Latest Updates
-
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख -
कौन हैं 'हनुमान अंश' की 21 साल की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर? विदेश की नौकरी छोड़ बनाई ब्लॉकबस्टर फिल्म
कहां से आया सुदर्शन चक्र? आइए जानते है इसकी काहानी
सुदर्शन चक्र कहां से आया था और चक्रों का जन्मदाता कौन था? यही आज इस आर्टिकल के जरिए जानने की कोशिश करेंगे।
महाभारत किस शख्स ने टीवी सीरियल में नहीं देखी होगी? महाभारत में कृष्ण की तर्जनी अंगुली में घूमने वाला सुदर्शन चक्र भी याद ही होगा।
कहते हैं कि सुदर्शन चक्र एक ऐसा अचूक अस्त्र था कि जिसे छोड़ने के बाद यह लक्ष्य का पीछा करता था और उसका काम तमाम करके वापस छोड़े गए स्थान पर आ जाता था। चक्र विष्णु की तर्जनी अंगुली में घूमता था। सबसे पहले यह चक्र उन्हीं के पास था।
महाभारत युद्ध में भगवान कृष्ण के पास सुदर्शन चक्र था।यह सुदर्शन चक्र कहां से आया था और चक्रों का जन्मदाता कौन था? यही आज हम जाने की कोशिश करेंगे।

1.
सुदर्शन चक्र के किनारे 108 दांत होते हैं जिसे अगर किसी के पीछे भेजा जाए तो यह कई योजनाओं (1 योजना = 8 किमी) की यात्रा करने की क्षमता रखता है।

2.
यह किसी के पीछे फेका नहीं जाता है बल्कि इच्छाशक्ति के द्वारा इसे दुश्मन के खिलाफ भेजा जाता है। इसमें असीम ताकत होने की वजह से यह सब कुछ नष्ट कर देता है।

3.
एक बार जब यह उंगली से निकल जाता है तो यह दुश्मन का पीछा करके उसका नाश करके ही अपने स्थान पर आता है।

4.
यह उंगली से निकलने के बाद बहुत तेज़ी से दुश्मन का पीछा करता था। और तब तक पीछा करता था जब तक दुश्मन इसके सामने समर्पण ना कर दे। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इसके सामने आत्मसमर्पण कर देता था उसे भगवान विष्णु खुद बचाने आते थे।

5.
द्वापर युग में भगवान कृष्ण, जो विष्णु के आठवें अवतार थे उन्हें यह अग्नि देव से प्राप्त हुआ था।

6.
ऋषि परशुराम ने कृष्ण को यह अस्त्र चलाना सिखाया था।

7.
शिवपुराण के अनुसार शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र दिया था, ताकि बुराई का संहार हो सकें। सुदर्शन का मतलब सुंदर दर्शन एक अच्छा नजरिया होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने शिव जी से हजारों वर्षों तक प्रार्थना की, जिसके फल सुवारूप शिव जी ने उनसे उनकी इच्छा पूछी। तब विष्णु जी ने उनसे एक ऐसा अस्त्र मांगा जिससे वे सारे राक्षसों और असुरों पर विजय पा सके। इस इच्छा को पूरा करते हुए भगवान शिव ने उन्हें सुदर्शन चक्र दिया था।

8.
भगवान विष्णु और उनके सभी अवतारों की दाहिनी हाथ की तर्जनी में यह सुदर्शन चक्र रहता है।



Click it and Unblock the Notifications
