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Som Pradosh Vrat Katha: सोम प्रदोष पर पढ़ लें ये व्रत कथा, मिलेगा भगवान शिव का आशीर्वाद, बढ़ेगी सुख-समृद्धि
Som Pradosh 2025 Vrat Katha In Hindi: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र व्रत है। हर महीने में दो बार प्रदोष व्रत आता है, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। यानी साल भर में कुल 24 प्रदोष व्रत होते हैं। इस बार 3 नवंबर को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि और सोमवार का दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सोम प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस समय महादेव कैलाश पर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं और देवगण उनकी स्तुति करते हैं। सोमवार के दिन प्रदोष व्रत करने का फल अन्य दिनों की तुलना में अधिक होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने के बाद इस व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। इससे भगवान भोलेनाथ की कृपा से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।

सोम प्रदोष व्रत की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का निधन हो गया था। उसका कोई आश्रयदाता नहीं था इसलिए वह अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगकर जीवन यापन करती थी। एक दिन जब वह भिक्षा लेकर लौट रही थी, तो उसे रास्ते में एक घायल बालक मिला। दयावश उसने उसे अपने घर ले जाकर उसकी सेवा की। वह बालक विदर्भ का राजकुमार था। उसके राज्य पर शत्रुओं ने कब्जा कर लिया था और उसके पिता को बंदी बना लिया गया था। ब्राह्मणी और उसके पुत्र ने राजकुमार को अपने घर में आश्रय दिया और उसकी देखभाल की।
इसी बीच एक दिन गंधर्व कन्या अंशुमति ने उस राजकुमार को देखा और उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई। उसके माता-पिता को भी राजकुमार पसंद आया। कुछ दिनों बाद भगवान शिव ने गंधर्वराज को स्वप्न में आदेश दिया कि अंशुमति का विवाह उसी राजकुमार से कर दें।
वह ब्राह्मणी प्रदोष व्रत करती थी। कुछ समय बाद, ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और अपना राज्य पुनः प्राप्त कर लिया। उसने ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया और ब्राह्मणी को माता समान सम्मान दिया। इस प्रकार प्रदोष व्रत के प्रभाव से जैसे राजकुमार और ब्राह्मणी के पुत्र के दिन बदले, वैसे ही भगवान शिव सब पर अपनी कृपा बरसाते हैं। जो भी व्यक्ति श्रद्धा से सोम प्रदोष व्रत करता है, उसके जीवन में भी सुख, समृद्धि और सफलता आती है।



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