Latest Updates
-
योगिनी एकादशी की शुभकामनाएं संस्कृत में भेजें, देवभाषा के इन मंत्रों और सूक्तियों से अपनों का दिन बनाएं मंगलमय -
इस कथा के बिना अधूरा है योगिनी एकादशी व्रत, मिलता है 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य -
Yogini Ekadashi 2026 Wishes: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', इन भक्तिमय संदेशों से अपनों को दें शुभकामनाएं -
बारिश का पानी स्किन के लिए अच्छा या खराब, जानें मानसून में इसके फायदे और नुकसान -
AC कोच बना 'हनीमून सुइट', फूलों-गुब्बारों से सजाया ट्रेन का डिब्बा, वायरल हुआ वीडियो, जानें रेवले के नियम -
Kiara Advani ने यश संग 'तबाही' में दिए दिए इंटीमेट सीन, जानें कैसे शूट किए जाते हैं बोल्ड सीन? -
एक्टर राजेश शर्मा को जहरीले कीड़े ने काटा, हालत नाजुक, जानें मानसून में क्यों बढ़ता है सांप कीड़ों का खतरा -
Yogini Ekadashi 2026: कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? इस दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम -
Varalakshmi Vrat 2026: सावन के आखिरी शुक्रवार को करें ये 5 उपाय, मां लक्ष्मी बरसाएंगी धन-दौलत -
पंजाब की पहली महिला ड्राइवर और पायलट थीं शेफ विकास खन्ना की मां बिंदु खन्ना, राजीव गांधी के साथ ली थी ट्रेनिंग
हिंदू धर्म में सिंदूर का महत्व
आमतौर पर सिंदूर को हिंदू महिलाओं द्वारा लगाया जाता है तथा इसका महत्व हिंदू पौराणिक कथाओं में छुपा है। सिंदूर, एक स्त्री के विवाहित होने की निशानी है तथा इसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना करते लगाती हैं। इसे माथे पर बालों के बीच में लगाया जाता है। हिंदू धर्म में, इसे लगाने का हक केवल विवाहित महिलाओं को दिया गया है।
एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने अपने पति के सम्मान के लिए अपने जीवन की आहुति दी थी जिसके कारण सिंदूर को देवी पार्वती का प्रतीक माना जाता है। अतः, माना जाता है कि जो महिला अपने माथे पर सिंदूर धारण करती है, देवी पार्वती का हाथ उसके सर पर सदैव बना रहता है तथा देवी पार्वती हर समय उसके पति की रक्षा करती है। READ: भारतीय महिलाएं क्यूं पहनती हैं नोज रिंग?
इसके अलावा सिंदूर धारण करने के कई ऐतिहासिक प्रमाण भी मौजूद हैं। तो चलें, उन महत्वपूर्ण कारणों के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।

1 ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, मेष राशि का स्थान माथे पर होता है। मंगल, मेष राशि का स्वामी ग्रह है और क्योंकि मंगल ग्रह का रंग लाल होता है, इसे शुभ माना जाता है। अतः इसे सौभाग्य का संकेत भी माना जाता है।
2 सिंदूर को नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह शक्ति एक पत्नी को किसी भी मुश्किल घड़ी में अपने पति की रक्षा करने में मदद करती है।
3 उत्तर भारत में नवरात्रि व संक्राति के त्योहारों पर विवाहित स्त्रियों के लिए सिंदूर लगाना अत्यंत अनिवार्य है। इससे पता चलता है कि सिंदूर धार्मिक कारणों की वजह से भी बहुत महत्व रखता है। READ: हिंदू परंपराओं के पीछे छुपा हुआ है ये विज्ञान
4 सिंदूर लगाने का एक और दिलचस्प कारण भी है। सिंदूर को धातु पारे के साथ हल्दी व चूने के मिश्रण से तैयार किया जाता है। पारा रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है एवं महिलाओं की यौन इच्छा को सक्रिय करता है। जिसके कारण इसमें एक शारीरिक महत्व भी शामिल हो जाता है। इसलिए सिंदूर को हमारी भावनाओं के केन्द्र, पिट्यूटरी ग्रंथ पर लगाना चाहिए।



Click it and Unblock the Notifications