पका हुआ बेर

Plum
गुरू मात्सु ने एक साधु को तामी से मिलने पर्वत पर भेजा, जो वहाँ शांति से रहता था। तामी, मात्सु के कई शिष्यों में से एक था जो पर्वत पर एकांत में रहकर ध्यान करते थे। गुरू ने साधु को यह निर्देश दिया था कि वह उसके (गुरू के) प्रश्न का उत्तर तामी से पूंछ कर आए, जब तुमने महान गुरू मात्सु को बुलाया तो तुमने क्या सीखा और किस कारण तुम वहाँ रह रहे हो?

तामी ने उत्तर दिया, "महान गुरू ने मुझे बताया कि मन ही बुद्ध था और इसीलिये मैं यहाँ रहने चला आया।" साधु बोला, "परंतु गुरू का बुद्ध धर्म अब ऐसा नही है वह अलग है। तामी ने साधु से परिवर्तन के बारे में पूछा। साधु ने उत्तर दिया, "अब गुरू का कहना है कि यह न तो ‘मन' है और न ही ‘बुद्ध'।

तामी हंसा और बोला, "यह वृद्ध आदमी दूसरों के मन में बहुत भ्रम पैदा कर रहा है।इसका कोई अंत नही है उसे ऐसा कहने दो कि न तो यह मन है न बुद्ध। मेरे अनुसार ‘मन ही बुद्ध' है।

उस साधु ने तामी के साथ हुई सारी बातचीत मात्सु को बताई गुरू बहुत खुश हुए और तामी का नाम लेते हुए बोले "बेर अब पक चुका है", जिसका अर्थ है ‘बड़ा बेर', वे बोले, "बेर पक चुका है और मैं उसे हिला नही सकता (अस्थिर नही कर सकता)|"

Story first published: Friday, September 7, 2012, 16:58 [IST]
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