Latest Updates
-
Mother's Day 2026 Wishes for Bua & Mausi: मां जैसा प्यार देने वाली बुआ और मौसी को भेजें मदर्स डे पर ये संदेश -
Periods Delay Pills: पीरियड्स टालने वाली गोलियां बन सकती हैं जानलेवा, इस्तेमाल से पहले जान लें ये गंभीर खतरे -
वजन घटाने के लिए रोज 10K कदम चलना सबसे खतरनाक, एक्सपर्ट ने बताए चौंकाने वाले दुष्परिणाम -
Maharana Pratap Jayanti 2026 Quotes: महाराणा प्रताप की जयंती पर शेयर करें उनके अनमोल विचार, जगाएं जोश -
Shani Gochar 2026: रेवती नक्षत्र में शनि का महागोचर, मिथुन और सिंह सहित इन 5 राशियों की लगेगी लॉटरी -
Aaj Ka Rashifal 9 May 2026: शनिवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेंगे सितारे -
Mother Day 2026: सलाम है इस मां के जज्बे को! पार्किंसंस के बावजूद रोज 100 लोगों को कराती हैं भोजन -
Aaj Ka Rashifal 08 May 2026: शुक्रवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, जानें अपना भाग्यशाली अंक और रंग -
Mother’s Day 2026: इस मदर्स डे मां को दें स्टाइल और खूबसूरती का तोहफा, ये ट्रेंडी साड़ियां जीत लेंगी उनका दिल -
World Ovarian Cancer Day 2026: ओवेरियन कैंसर से बचने के लिए महिलाएं करें ये काम, डॉक्टर ने बताए बचाव के तरीके
क्या मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ सकती हैं या नहीं? जानें क्या कहता है इस्लाम
Can Muslim Women Pray In Mosque: हर धर्म के अपने नियम और परंपरा होते हैं, ऐसे ही इस्लाम के भी अपने नियम और कानून हैं। इस्लाम में एक सवाल लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ सकती हैं या नहीं? कई लोग मानते हैं कि महिलाओं का मस्जिद में जाना मना है, जबकि कुछ लोग कहते हैं कि इस्लाम में इसकी पूरी अनुमति दी गई है।
ऐसे में सही जानकारी जानना बेहद आवश्यक है क्योंकि धर्म से जुड़े मुद्दे हमेशा तथ्य और प्रमाण के आधार पर ही समझे जाने चाहिए, न कि अफवाहों और मान्यताओं के आधार पर। आइए आप भी जान लें सच ताकि किसी तरह के अंधविश्वास और झूठ का शिकार न हों।

क्या महिलाएं मस्जिद में नमाज पढ़ सकती हैं?
इस्लामिक स्टुडियो नाम के एक पेज पर एक एक्सपर्ट से पूछा गया कि क्या महिलाएं मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ सकती हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि कुरान में कहीं भी नहीं लिखा है कि औरत मस्जिद में नहीं जा सकती हैं। हालांकि ये नियम हमारे इंडिया-पाकिस्तान में है। इसलिए अगर इस्लाम के बारे में जानना है तो किसी देश की बात न सुनें बल्कि कुरान को पढ़ें। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया की हदीस के आखिरी हदीस-ए-बुखारी में आखिरी में लिखा है कि मोमिना (महिलाओं) को मस्जिद में जाने से मत रोको।
क्या कहता है इतिहास
इस्लामिक इतिहास और हदीसों की बात करें तो पैगंबर हजरत मोहम्मद के दौर में महिलाएं मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ा करती थीं। सहिह हदीसों में पुरुषों को निर्देश दिया गया है कि महिलाओं को मस्जिद जाने से न रोका जाए। यानी इस्लाम के मूल सिद्धांतों में महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश या इबादत करने पर कोई मनाही नहीं है।
सामाजिक परिस्थितियों ने बदले नियम
हालांकि, समय के साथ सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई देशों व इलाकों में महिलाओं के लिए मस्जिद जाने को सीमित या व्यवस्थित किया गया। कुछ जगहों पर महिलाओं के लिए अलग नमाज हॉल, अलग दरवाजा और पर्दे की व्यवस्था होती है, जबकि कुछ मस्जिदों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती, इसलिए वहां महिलाएं नहीं जा पातीं। ऐसे में ये तो साफ है कि न तो कुरान में महिलाओं के मस्जिद में न जाने के कोई नियम लिखे गए हैं और न ही इतिहास में ऐसी कोई मनाही थी।



Click it and Unblock the Notifications