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फुलेरा दूज के दिन बनता है अबूझ मुहूर्त, होती हैं रिकॉर्डतोड़ शादियां
हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज मनाई जाती है। यह पर्व होली की आमद का संदेशा लाता है। भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस दिन की विवाह के मामले में भी बड़ा महत्व माना जाता है। फुलेरा दूज के दिन न सिर्फ फूलों की होली खेली जाती है बल्कि इस दिन कई शादी-विवाह के कार्यक्रम भी पूरे किये जाते हैं। जानते हैं फुलेरा दूज का दिन विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए क्यों इतना शुभ माना जाता है।

श्री कृष्ण के साथ खेली जाती है फूलों की होली
होली के पर्व से पहले फुलेरा दूज की तिथि पड़ती है। इस दिन कान्हा और राधा रानी के साथ भक्त फूलों की होली खेलते हैं। इसके साथ साथ रंगों का भी प्रयोग किया जाता है। यह त्योहार लोगों के जीवन में सकारात्मकता और खुशियां लेकर आता है।

फुलेरा दूज के दिन बनता है अबूझ मुहूर्त
फुलेरा दूज को साल के सबसे महत्वपूर्ण और शुभ दिनों में से एक माना जाता है। दरअसल यह दिन किसी भी प्रकार के हानिकारक प्रभाव और दोषों से प्रभावित नहीं होता है इसलिए इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। आमतौर से हिंदू धर्म में शादी विवाह को एक बड़ा कर्म माना जाता है। विवाह से जुड़े हर कार्य के लिए शुभ मुहूर्त और तिथि को ध्यान में रखा जाता है। मगर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फुलेरा दूज के दिन हर एक क्षण शुभ होता है। इस दिन विवाह जैसा मंगल कार्य करने के लिए भी दिन बेहद उपयुक्त माना जाता है। शीत ऋतु के बाद इसे शादियों के सीजन का अंतिम दिन माना जाता है इसलिए इस दिन रिकॉर्ड तोड़ शादियां होती हैं।

अन्य मांगलिक कार्यों के लिए भी शुभ दिन
शादी जैसे संस्कार के अतिरिक्त और भी दूसरे मांगलिक कार्यों के लिए फुलेरा दूज बहुत शुभ दिन है। इस दिन लोग कई मांगलिक कार्यों को पूरा करते हैं। घर-संपत्ति से जुड़ा कार्य करने के लिए ये दिन शुभ माना जाता है। इतना ही नहीं, कई लोग अपने नए व्यापार की शुरुआत भी फुलेरा दूज की शुभ तिथि से करते हैं ताकि उन्हें समृद्धि मिल सके।



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