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सभी देवी-देवताओं की परिक्रमा के अलग हैं नियम, शिवलिंग की पूरी परिक्रमा सेहत पर डाल सकती है असर

मंदिर में भगवान के पूजा-पाठ में परिक्रमा का भी बहुत महत्व है। देवी-देवताओं की परिक्रमा के बिना आपकी पूजा अधूरी ही रहती है। शास्त्रों के मुताबिक मंदिर या अपने पूजनीय देवी-देवता की परिक्रमा करने से आपक पूण्य मिलता है। परिक्रमा के द्वारा हम अपने इष्ट देवी देवताओं को प्रसन्न करते हैं। साथ ही अपनी मनोकामना मांगते हुए उसे पूरी करने की विनती करते हैं। हिंदू धर्म में परिक्रमा को बहुत ही शुभ माना गया है। लेकिन अक्सर जब हम मंदिर जाते हैं, तो अपने हिसाब से 3, 5, 7, परिक्रमा करने लगते हैं। जो सही नहीं है। धर्म शास्त्रों में सभी देवी-देवताओं के लिए परिक्रमा निर्धारित की गई है। तो आइए इस आर्टिकल की मदद से जानते हैं, कि किस देवी-देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए।
शास्त्रों के मुताबिक परिक्रमा करने के नियम
हिंदू धर्म में परिक्रमा करना पुण्य करने के बराबर माना गया है। अगर दंडवत परिक्रमा की जाए तो ये अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर माना जाता है। इस परिक्रमा से सभी लोगों को पुण्य की प्राप्ति होती है। अगर आपने किसी भी देवी-देवता की परिक्रमा का प्रण लिया है तो इसे बीच में कभी अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। शास्त्रों में इसे अशुभ माना गया है। परिक्रमा को हमेशा जहां से आप शुरू करें, वहीं उसे खत्म भी करें। लेकिन ध्यान रहे परिक्रमा करते समय किसी भी तरह के नकारात्मक ख्याल को मन में न आने दें। उस समय मन में सिर्फ अपने इष्ट देव को ही रखें, और मन को बिल्कुल शांत रहने दें। इस तरह परिक्रमा करने से आपका मन बिल्कुल शांत रहेगा। और आपको मन चाहा वरदान भी मिलेगा।
शिवलिंग की परिक्रमा
धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक शिवलिंग की एक पूरी परिक्रमा कभी नहीं की जाती है। शिवलिंग की हमेशा आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए। शास्त्रों में आधे चंद की तरह शिवलिंग की परिक्रमा करने के बारे में बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि शिवलिंग के जलहरी को लांघना अशुभ होता है। इस कारण शिवलिंग की आधी परिक्रमा की जाती है। लेकिन अगर कोई शवलिंग की जलहरी लांघकर पूरी परिक्रमा करता है, तो उसे शारीरिक परेशानी हो सकती है। शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा बाईं ओर से करनी चाहिए और फिर अपने उसी स्थान पर वापस आ जाना चाहिए, जहां से परिक्रमा शुरू की गई हो।
सूर्य देव
सूर्य देव की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा के दौरान सूर्य देव के मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए ऐसा करने से जातक को हर परेशानी से छुटकारा मिलता है।
भगवान गणेश परिक्रमा
भगवान गणेश की परिक्रमा करने का तरीका सबसे अलग है। गणेश जी की परिक्रमा के दौरान कई बातों का विशेष ध्यान दिया जाता है। भगवान गणेश की तीन पूरी परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा के दौरान भगवान गणेश के मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश की परिक्रमा करने से आपको हर काम में सफलता मिलती है।
शनिदेव की परिक्रमा
धर्म शास्त्रों के मुताबिक शनिदेव की परिक्रमा करने से आपको हर तरह की विपत्ति और कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान कृष्ण ने शनिदेव को कोयल बनकर वरदान दिया था, कि जो भी श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी परिक्रमा करेगा, उसे अपने सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा। हर शनिवार को शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे या शनि मंदिर में शनि देव के नाम दीप प्रज्वलित करना चाहिए। पीपल में सूत्र बांधकर सात बार शनिदेव के नाम की परिक्रमा करनी चाहिए।
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