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अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ 20 जनवरी को ही क्यों होती है, हाथ में बाइबिल को क्यों पकड़ते हैं?
Why the US Presidential Oath Happens in January : अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को शपथ लेंगे, जिसमें कई विदेशी मेहमान, जैसे चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, शामिल होंगे। इस भव्य इनॉग्रेशन सेरेमनी पर पूरी दुनिया की नजरें रहेंगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण जनवरी में होने की परंपरा 1933 में 20वें संविधान संशोधन के बाद शुरू हुई। शपथ लेते समय बाइबिल हाथ में रखने की परंपरा जॉर्ज वाशिंगटन के समय से चली आ रही है, जो धार्मिक आस्था और न्यायप्रियता का प्रतीक मानी जाती है।

इनॉग्रेशन-डे क्या होता है?
इनॉग्रेशन-डे (Inauguration Day) वह दिन होता है जब अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करते हैं। यह दिन हर चार साल में 20 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन राष्ट्रपति शपथ ग्रहण समारोह होता है, जिसमें राष्ट्रपति पद की शपथ लेते हैं और नए कार्यकाल की शुरुआत होती है। शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति अपने अधिकारियों को संबोधित करते हैं, और यह अमेरिकी लोकतंत्र और सत्ता हस्तांतरण की परंपरा का प्रतीक है।
इनॉग्रेशन-डे जनवरी में ही क्यों होता है?
डोनाल्ड ट्रंप 3 नवंबर 2024 को राष्ट्रपति चुने गए, लेकिन शपथ ग्रहण समारोह 20 जनवरी 2025 को होगा। यह ढाई महीने का अंतर अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन की देन है। पहले, राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण 4 मार्च को होता था, लेकिन प्रशासनिक देरी और आधुनिक ज़रूरतों के कारण 1933 में 20वां संशोधन किया गया। अब 20 जनवरी को इनॉग्रेशन-डे तय हुआ, ताकि नई सरकार तेजी से काम शुरू कर सके। यह समय सत्ता हस्तांतरण और नई सरकार के गठन की तैयारी के लिए दिया जाता है।
20 जनवरी की तारीख को ही क्यों चुना?
अमेरिका में राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण की तारीख 20 जनवरी 1937 को तय की गई, लेकिन इससे पहले शपथ ग्रहण 5 मार्च को होता था। जॉर्ज वॉशिंगटन ने 30 अप्रैल 1789 को पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, और फिर 4 मार्च 1793 को दूसरी बार शपथ ग्रहण की। इसके बाद, जेम्स मोनरो ने 5 मार्च 1821 को शपथ ली।
हालांकि, राष्ट्रपति पद के चुनाव और शपथ ग्रहण के बीच लंबे अंतराल से प्रशासनिक कार्यों में देरी हो सकती थी। इसलिए, संविधान के 20वें संशोधन के तहत यह तय किया गया कि शपथ ग्रहण अब 20 जनवरी को होगा। इसका उद्देश्य सत्ता हस्तांतरण को तेज करना था। इस बदलाव के बाद, फ्रेंकलिन रुजवेल्ट पहले राष्ट्रपति थे, जिन्होंने 20 जनवरी 1937 को शपथ ली। इसके बाद से 20 जनवरी को ही अमेरिकी राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाता है।
कौन दिलाता है शपथ?
संयुक्त राज्य अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश के पास नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी होती है। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख की अगुवाई में नए राष्ट्रपति संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों को निभाने की शपथ लेते हैं। यह शपथ साधारण शब्दों में होती है, जिसमें राष्ट्रपति यह शपथ लेता है कि वह अमेरिका के संविधान का पालन करेगा और अपने पद की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाएगा। यह शपथ लोकतंत्र और न्याय की रक्षा का प्रतीक होती है।
अमेरिका में शपथ ग्रहण में क्यों बाइबिल रखा जाता है?
अमेरिका में शपथ ग्रहण के दौरान बाइबिल रखने की परंपरा बहुत पुरानी है, हालांकि यह कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। अमेरिका एक ईसाई बहुल देश है, और शपथ ग्रहण समारोह में बाइबिल का उपयोग धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। पहला राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन 1789 में बाइबिल पर शपथ लेने वाले थे। हालांकि, 1904 में राष्ट्रपति थेडर रूजवेल्ट ने शपथ ग्रहण के दौरान बाइबिल का इस्तेमाल नहीं किया। यह दर्शाता है कि बाइबिल रखना एक परंपरा है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। इसे धार्मिक मान्यताओं और राष्ट्रपति की पसंद पर निर्भर किया जाता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण में कई परंपराएं रही हैं, जिनमें से एक राष्ट्रपति की पत्नी द्वारा बाइबिल पकड़ने की परंपरा है। लेडी बर्ड जॉनसन पहली महिला थीं, जिन्होंने इस परंपरा का पालन किया। उन्होंने अपने पति लिंडन बी. जॉनसन के शपथ ग्रहण के दौरान पवित्र बाइबिल को हाथों में उठाया था।
20 जनवरी को संडे आ जाए तो क्या होता है?
अगर 20 जनवरी को संडे पड़ता है, तो अमेरिका में राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण निजी समारोह में होता है। इसके बाद अगले दिन 21 जनवरी को सार्वजनिक समारोह आयोजित किया जाता है। यह परंपरा 2013 में बराक ओबामा के दूसरे कार्यकाल की शपथ ग्रहण के दौरान देखी गई थी, जब 20 जनवरी संडे था।



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