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अगर जन्माष्टमी का व्रत गलती से खंडित हो जाए तो मिलेगा पूरा पुण्य ? जानें शास्त्रों की राय और क्या करें उपाय
Janmashtami vrat dos and don'ts : हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, व्रत और उपवास का विशेष महत्व है। व्रत को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि आत्मसंयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। कई व्रत ऐसे होते हैं जिनमें जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती, जबकि कुछ व्रतों में फल, दूध और अन्य फलाहार की चीजें लेने की अनुमति होती है।
जन्माष्टमी का व्रत भी दो प्रकार से रखा जाता है, पहला निर्जला व्रत, जिसमें पानी तक पीना वर्जित होता है, और दूसरा फलाहार व्रत, जिसमें फल या हल्के आहार का सेवन किया जा सकता है।
निर्जला व्रत में यदि पानी भी पी लिया जाए तो व्रत टूट जाता है। धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि व्रत पूरा होने से पहले उसका खंडित होना उचित नहीं है। हालांकि, कई बार अनजाने में व्रत भंग हो जाता है। ऐसे में घबराने की बजाय शास्त्रों में बताए गए कुछ उपाय करके इस दोष को दूर किया जा सकता है।

1. ईश्वर से क्षमा याचना करें
यदि जन्माष्टमी का व्रत अनजाने में टूट जाए तो सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें और दोनों हाथ जोड़कर अपनी गलती की क्षमा मांगें। शास्त्रों के अनुसार, ईश्वर अपने भक्तों के भाव और निष्ठा को देखते हैं, न कि केवल औपचारिकताओं को। लड्डू गोपाल सच्चे मन से की गई प्रार्थना को अवश्य स्वीकार करते हैं।
2. हवन कराएं
व्रत भंग होने पर घर में विधिवत हवन कराना शुभ माना जाता है। हवन से वातावरण और मन दोनों शुद्ध होते हैं और पाप व दोष दूर होते हैं। हवन के बाद भगवान कृष्ण से माफी मांगें और व्रत को पुनः पूर्ण मानें।
3. स्नान, अभिषेक और मंत्र जाप
व्रत टूट जाने के बाद सबसे पहले स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और चीनी से बने पंचामृत से भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल का अभिषेक करें। अभिषेक के बाद यह मंत्र जपें:
"मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देवा परिपूर्ण तदस्तु मे॥
ॐ श्री विष्णुवे नमः क्षमा याचनं समर्पयामि॥"
इसके पश्चात गाय, ब्राह्मण और कन्याओं के लिए भोजन की व्यवस्था करना पुण्यकारी माना जाता है।
4. द्वादशाक्षर मंत्र का जाप
व्रत के खंडित हो जाने पर भगवान विष्णु के द्वादशाक्षर मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का 11 बार या तुलसी की माला से यथासंभव अधिक बार जाप करें। साथ ही भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण को समर्पित स्तोत्रों का भक्तिभाव से पाठ करें।
5. दान करें
व्रत भंग होने पर पीले वस्त्र, फल, मिठाई, धार्मिक पुस्तकें, चना, हल्दी, केसर और अन्य शुभ वस्तुएं मंदिर में पंडित को दान करें। दान से व्रत का दोष काफी हद तक समाप्त हो जाता है और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।



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