Latest Updates
-
Navreh 2026: सुबह उठते ही क्यों देखा जाता है 'चावल और जंत्री'? जानें इस कश्मीरी परंपरा का राज -
Gudi Padwa 2026 Wishes in Marathi: 'नव्या वर्षाच्या हार्दिक शुभेच्छा!' मराठी अंदाज में दें गुड़ी पड़वा की बधाई -
41 की उम्र में मां बनेंगी Divyanka Tripathi, जानें 'लेट प्रेग्नेंसी' में सुरक्षित रहने के जरूरी हेल्थ टिप्स -
Gangaur 2026 Wishes: 'म्हारे माथे री बिंदिया चमकती रहवे...', सखियों को राजस्थानी अंदाज में दें शुभकामना संदेश -
Eid Ka Chand 2026 Live Kab Dikhega: सऊदी अरब में कब दिखेगा ईद का चांद? जानें भारत में कब मनाई जाएगी मीठी ईद -
Gudi Padwa पर गाड़ी खरीदना शुभ है या अशुभ? जानें 2026 में वाहन खरीदने के कुल कितने हैं मुहूर्त -
Navratri Wishes for Husband & Wife: अपने लाइफ पार्टनर को इन भक्तिमय संदेशों के साथ कहें 'शुभ नवरात्रि' -
हरीश राणा को कैसे दी जाएगी 'इच्छामृत्यु'? वेंटिलेटर हटने से लेकर अंतिम सांस तक, मरीज के साथ क्या-क्या होता है? -
Navratri 2026: नवरात्रि के दिनों में न करें 5 गलतियां, वरना माता रानी हो जाएंगी रुष्ट -
Shab-e-Qadr Mubarak 2026: इबादत, मगफिरत और दुआओं की रात, अपनों को भेजें शब-ए-कद्र के ये मुबारक संदेश
कुछ धर्मों में क्यूं वर्जित है प्याज, लहसुन और मदिरा का सेवन
सत्व, रजस और तमस, माया के ये तीन गुण हर मनुष्य के दिमाग में अलग अलग लेवल में मौजूद होते हैं| सत्व वे गुण हैं जो धीरज, संयम, पवित्रता और मानसिक शांति को दर्शाते हैं| कामुकता और धन की लालसा ये रजस गुण हैं| सारी बुराइयां तमस के अंतर्गत आती हैं जैसे गुस्सा, क्रोध, घमंड और विनाशकारी सोच आदि| भगवान के प्रति ध्यान लगाने के लिए रजस और तमस गुणों का कम होना चाहिए ताकि सात्विक गुणों में वृद्धि हो सके|

बहुत से खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ मानसिक स्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं जिससे सत्व, रजस और तमस जैसे गुणों की मात्रा भी प्रभावित होती है| उदाहरण के तौर पर शराब का सेवन व्यक्ति की बर्दाश्त क्षमता को कम करता है और वासना जैसे राजसिक गुणों को बढ़ाता है। इसी तरह से प्याज, लहसुन, हींग आदि खाद्य पदार्थ गुस्से जैसे तामसिक गुणों को बढ़ाते हैं| भगवान के सच्चे भक्त को ऐसी किन्ही भी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जो कि राजसिक और तामसिक गुणों को बढ़ाते हैं क्यों की ये भगवान की पूजा में अड़चन पैदा करते हैं|
जब राजसिक और तामसिक गुणों में वृद्धि होगी तो मनुष्य का दिमाग शांत नहीं होगा| इसलिए इन स्थितियों में व्यक्ति भगवान में मन नहीं लगा सकता है| जब सत्व गुण की मात्रा बढ़ती है तो व्यक्ति मन से और ईमानदारी से भगवान की पूजा अर्चना करता है| इसलिए भगवान के भक्त को चाहिए कि उसका दिमाग राजसिक और तामसिक प्रकृतियों को दबा दे और सात्विकता की स्थिति को प्राप्त करे|
इसलिए स्वाद (जिव्हा) को मिलाकर सारी इन्द्रियां मनुष्य के वश में और पवित्र हों ताकि दिमाग को भी पवित्र रखा जा सके| मन, कर्म और वचन की पवित्रता द्वारा ईश्वर को खुश किया जा सकता है|



Click it and Unblock the Notifications











