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Varaha Jayanti 2021: इस दिन होती है भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा, जानें तिथि, पूजा विधि व कथा
वराह जयंती के दिन भगवान विष्णु के वराह रूप का पूजन किया जाता है। इस दिन श्रीहरि के तीसरे अवतार वराह का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन भगवान ने दुनिया की रक्षा के लिए आधे सूअर और आधे मनुष्य का रूप लिया था। वराह जयंती के दिन जातक भगवान वराह की पूजा करते हैं और उनसे सुख, समृद्धि, धन, सेहत, खुशहाली की कामना करते हैं। जानते हैं इस साल वराह जयंती किस दिन मनाया जाएगा और साथ ही जानते हैं इस दिन का महत्व और इस अवतार के पीछे की कहानी।

वराह जयंती की तिथि
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वराह जयंती का उत्सव भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल यह पावन पर्व 9 सितंबर, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा।

वराह जयंती की पूजा विधि
वराह जयंती के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके निवृत्त हो जाएं। इसके पश्चात् पूजा घर को शुद्ध कर लें। सबसे पहले भगवान विष्णु अथवा भगवान वराह की मूर्ति को एक पवित्र धातु के बर्तन या कलश में रख दें। इसे बाद में नारियल के साथ आम की पत्तियों और पानी से भर दें। ये सभी चीजें ब्राह्मण को दान में दे दी जाती हैं।
भगवान वराह को प्रसन्न करने के लिए आरती, भजन गाएं और श्रीमद् भगवद् गीता का पाठ करें।
जो जातक इस दिन उपवास रखते हैं उन्हें जयंती की पूर्व संध्या पर जरूरतमंद लोगों को सामर्थ्य अनुसार वस्त्र और पैसों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा होती है।

भगवान विष्णु को क्यों लेना पड़ा वराह का अवतार?
इस अवतार से जुड़ी कथा का जिक्र पुराणों में मिलता है। दिती ने हिरण्यकश्यपु और हिरण्याक्ष नाम के दो शक्तिशाली राक्षसों को जन्म दिया जो समय के साथ और क्रूर व शक्तिशाली हुए। उन्होंने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया और वर के रूप में उन्होंने असीमित शक्तियों की मांग की ताकि उन्हें कोई भी हरा न सके। भगवान ब्रह्मा ने उस वरदान को स्वीकार कर लिया। इसके पश्चात् दोनों राक्षसों ने तीनों लोकों में अपनी विजय मनवाने के लिए लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया।
वरुण देव ने उन दोनों को बताया कि भगवान विष्णु इस ब्रह्मांड के संरक्षक व पालनकर्ता है और उन्हें कोई भी पराजित नहीं कर सकता है। इस दोनों राक्षसों के अत्याचार से मुक्ति दिलाने और तीनों लोकों की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वराह का अवतार लिया। भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष को पराजित कर दिया और उसका वध कर जनमानस का कल्याण किया।

वराह जयंती से जुड़ी कथा
भगवान विष्णु के वराह अवतार से जुड़ी एक अन्य मान्यता भी है। श्रीहरि के वराह रूप ने दुनिया से बुराई का नाश करने और लोगों को बचाने का कार्य किया। ऐसा कहा जाता है कि एक बार पृथ्वी जलमग्न हो गयी थी। तब भगवान विष्णु की नासिका अर्थात नाक से भगवान विष्णु ने ही वराह अवतार लिया था।
पलक झपकते ही वराह अवतार ने पर्वताकार रूप ले लिया। उनकी एक गर्जन से तीनों लोकों में हडकंप मच गया। वराह अवतार ने जल में डूबी हुई पृथ्वी को तलाशा और अपने थूंथने की मदद से पानी से बाहर निकाल लाये।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वराह जयंती का उत्सव भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल यह पावन पर्व 9 सितंबर, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा।



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