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क्यों करते हैं हम पूजा की शुरुवात ॐ और अंत स्वाहा से
हिन्दू धर्म में ऋषि मुनियों के अनुसार ओ३म् शब्द के तीन अक्षरों से भिन्न भिन्न अर्थ निकलते हैं। यह ओ३म् शब्द अ, उ, म तीन अक्षरों से मिलकर बना है।
प्रत्येक अक्षर ईश्वर के अलग अलग नामों को अपने आप में समेटे हुए है। हिन्दू धर्म के अनुसार चले तो ॐ शब्द मे ब्रह्मा-विष्णु-महेश तीनों के गुण समाये हुए हैं। इसीलिए इसे बीज मंत्र भी कहा जाता है।
शास्त्र क्या कहते हैं
शास्त्रों के अनुसार हमारी दुनिया राज, सत, और तम इन तीन गुणों से बनी हुई है।
एकाक्षर ब्रह्म
ॐ एकाक्षर ब्रह्म के रूप में माना जाता है जिससे सारी प्रकृति का निर्माण हुआ और विनाश भी इसी से होगा। ॐ तीनों गुणों का शासक और भगवान है।

परभृह्मा
भगवान् गणेश को प्रकृति के परभृह्मा कहा जाता है। इसीलिए उनका नाम गानो का ईश यानी गुणो (गुण) का ईश' कहा जाता है।

गणेश तत्व
सरल शब्दों में अगर कहा जाए तो गणेश सिर्फ भगवान् ही नहीं बल्कि इन तीनों गुणों के भी देवता हैं।

ॐ और गणेशा का संबंध
गणेश को मंगलमूर्ति कहा जाता है जिसकी वजह से इनकी सबसे पहले पूजा होती है। यही कारण है कि ॐ का सीधा संबंध गणेश से है।

ॐ का जाप
ॐ का जाप हम इसीलिए करते हैं क्योंकि हम भगवान् गणेश का सबसे पहले ध्यान करते हैं।

चमत्कारी शक्तियां
ॐ शब्द में कुछ ऐसी अद्भुत शक्तियां है जिसकी वजह से हम इस मंत्र का उच्चारण करते हैं।

हम हवन के समय स्वाहा क्यों बोलते हैं ?
दरअसल स्वाहा का अर्थ होता है सही तरीके से पहुंचाना। हवन के दौरान स्वाहा बोलने से देवताओं को अग्नि के जरिए भोग लगाया जाता है। कोई भी यज्ञ तब तक सफल नहीं माना जा सकता है जब तक कि भोग का ग्रहण देवता न कर लें, पर देवता ऐसा भोग को तभी स्वीकार करते हैं जबकि अग्नि के द्वारा स्वाहा के माध्यम से अपर्ण किया जाए।

ब्रह्मा
एक बार ऐसा हुआ कि देवता को खाने की कमी हो गयी। जिसे परेशान हो कर वे ब्रह्मा के पास गए। और उनसे प्रार्थना की, कि इसका वे समाधान करें। इसमें ब्रह्मा ने मूल प्रकृति पर जा कर ध्यान किया। जिससे प्रसन्न हो कर देवी ब्रह्मा के सामने प्रकट हुई और उनसे कहा कि वे वरदान मांगे। इसे पर ब्रह्मा ने देवी को कहा कि अग्नि से शादी कर लें जिससे उन्हें चढाई जाने वाली सामग्री देवता तक पूछे।

कहानी
इसकी कहानी कुछ इस तरह है कि ब्रह्मा ने कहा कि यज्ञ में चढ़ाई गयी सामग्री तब तक देवतों तक नहीं पहुंचेगी जब तक देवी का नाम नहीं लिया जाएगा। इसलिए देवी स्वाहा ने अग्नि से विवाह कर लिया।

यज्ञ
हवन में डाली गयी सामग्री जो अग्नि देव को अर्पित की जाती है वो देवताओं तक पहुंच जाए। इसके लिए अग्नि को सामग्री को जलने की शक्ति यानी दहन शक्ति उनकी पत्नी स्वाहा से प्राप्त होती है। इसलिए यज्ञ में स्वाहा शब्द का इस्तेमाल होता है।



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