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दुनिया का वो देश जहां जुमे की नमाज छोड़ना अपराध, न पढ़ी तो जाना होगा जेल, भरना होगा भारी जुर्माना
Friday Namaz Rules: दुनिया के अलग-अलग देशों में धर्म और पूजा-पद्धतियों से जुड़े नियम भले ही भिन्न हों, लेकिन कुछ देशों में धार्मिक व्यवस्थाएं काफी सख्त मानी जाती हैं। ऐसा ही एक उदाहरण मुस्लिम देशों में मिलता है, जहां शुक्रवार की नमाज यानी जुमे की नमाज को लेकर बेहद कड़े प्रावधान लागू हैं। आमतौर पर मस्जिद में नमाज पढ़ना आस्था और व्यक्तिगत निर्णय का विषय माना जाता है, लेकिन एक देश ऐसा भी है जहां मस्जिद न जाने पर जेल और जुर्माने तक का जोखिम हो सकता है।
आप सोच रहे होंगे कि ऐसा भी भला होता है कि नमाज न पढ़ने पर जेल जाना होगा, तो बता दें कि हां ऐसा नियम एक देश में है। चलिए फिर जान लेते हैं कि वो कौन सा देश है और नमाज न पढ़ने पर कितना देना होगा जुर्माना।

इस देश में नमाज न पढ़ना है जुर्म
यह सख्त कानून मलेशिया के तेरेंगानु राज्य में लागू है। यहां इस्लामी शरीया कानून के तहत शुक्रवार की नमाज को अनिवार्य धार्मिक कर्तव्य के रूप में देखा जाता है। यदि कोई व्यक्ति बिना किसी वैध कारण के मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने नहीं जाता, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। नियम के मुताबिक इस मामले में दोषी पाए गए व्यक्तियों को अधिकतम दो साल तक जेल की सजा दी जा सकती है। केवल इतना ही नहीं, आरोपी पर 3,000 रिंगित यानी लगभग 61,000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
कितनी होगी सजा
बता दें कि अगर कोई लगातार तीन बार जुमे की नमाज छोड़ देता है तो सजा और कठोर हो जाती है। ऐसे मामलों में अधिकतम छह महीने की जेल और 1,000 रिंगित (करीब 20,000 रुपये) तक का जुर्माना हो सकता है। इस कानून के पालन के लिए मस्जिदों में नियमों की जानकारी वाले बोर्ड लगाए जाते हैं और धार्मिक गश्ती दल भी निगरानी में शामिल रहता है। इस प्रणाली की शुरुआत वर्ष 2001 में की गई थी, जिसे 2016 में और अधिक कठोर बना दिया गया। मलेशिया में धार्मिक मामलों से जुड़े नियम प्रत्येक राज्य खुद निर्धारित करता है, इसलिए सभी राज्यों में व्यवस्था अलग-अलग हो सकती हैं।
सऊदी अरब में क्या हैं नमाज के नियम
मलेशिया के अलावा कुछ अन्य मुस्लिम देशों में भी नमाज को लेकर सख्त नियम दिखाई देते हैं, हालांकि सभी देशों में दंडात्मक कानून एक समान नहीं हैं। सऊदी अरब में वर्षों तक अजान के दौरान बाजार, दुकानें और दफ्तर बंद कराए जाते रहे हैं और नमाज के समय लोगों को मस्जिद भेजा जाता रहा है। 2016 के बाद थोड़ी ढील जरूर दी गई, लेकिन वहां अब भी नमाज न पढ़ने वालों पर कार्रवाई और जुर्माना संभव है। ईरान में नमाज न पढ़ने के मामले में इतनी सख्ती है कि कुछ लोगों की नौकरी तक खतरे में पड़ जाती है।
इन राज्यों में भी हैं सख्त नियम
अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान धार्मिक पुलिस नमाज के नियमों को लागू करने में पूरी ताकत रखती है, जिसमें लोगों को पकड़ना, सजा देना, जुर्माना और यहां तक कि मारने-पीटने के अधिकार भी शामिल हैं। वहीं कतर और कुछ खाड़ी देशों में नमाज न पढ़ना सीधे आपराधिक मामला तो नहीं बनता, लेकिन सामाजिक दबाव काफी ज़्यादा होता है और कई जगह इसे अपराध की तरह देखा जाता है।



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