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जमात-उल-विदा: जानें क्यों है इस दिन की खास अहमियत
देशभर में Corona Virus के बीच लोग अपनी जिंदगी को नॉर्मल करने की कोशिश कर रहे हैं। बीते सालों के मुकाबले इस साल रमजान महीने की चमक बढ़ी है, और अल्लाह की इबादत करने में किसी भी तरह की कमी नहीं आयी है।
रमजान के महीने में जमात उल विदा खास अहमियत रखता है। जानते हैं कि इस दिन की क्या महत्ता है।

जुमे की नमाज होती है खास
इस्लाम धर्म के मानने वाले लोगों के लिए जुमे की नमाज बहुत अहम होती है। माना जाता है कि इस दिन खुदा का फरिश्ता अकीदत करने वाले लोगों की फरियाद सुनता है। इस वजह से रमजान महीने में पड़ने वाले आखिरी शुक्रवार की खुसूसियत बढ़ जाती है। लोग मानते हैं कि इस दिन सभी गुनाहों की माफ़ी मिल जाती है और अल्लाह की रहमत मिलती है।

जमात-उल-विदा का मतलब क्या है?
जमात-उल-विदा अरबी का शब्द है। इसका मतलब है जुमे (शुक्रवार) की विदाई। रमजान महीने के आखिरी शुक्रवार को अरबी में अल-जुमूह-अल-यदीम और उर्दू में अलविदा जुमा भी कहते हैं।

जमात-उल-विदा का महत्व
जुमे के दिन होने वाली इस तरह की धार्मिक सभा का जिक्र कुरआन में भी मिलता है। इस दिन छोटी बड़ी हर मस्जिद में मुसलमानों की भारी भीड़ पहुंचती है। रमजान के दौरान लोग पांचों वक्त की नमाज पढ़ते हैं, मगर आखिरी जुमे की नमाज के लिए वो काफी उत्साहित रहते हैं।

क्यों खास है जुमा
इस्लाम धर्म में शुक्रवार का दिन पाक माना गया है। ऐसी आस्था है कि इस दिन मांगी गयी हर मुराद पूरी होती है। शुक्रवार के दिन किये गए दान-धर्म का पुण्य भी दूसरे दिनों के मुकाबले अधिक मिलता है। लोग इस दिन जरूरतमंदों की खासतौर पर मदद करते हैं। मान्यता है कि ये दिन उन्हें खुदा से जुड़ने का मौका फ़रहाम करता है इसलिए वो अपना ज्यादा से ज्यादा समय अकीदत में बिताते हैं और अल्लाह को याद करके बरक़त की दुआ मांगते हैं।



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