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चाणक्य नीति: अपने दुश्मनों को पछाड़ने के लिये मालूम होनी चाहिये उनकी ये बातें
सच ये है कि कोई भी अपने दुश्मन जानबूझकर नहीं बनाता है; लेकिन ये अनजाने में बन जाते हैं। ऑफिस हो या कॉलेज, आपका बुरा चाहने वालों की कमी नहीं है।
सच ये है कि कोई भी अपने दुश्मन जानबूझकर नहीं बनाता है; लेकिन ये अनजाने में बन जाते हैं। ऑफिस हो या कॉलेज, आपका बुरा चाहने वालों की कमी नहीं है।
इस बारे में महान आचार्य चाणक्य का कहना है कि दुश्मनों से बहुत चालाकी से निपटना चाहिए। अपने शत्रु के साथ एकदम से प्रहार करना सही नहीं है बल्कि आपको उसके साथ पहले संभल कर कोल्ड वॉर करना चाहिए और उसके बाद हेल्दी कॉम्पीटीशन निभाते हुए स्टेप उठाना चाहिए।
इस आर्टिकल में आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियों को ध्यान में रखते हुए हम आपको अपने प्रतिस्पटर्धियों और शत्रुओं से निपटने का तरीका बता रहे हैं:

1. दुश्मनों को कभी हल्के में न लें-
अपने शत्रु को कभी भी अपने से कमतर न आंकें। हमेशा सतर्क और सावधान रहें। उसकी हर गतिविधि पर नज़र रखें, चाहें वो आपसे जुड़ी हो या नहीं। पर याद रखें कि अच्छे व्यक्ति कभी पहले प्रहार नहीं करते, आप उसके मूव का इंतजार करें और उसके बाद ही अपना कदम उठाएं।

2. उसके बारे में पूरी जानकारी रखें -
अपने दुश्म न की हर कमजोरी और मजबूती को जानें। चाणक्य का कहना है कि आप अपने शत्रु को एक तिहाई तभी हरा देते हैं जब आपके उसके बारे में हर जानकारी ले लेते हैं, तो आप उसे आसानी से पराजित कर सकते हैं।

3. अपनी रणनीतियों का अभ्यास करें -
आप जो भी रणनीतियां, अपने शत्रु के खिलाफ अपनाने जा रहे हैं उनका अभ्यास पहले कर लें और समझ लें कि आपको कहां, कैसे कदम उठाना है। क्यों कि कई बार सोचने और उसे कार्यान्वित करने में काफी अन्तर होता है।

4. शांत -
आप अपने दुश्मन के साथ सिर्फ दिमाग से लड़ें तो बेहतर होगा। लड़ाई या हाथा-पाई आखिरी विकल्प होना चाहिए। हमेशा ठंडे दिमाग से अपने शत्रु के खिलाफ चालों को चलें।

5. शत्रु से घृणा न करें -
चाणक्य इस बात पर जोर देते हैं कि कभी भी अपने शत्रु से घृणा न करें, इससे आपकी तार्किक शक्ति मर जाती है। उनके साथ एक खिलाड़ी की तरह पेश आएं।



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