, एक स्त्री के विवाहित होने की निशानी है तथा इसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना करते लगाती हैं। इसे माथे पर बालों के बीच में लगाया जाता है। हिंदू धर्म में, इसे लगाने का हक केवल विवाहित महिलाओं को दिया गया है।

एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने अपने पति के सम्मान के लिए अपने जीवन की आहुति दी थी जिसके कारण सिंदूर को देवी पार्वती का प्रतीक माना जाता है। अतः, माना जाता है कि जो महिला अपने माथे पर सिंदूर धारण करती है, देवी पार्वती का हाथ उसके सर पर सदैव बना रहता है तथा देवी पार्वती हर समय उसके पति की रक्षा करती है। READ: भारतीय महिलाएं क्‍यूं पहनती हैं नोज रिंग?

इसके अलावा सिंदूर धारण करने के कई ऐतिहासिक प्रमाण भी मौजूद हैं। तो चलें, उन महत्वपूर्ण कारणों के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।

 Significance Of Sindoor In Hinduism

1 ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, मेष राशि का स्थान माथे पर होता है। मंगल, मेष राशि का स्वामी ग्रह है और क्योंकि मंगल ग्रह का रंग लाल होता है, इसे शुभ माना जाता है। अतः इसे सौभाग्य का संकेत भी माना जाता है।

2 सिंदूर को नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह शक्ति एक पत्नी को किसी भी मुश्किल घड़ी में अपने पति की रक्षा करने में मदद करती है।

3 उत्तर भारत में नवरात्रि व संक्राति के त्योहारों पर विवाहित स्त्रियों के लिए सिंदूर लगाना अत्यंत अनिवार्य है। इससे पता चलता है कि सिंदूर धार्मिक कारणों की वजह से भी बहुत महत्व रखता है। READ: हिंदू परंपराओं के पीछे छुपा हुआ है ये विज्ञान

4 सिंदूर लगाने का एक और दिलचस्प कारण भी है। सिंदूर को धातु पारे के साथ हल्दी व चूने के मिश्रण से तैयार किया जाता है। पारा रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है एवं महिलाओं की यौन इच्छा को सक्रिय करता है। जिसके कारण इसमें एक शारीरिक महत्व भी शामिल हो जाता है। इसलिए सिंदूर को हमारी भावनाओं के केन्द्र, पिट्यूटरी ग्रंथ पर लगाना चाहिए।

Story first published: Saturday, November 22, 2014, 9:02 [IST]
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