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Qurbani Ki Dua: बकरीद पर कुर्बानी से पहले और बाद में कौन सी दुआ पढ़ी जाती है? नोट कर लें सही तरीका
Qurbani Ka Tarika Aur Dua: इस्लाम धर्म में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार त्याग, समर्पण और अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी का प्रतीक है। साल 2026 में बकरीद का मुकद्दस त्योहार 28 मई 2026 यानी आज देश में अकीदत के साथ मनाया जाएगा। इस दिन नमाज के बाद सुन्नते इब्राहीमी पर अमल करते हुए हलाल जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। अल्लाह की बारगाह में कुर्बानी तभी कबूल होती है जब उसे पूरी पाकीजगी, सही सुन्नत तरीके और दिल में साफ नियत के साथ अंजाम दिया जाए। अक्सर लोग कुर्बानी तो करते हैं, लेकिन ऐन वक्त पर वे यह भूल जाते हैं कि जानवर को जिबह करते समय कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए या गोश्त बांटने का शरीयत के मुताबिक सही पैमाना क्या है। आइए जानते हैं कि बकरीद पर कुर्बानी करने का मुकम्मल स्टेप-बाय-स्टेप तरीका क्या है और इससे जुड़ी जरूरी दुआएं व नियम क्या हैं।

जानिए क्या है कुर्बानी का मुकम्मल और सही तरीका
कुर्बानी करने से पहले और उस दौरान कुछ जरूरी बातों और सुन्नतों का ख्याल रखना हर मुसलमान के लिए लाजिमी है जिनके बारे में नीचे बताया गया है:-
जानवर की पाकीजगी और आराम
जिस भी जानवर (बकरा, भेड़, या बड़े जानवर) की कुर्बानी दी जा रही है, वह पूरी तरह सेहतमंद होना चाहिए। जानवर को जिबह करने की जगह पर ले जाने से पहले उसे चारा और पानी जरूर दें, उसे भूखा या प्यासा न रखें।
छुरी को तेज करना
जानवर के सामने छुरी तेज न करें और न ही एक जानवर के सामने दूसरे जानवर को जिबह करें, इससे जानवर को तकलीफ होती है। इस्लाम में जानवर को कम से कम तकलीफ देने की सख्त हिदायत है।
किबला रुख लिटाना
जानवर को बहुत ही नरमी के साथ लिटाएं। उसका मुंह किबला (पश्चिम दिशा यानी काबा शरीफ) की तरफ होना चाहिए।
नियत और दुआ
जानवर को लिटाने के बाद सबसे पहले कुर्बानी की नियत की दुआ पढ़ी जाती है, इसके बाद अल्लाह का नाम लेकर छुरी चलाई जाती है।
कुर्बानी की दुआएं (Qurbani Ki Dua Arabic & Hindi)
कुर्बानी के वक्त मुख्य रूप से तीन चरणों में दुआएं और तकबीर पढ़ी जाती हैं, जिन्हें आप नीचे दिए गए तरीके से नोट कर सकते हैं:
1. जानवर को लिटाने के बाद यानी कुर्बानी से पहले की दुआ
जब जानवर को किबला रुख लिटा दिया जाए, तो छुरी चलाने से ठीक पहले यह दुआ पढ़ें:
"इन्नी वज्जहतु वज्हिया लिल्लजी फतरस्स मावाती वल अर्दा हनीफंव वमा अना मिनल मुशरेकीन। इन्ना सलाती व नुसुकी व मह्याया व ममाती लिल्लाही रब्बिल आलमीन। ला शरीका लहू व बि जालेका उमिरतु व अना मिनल मुस्लेमीन।"
2. जिबह करते वक्त (छुरी चलाते समय क्या कहें?)
जैसे ही आप जानवर की गर्दन पर छुरी चलाना शुरू करें, तेज आवाज में यह कहें:
"बिस्मिल्लाही अल्लाहु अकबर" (Bismillahi Allahu Akbar)
ध्यान रहे कि छुरी चलाते समय यह कहना फर्ज है, इसके बिना कुर्बानी मुकम्मल नहीं होती।
3. कुर्बानी मुकम्मल होने के बाद की दुआ
जब जानवर पूरी तरह जिबह हो जाए, तो अपनी कुर्बानी की कुबूलियत के लिए अल्लाह से यह दुआ मांगें:
"अल्लाहुम्मा तक़ब्बल मिन्नी कमा तक़ब्बलता मिन हबीबेका मुहम्मदिन व खलीलेका इब्राहीमा अलैहिमुस्सलाम।"
यदि आप किसी और की तरफ से कुर्बानी कर रहे हैं, तो 'मिन्नी' जिसका मतलब मुझसे होता है की जगह 'मिन' कहकर उस शख्स का नाम लें (जैसे- मिन ज़ैद या मिन असलम)।
इस्लामिक नियम: क्या है कुर्बानी के गोश्त को बांटने का सही तरीका?
इस्लाम में समाज के हर तबके का ख्याल रखने की सीख दी गई है, इसीलिए कुर्बानी के गोश्त को लेकर बेहद खूबसूरत और इंसाफ पसन्द नियम बनाए गए हैं। शरीयत के मुताबिक, कुर्बानी के गोश्त के 3 बराबर हिस्से किए जाने चाहिए:



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