वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक, महाराणा प्रताप की जयंती पर अपनों को भेजिए ये गर्व भरे संदेश

Maharana Pratap Jayanti wishes : महाराणा प्रताप, भारतीय इतिहास के वो गौरव हैं जिनकी वीरता, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति निष्ठा ने उन्हें अमर बना दिया। 9 मई को उनकी जयंती पर पूरा देश इस महान योद्धा को श्रद्धांजलि देता है। महाराणा प्रताप की गाथाएं हर भारतीय को न केवल प्रेरणा देती हैं, बल्कि यह भी सिखाती हैं कि राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और साहस का अर्थ क्या होता है।

इस खास अवसर पर, यहां हम आपके लिए लेकर आए हैं महाराणा प्रताप के अनमोल विचार, वीर रस से भरपूर कविताएं और दिल छू लेने वाले शायरी व स्टेटस जिन्हें आप सोशल मीडिया पर 'शेयर कर सकते हैं।

Maharana Pratap Jayanti wishes

महाराणा प्रताप के प्रेरणादायक विचार (Quotes in Hindi)

- "मातृभूमि की सुरक्षा में जो अपना सर्वस्व न्योछावर करे, वही सच्चा वीर कहलाता है।"

- "राष्ट्रहित सर्वोपरि होता है, बाकी सुख क्षणिक हैं।"

- "स्वतंत्रता एक ऐसा दायित्व है, जिसे निभाने के लिए हमें अपने रक्त की हर बूंद को अर्पित करना होता है।"

- "हम उन वीरों की संतान हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता की विरासत हमें दी है।"

- "महाराणा प्रताप की गाथा भारत के हर कण-कण में गूंजती है।"

- "वीर वह है जो मृत्यु से नहीं डरता, बल्कि अपने स्वाभिमान को सर्वोपरि मानता है।"

- "मेवाड़ की भूमि ने प्रताप जैसे योद्धा को जन्म देकर भारत माँ को गौरवान्वित किया।"

"जो विपत्ति में भी हार नहीं मानते, वही इतिहास रचते हैं।"

- योद्धा वही है जो न्याय के लिए रणभूमि में विजय तिलक को अपने मस्तक पर लगाता है।

महाराणा प्रताप की वीरता के दोहे

- अरि मर्दन रणभूमि में, छवि चढ़ती दिन-रात।
सिंह समान प्रताप थे, जय-जय महाराणा प्रताप।

- हल्दीघाटी के रण में, चमके प्रताप के बाण।
धरा गगन सब गूंज उठा, जब गरजे मेवाड़ के प्राण।

- माई ऐडा पूत जण जैडा महाराणा प्रताप
अकबर सोतो उज के जाणे सिराणे साँप

- राणा सांगा का वो वंशज, रखता था राजपूती शान।
कर आज़ादी का उद्घोष, भारत का वो था अभिमान।।

- वीर की सवारी कहलाया, चेतक बड़ा निराला था।
महाराणा के घोड़े से, हवा का पड़ गया पाला था।।

- जंगल को अपना घर बनाया, घास की रोटी खाया।
हार नहीं मानी कभी, मेवाड़ को मुगलों से बचाया।।

- चेतक जैसे अश्व को, मिला प्रताप का साथ।
रण में छूटा स्वर्णिम लेख, इतिहास गढ़ा उस रात।।

- मंज़ूर घास की रोटी है, घर चाहे नदी पहाड़ रहे।
अंतिम साँस तक चाहूँगा, स्वाधीन मेरा मेवाड़ रहे।।

महाराणा प्रताप पर वीर रस कविता (Maharana Pratap Poem)

1. वण्डोली है यही, यहीं पर
है समाधि सेनापति की।

महातीर्थ की यही वेदिका
यही अमर-रेखा स्मृति की
एक बार आलोकित कर हा
यहीं हुआ था सूर्य अस्त।

चला यहीं से तिमिर हो गया
अन्धकार-मय जग समस्त
आज यहीं इस सिद्ध पीठ पर
फूल चढ़ाने आया हूँ।

आज यहीं पावन समाधि पर
दीप जलाने आया हूँ।

2. 'हल्दी घाटी का युद्ध'
यह एकलिंग का आसन है
इस पर न किसी का शासन है
नित सिहक रहा कमलासन है
यह सिंहासन सिंहासन है

यह सम्मानित अधिराजों से
अर्चित है¸ राज-समाजों से
इसके पद-रज पोंछे जाते
भूपों के सिर के ताजों से

इसकी रक्षा के लिए हुई
कुबार्नी पर कुबार्नी है
राणा! तू इसकी रक्षा कर
यह सिंहासन अभिमानी है

3. वीर रस कविता महाराणा प्रताप
राणा प्रताप इस भरत भूमि के, मुक्ति मंत्र का गायक है।
राणा प्रताप आजादी का, अपराजित काल विधायक है।।

वह अजर अमरता का गौरव, वह मानवता का विजय तूर्य।
आदर्शों के दुर्गम पथ को, आलोकित करता हुआ सूर्य।।

राणा प्रताप की खुद्दारी, भारत माता की पूंजी है।
ये वो धरती है जहां कभी, चेतक की टापें गूंजी है।।

पत्थर-पत्थर में जागा था, विक्रमी तेज बलिदानी का।
जय एकलिंग का ज्वार जगा, जागा था खड्ग भवानी का।।

Story first published: Friday, May 9, 2025, 10:02 [IST]
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