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हरिद्वार के 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन! क्या दोहराया जाएगा इतिहास?
Non Hindus Entry Ban In Haridwar: उत्तराखंड सरकार हरिद्वार के पवित्र घाटों को लेकर एक अहम फैसले पर विचार कर रही है। राज्य सरकार हरिद्वार के 105 घाटों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रही है। ये सभी घाट लगभग 120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं। यह मांग कुछ साधु-संतों और गंगा सभा की ओर से उठाई गई है। गंगा सभा हर की पौड़ी सहित प्रमुख घाटों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालती है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस पर मौखिक सहमति जताई है साथ ही सरकार ऋषिकेश और हरिद्वार को 'सनातन पवित्र शहर' घोषित करने की योजना पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

अर्ध कुंभ से शुरू हो सकती है प्रतिबंध की प्रक्रिया शुरू
सूत्रों के मुताबिक, गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की प्रक्रिया की शुरुआत 14 जनवरी 2027 से हो सकती है। बता दें कि अगले साल मकर संक्रांति के मौके से यानी 14 जनवरी से हरिद्वार में अर्धकुंभ लगने जा रहा है। इसकी तैयारी अभी से ही शुरू होनी शुरू हो जाएगी। हालांकि सरकार इस फैसले को सही तरीके से लागू करने पर विचार कर रही है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
दोहराया जाएगा इतिहास
ये पहली बार नहीं है जब गंगा की पवित्रता को बनाए रखने के लिए ऐसा फैसला लिया जा रहा है। इससे पहले भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश सरकार के बीच इस तरह का समझौता हुआ था जिसकी आज राज्य सरकार समीक्षा कर रही है। बता दें कि पंडित मालवीय गंगा सभा के पहले अध्यक्ष थे और उन्होंने गंगा के अविरल प्रवाह और तीर्थ नगरी की पवित्रता को बनाए रखने के लिए ब्रिटिश सरकार संग ये फैसला किया था।
इस समझौते में गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का प्रावधान था। साथ ही यह भी तय किया गया था कि हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे धार्मिक नगरों में गैर-हिंदुओं को स्थायी निवास की अनुमति नहीं होगी और वे केवल कार्य के उद्देश्य से सीमित समय के लिए ही आ सकेंगे। अब दोबारा से इसी इतिहास को दोहराने का योजना बनाई जा रही है साथ में सभी के हितों का ध्यान भी रखा जाए इस पर भी विचार किया जा रहा है।
धामी सरकार ने दी मौखिक सहमति
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुद्दे पर कहा है कि उनकी सरकार देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि हरिद्वार और ऋषिकेश सनातन आस्था के प्रमुख केंद्र हैं और इन्हें पवित्र धार्मिक शहर के रूप में संरक्षित करना सरकार की प्राथमिकता है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और सरकार सभी पक्षों की राय लेने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में हरिद्वार और ऋषिकेश को लेकर यह बड़ा फैसला किस दिशा में जाता है।



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