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21 जून को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण है दुर्लभ, अब 900 साल बाद दिखेगा ऐसा नजारा
बीते 5 जून को ही चंद्र ग्रहण लगा था, अब इसी महीने में एक और ग्रहण लगने वाला है। जून माह की 21 तारीख को सूर्य ग्रहण लगने वाला है। यह ग्रहण भारत, दक्षिण पूर्व यूरोप एवं पूरे एशिया में देखा जा सकेगा। जून 2020 में पड़ने वाला ग्रहण कुंडलाकार होगा।
गौरतलब है कि जब पूर्ण ग्रहण लगता है तब चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है। वहीं आंशिक और कुंडलाकार ग्रहण में सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ही ढकता है। 21 जून को कुंडलाकार सूर्य ग्रहण लगने वाला है। इस लेख के माध्यम से जानते हैं 21 जून का सूर्य ग्रहण क्यों खास है।

सूर्य ग्रहण और सूतक का समय
भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण का आरंभ 21 जून की सुबह 10 बजकर 42 मिनट पर हो जाएगा। इस ग्रहण का सूतक 20 जून की रात 10 बजे से आरंभ होगा। ग्रहण का मध्य दोपहर को 12 बजकर 24 मिनट पर होगा। इसका मोक्ष दोपहर 2 बजकर 7 मिनट पर होगा। इस सूर्य ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 25 मिनट की रहेगी। यह खगोलीय घटना अधिकांश भू-मंडल पर देखी जा सकेगी।

जानें क्यों है जून 2020 का सूर्य ग्रहण दुर्लभ
जून की 21 तारीख को लगने वाले सूर्य ग्रहण को काफी खास और दुर्लभ बताया जा रहा है। ये भी कहा जा रहा है कि इस तरह का ग्रहण अब 900 साल बाद दिखाई देगा। इस ग्रहण में सूर्य वलयाकार स्थिति में सिर्फ 30 सेकंड तक ही रहेगा। इसमें सूर्य एक छल्ले की तरह नजर आएगा। सूर्य और चंद्रमा के बीच की दूरी इस ग्रहण को खास बनाती है।

जानें ग्रहण के समय कितनी होगी सूर्य और पृथ्वी के बीच दूरी
21 जून रविवार के दिन सूर्य और पृथ्वी के बीच 15 करोड़ 2 लाख 35 हजार 882 किमी की दूरी होगी। इस समय पर चांद अपने पथ पर चलते हुए 3 लाख 91 हजार 482 किमी की दूरी बनाए रखेगा। यह ग्रहण सिर्फ 30 सेकंड के लिए होगा और चांद सूर्य के एक बड़े हिस्से को ढक देगा जिससे सूर्य एक चमकती हुई रिंग की तरह दिखाई देगा।

सूर्य ग्रहण से जुड़ा एक और संयोग
21 जून को सूर्य ग्रहण के साथ एक और संयोग जुड़ा हुआ है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन होता है और रात सबसे छोटी होती है।



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