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Jaya Parvati Vrat 2026: जया पार्वती व्रत आज से शुरू, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व
Jaya Parvati Vrat 2026: हिंदू धर्म में जया पार्वती व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। पांच दिनों तक चलने वाला यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन करने से सुहागिन महिलाओं को पति की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही, यह व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं की योग्य वर की इच्छा पूरी होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार जया पार्वती व्रत की शुरुआत आज यानी 27 जुलाई, सोमवार से होगी। आइए, जानते हैं जया पार्वती व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व -

जया पार्वती व्रत 2026 तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जुलाई 2026 को दोपहर 1:57 बजे शुरू होगी और 27 जुलाई 2026 को शाम 4:14 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 27 जुलाई, सोमवार से जया पार्वती व्रत आरंभ माना जाएगा। यह व्रत लगातार पांच दिनों तक किया जाता है। ऐसे में, 1 अगस्त 2026, शनिवार को इसका समापन होगा।
जया पार्वती व्रत 2026 का शुभ पूजा मुहूर्त
जया पार्वती व्रत में प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को प्रदोष काल शाम 7:15 बजे से रात 9:20 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना शुभ फलदायी माना गया है।
जया पार्वती व्रत का महत्व
जया पार्वती व्रत सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं दोनों के लिए बहुत खास होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया पार्वती व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर होता है। पौराणिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए यही व्रत किया था। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है। वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति की कामना से यह व्रत रखती हैं। कई परिवारों में परंपरा के अनुसार इस व्रत को 5, 7, 9, 11 या 20 वर्षों तक करने की मान्यता भी प्रचलित है।
जया पार्वती व्रत की पूजा विधि
सुबह स्नान करके साफ और सात्विक वस्त्र पहनें।
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
माता पार्वती को चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
भगवान शिव को जल, बेलपत्र और पुष्प चढ़ाएं।
घी का दीपक और धूप जलाकर विधि-विधान से पूजा करें।
खीर, फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोग अर्पित करें।
व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।
'अलोना' व्रत का नियम
इस व्रत के दौरान कई महिलाएं अलोना व्रत रखती हैं। इसका अर्थ है कि व्रत के दिनों में नमक का सेवन नहीं किया जाता। इस दौरान फल, दूध, दही और अन्य फलाहारी भोजन ग्रहण किया जाता है। हालांकि, जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो, वे अपनी क्षमता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार व्रत कर सकते हैं।
ज्वारे (जवा) पूजन की परंपरा
जया पार्वती व्रत के पहले दिन मिट्टी के पात्र में जौ या गेहूं के दाने बोने की परंपरा है, जिन्हें कई जगह जवारे या जवा कहा जाता है। अगले पांच दिनों तक इनकी नियमित देखभाल की जाती है। व्रत पूरा होने पर इन्हें किसी नदी, तालाब या बहते जल में प्रवाहित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि हरे-भरे जवारे घर में सुख, समृद्धि और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं।



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