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Avalanche Alert! उत्तराखंड में एवलांच को लेकर अलर्ट जारी, अगर फंस जाएं तो ऐसे करें खुद का बचाव
What is Avalanche : उत्तराखंड के चमोली जिले में अगले 24 घंटों के दौरान 3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एवलांच का खतरा मंडरा रहा है, जिसके चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। चमोली के अलावा उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। अलर्ट मिलने के बाद से आपदा प्रंबंधन टीमों को तैनात कर दिया गया है।
पुलिस प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। अगले 24 घंटों के दौरान भारी बर्फबारी और तापमान में बदलाव के कारण हिमस्खलन का खतरा है, खासकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में, जहां बर्फ की अस्थिर परतें बन सकती हैं।

चलिए जानते हैं कि हिमस्खलन यानी एवलांच किसे कहते हैं और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
क्या होता है एवलांच (What is Avalanche )
एवलांच या हिमस्खलन तब होता है जब बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मिट्टी और अन्य सामग्री तेजी से पहाड़ों से नीचे गिरने लगती है। नेशनल ज्योग्राफिक के अनुसार, जब इसमें पत्थर या मिट्टी शामिल होती है तो उसे भूस्खलन कहा जाता है। हिमस्खलन में ढलान या पहाड़ से अचानक बर्फ और मलबा गिरने लगता है, जिससे कई बार जान-माल का नुकसान होता है। यह प्राकृतिक रूप से होता है, लेकिन इंसानी गतिविधियां जैसे स्कीइंग और स्नोमोबिलिंग भी इसे बढ़ावा दे सकती हैं।
एवलांच कब आता है?
एवलांच तब होता है जब ऊंची चोटियों पर बर्फ की अधिक मात्रा जमा हो जाती है और दबाव बढ़ने पर बर्फ खिसकने लगती है। खिसकती बर्फ की परतें तेज बहाव के साथ नीचे की ओर बहने लगती हैं, और रास्ते में आने वाली किसी भी चीज़ को बहा ले जाती हैं। इसलिए इस समय ट्रैकिंग जोखिम भरा साबित हो सकता है।
अगर आप एवलांच में फंस जाएं तो क्या करें?
- चोट से बचने के लिए मशीनों या भारी सामान को अपने ऊपर ना आने दें, उन्हें दूर धकेलें।
- बर्फीले तूफान के साथ बहने से बचने के लिए किसी ठोस चीज़ जैसे पेड़ या चट्टान को पकड़ें।
- अपना मुंह और दांत बंद रखें ताकि बर्फ में सांस लेने में कठिनाई न हो।
- अगर आप बह रहे हैं, तो तैरने की कोशिश करें ताकि आप सतह पर बने रहें।
- हिमस्खलन की दिशा की ओर खुद को ले जाने की कोशिश करें।
- जब हिमस्खलन धीमा हो, सतह की ओर धकेलें और एक हाथ से एयर पॉकेट बनाएं।
- हिमस्खलन रुकने के बाद शांत रहें, खुद को आराम दें और केवल तभी चिल्लाएं जब कोई बचाने वाला पास हो।
हिमस्खलन से बचने के लिए करें ये काम
- अखबार, रेडियो, टीवी आदि के जरिए मौसम की जानकारी लेते रहें।
- यदि आपके इलाके में हिमस्खलन की आधिकारिक चेतावनी जारी हो, तो घर में रहें और बाहर जाने से बचें।
- खड़ी ढलानों जैसी असुरक्षित जगहों पर न जाएं।
- बचाव के लिए आपातकालीन मार्ग पहले से निर्धारित करें।
- यदि आप ट्रेकिंग पर जा रहे हैं, तो रास्ते में कपड़े या किसी अन्य चीज़ से निशान छोड़ते जाएं ताकि अगर आप फंस जाएं तो आपकी स्थिति आसानी से पहचानी जा सके।
- इन कदमों से आप हिमस्खलन के खतरों से सुरक्षित रह सकते हैं।
इन बातों का भी ध्यान रखें
हिमस्खलन से बचने के लिए ढलानों से बचकर चलें जहां बर्फ खिसकने का खतरा हो, कमजोर और कटे हुए बर्फ के पत्थरों से दूर रहें। ऐसे इलाकों में हमेशा पूरी तैयारी के साथ जाएं और साथ में हथौड़ा, कुदाल, रस्सी और अन्य सुरक्षा उपकरण रखें।



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