Latest Updates
-
Nurses Day 2026: सलाम उन योद्धाओं को जो दर्द में मुस्कान बांटते हैं, नर्स डे पर इन संदेशों से कहें थैंक्यू -
Aaj Ka Rashifal, 6 May 2026: राशियों की लगेगी लॉटरी, वृश्चिक को मिलेगा अटका धन और कुंभ का चमकेगा भाग्य -
Hantavirus Outbreak: बीच समंदर क्रूज पर फैला हंतावायरस, 3 की मौत; जानें कैसे फैलता है यह वायरस? -
Met Gala 2026: सोने की साड़ी और हीरे जड़ा ब्लाउज पहन रेड कार्पेट पर उतरीं ईशा अंबानी, बनाने में लगे 1200 घंटे -
Bada Mangal 2026 Upay: ज्येष्ठ के पहले बड़े मंगल पर करें ये आसान उपाय, हनुमान जी दूर करेंगे सभी संकट -
39 की उम्र में शादी करने जा रही हैं हुमा कुरैशी? जानें कौन है उनका होने वाला दूल्हा -
Ekdant Sankashti Chaturthi 2026: एकदंत संकष्टी चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और पूजा विधि -
Bada Mangal Wishes in Sanskrit: इन संस्कृत श्लोकों और संदेशों से प्रियजनों को दें बड़े मंगल की शुभकामनाएं -
Bada Mangal 2026 Wishes: संकट मोचन नाम तुम्हारा...पहले बड़े मंगल पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal, 5 May 2026: साल का पहला 'बड़ा मंगल' आज, बजरंगबली की कृपा से इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत
Vivah Panchami 2021: विवाह पंचमी: जानें क्यों अशुभ होता है इस दिन विवाह जैसा मांगलिक कार्य
प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को विवाह पंचमी का शुभ अवसर मनाया जाता है। विवाह पंचमी की तिथि के दिन ही भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था। विवाह पंचमी का यह पर्व राम मंदिरों में बहुत ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है और अयोध्या में तो इस दिन की ख़ास ही छटा रहती है। इस दिन श्री राम और सीता माता के विवाह का जश्न मनाया जाता है। परन्तु महत्वपूर्ण बात यह है कि इस शुभ दिन विवाह संपन्न नहीं किये जाते हैं। चलिए जानते हैं विवाह पंचमी की तिथि, महत्व और इस दिन विवाह ना कराए जाने के पीछा का कारण।

तिथि एवं मुहूर्त
इस साल विवाह पचंमी 07 दिसंबर, 2021 को रात 11:40 बजे से आरंभ होगी और 08 दिसंबर, 2021 को रात 09:25 बजे समाप्त होगी। लोग 8 दिसंबर को दिनभर भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा-आराधना कर सकते हैं।

विवाह पंचमी का महत्व
जिन लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही हो या फिर विलम्ब हो रहा हो उन्हें विवाह पंचमी के दिन व्रत रखना चाहिए एवं विधि-विधान के साथ भगवान राम और माता सीता का पूजन करना चाहिए। इसी के साथ प्रभु श्रीराम और माता-सीता का विवाह सम्पन्न करवाना चाहिए। इसके साथ ही इस दिन अयोध्या और जनकपुर में विशेष आयोजन किए जाते हैं। इतना ही नहीं, इस दिन कई स्थलों पर सीता स्वंयवर और राम विवाह का नाट्य रूपांतरण भी किया जाता है।

क्यों नहीं कराए जाते हैं इस विशेष दिन पर विवाह
विवाह पंचमी की तिथि पर वैवाहिक अड़चनों को दूर करने के उद्देश्य से पूजा एवं व्रत किये जाते हैं। परन्तु यह तिथि विवाह करने के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती है। इसका कारण है राम-सीता के विवाह के बाद का उनका कष्ट भरा जीवन। 14 साल वनवास के बाद भी सीता माता को अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ा। मर्यादा परुषोत्तम भगवान राम ने गर्भवती सीता का परित्याग किया और माता सीता का आगे का सम्पूर्ण जीवन अपनी संतानों लव और कुश के साथ वन में ही बीता। यही वजह है कि विवाह पंचमी के दिन लोग बेटियों की शादी नहीं करते हैं। संभवतः उनके मन में यह भय रहता है कि कहीं माता सीता की तरह उनकी बेटी का वैवाहिक जीवन दुखमय न हो।
सीता माता के दुःख भरे एवं संकटमय रहे वैवाहिक जीवन के कारण ही इस दिन विवाह निषेध होते हैं।



Click it and Unblock the Notifications