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गणेश चतुर्थी: गणपति की मूर्ति लेते समय इन बातों का रखें खास ख्याल
गणेश चतुर्थी के उत्सव में अब कुछ ही दिन बचे हैं। इस वक़्त सभी बाज़ार भगवन गणेश की अलग अलग मूर्तियों से सजे हुए हैं। ये खूबसूरत और अलग अलग रंगों की मूर्तियां गणेश भक्तों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं और वो इस दुविधा में हैं की इस बार पूजा के लिए कौन सी मूर्ति को साथ ले जाया जाए।

गणेश चतुर्थी का पर्व हिंदू धर्म में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। दस दिनों तक चलने वाले इस त्योहार के लिए लोग कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते हैं। गणेश जी की मूर्ति की स्थापना घर में की जाती है और दस दिनों तक इनकी पूजा अर्चना होती है और उसके बाद इनका विसर्जन किया जाता है। इस साल ये त्योहार 13 सितंबर, 2018 को मनाया जाएगा। जानते हैं की उनकी मूर्ति का चयन करने के दौरान कौन सी अहम बातों को ध्यान में रखना ज़रूरी है।

गणेश जी की बैठी या खड़ी मूर्ति
इस वक़्त मार्केट में गणेश मूर्ति की वैरायटी की भरमार है। वहीं दुकानदार आपको हर मूर्ति के सकारात्मक प्रभाव बताते हुए दिख जाएंगे। बहरहाल, अगर आप घर में गणेश जी की स्थापना करना चाहते हैं तो उनकी बैठी हुई मूर्ति चुनें। गणेश भगवान की खड़ी मूर्ति कार्यस्थल के लिए चुनना बेहतर है। गणेश जी की बैठी हुई प्रतिमा आर्थिक स्थिरता लाती है और साथ ही धन के गलत इस्तेमाल को रोकती है। वहीं कार्यस्थल में उनकी खड़ी मूर्ति व्यवसायिक उन्नति में मदद करती है।

किस दिशा में होनी चाहिए गणेश जी की सूंड
गणेश जी की मूर्ति खरीदते वक़्त लोगों को गणेश जी की सूंड की दिशा को लेकर असमंजस रहता है। वैसे तो दोनों ही गणेश जी अच्छे लगते हैं लेकिन दोनों का इस्तेमाल पूजा के लिए नहीं किया जा सकता है। जिस मूर्ति में सूंड बाईं तरफ हो सिर्फ उसका ही प्रयोग किया जाना चाहिए। ये पूजा के लिए काफी शुभ माने जाते हैं।

एक मूषक और मोदक
भगवान गणेश नन्हे मूषक यानि चूहे के साथ ही नज़र आते हैं। ये मूषक गणेश जी की सवारी है। कई कलाकृतियों में ये मूषक गणपति के चरणों के पास मोदक खाता हुआ नज़र आता है। मोदक शिव और पार्वती के पुत्र गणेश को भी बेहद प्रिय है। आप ऐसी मूर्ति का चुनाव करें जिसमें गणेश जी के साथ मूषक और मोदक दोनों हो।

किस चीज़ की बनी होनी चाहिए उनकी मूर्ति
ऐसी मूर्ति आप चुनें जो मिटटी, प्लास्टर ऑफ पेरिस या ऐसे किसी मेटेरियल से तैयार किया गया हो जिसका विसर्जन आसानी से हो और पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचाए। ध्यान रहे मूर्ति तैयार करने में केमिकल का इस्तेमाल ना किया गया हो। वैसे आप घर पर ही चिकनी मिट्टी और मिट्टी का प्रयोग करके भी अपनी मूर्ति तैयार कर सकते हैं। ऐसा कहा जाता है की लकड़ी से बनी हुई गणेश मूर्ति का उपयोग पूजा के लिए नहीं करना चाहिए। इसे पूजा के कमरे में भी ना रखें तो बेहतर होगा।

किस रंग की होनी चाहिए मूर्ति
उत्सव के दौरान मूर्ति का रंग भी काफी मायने रखता है। आप सिंदूरी रंग के गणेश मूर्ति का चयन कर सकते हैं। सफ़ेद रंग का भी प्रयोग अच्छा रहेगा। इस रंग की मूर्ति घर में शांति बनाये रखने में मदद करती है। ऐसा माना जाता है की यदि इन रंगों से तैयार मूर्ति को गणेश चतुर्थी की पूजा के लिए चुना जाता है तो ये जल्दी मनोकामनाएं पूरी करता है।



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