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Ganesh Visarjan 2023: उत्तर भारत में क्यों नहीं होता है गणेश विसर्जन?
Ganesh Visarjan 2023: गणेश चतुर्थी के साथ 10 दिवसीय गणेश उत्सव का शुभारंभ हो जाता है। हर साल भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी से इसकी शुरुआत होती है।
वैसे तो इस उत्सव की रंगारंगी पूरे देश में रहती है। मगर महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात जैसे राज्यों में इसकी धूम चरम पर नजर आती है। महाराष्ट्र के तो घर घर में गणपति विराजमान किये जाते हैं। इन दस दिनों के दौरान लोग जी जान से उनकी सेवा-आराधना में जुट जाते हैं।

दस दिवसीय गणपति उत्सव का समापन गणपति के विसर्जन के साथ होता है। भक्त जितने जोश और उत्साह के साथ बाप्पा का स्वागत करते हैं, वहीं दोगुने जोश, प्यार और भावुकता के साथ उनकी विदाई की जाती है।
वैसे गणपति पूजा को लेकर महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे दक्षिण भारत में विशेष आयोजन होता है। हालांकि उत्तर भारत में गणपति उत्सव को उतनी लोकप्रियता हासिल नहीं है। आइये जानते हैं ऐसा क्यों?
उत्तर भारत में क्यों नहीं किया जाता गणेश विसर्जन?

दरअसल ऐसा कहा जाता है कि गणेश भगवान अपने भाई कार्तिकेय से मिलने के लिए उत्तर से दक्षिण भारत आये थे। दसवें दिन ही गणपति अपने भाई से मिलकर वापस चले गए थे। यही वजह है कि दक्षिण भारत में गणेश विसर्जन के समय गणपति बाप्पा मोरया के जयकारे लगते हैं और उनसे अगले बरस जल्दी आने का निवेदन किया जाता है।
दिवाली में होता है गणपति पूजन

उत्तर भारत में दीपावली का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने का विधान है। यही वजह है कि यहां गणेश उत्सव में गणपति का विसर्जन नहीं किया जाता है। भक्तों की आस्था है कि भगवान गणेश उत्तर भारत में ही सदैव विराजमान रहते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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