इंसान से नही बल्कि इस जानवर से फैला है एड्स का लाइलाज रोग

एड्स एक लाइलाज बीमारी है। इस बीमारी को इसलिए लाइलाज कहा जाता है क्योकि इसका अभी तक कोई इलाज नहीं मिला है। इस बीमारी से ग्रतिस इंसान धीरे धीरे मौत के मुंह में चला जाता है।

कई सालों से इसके इलाज की खोज की जा रही है पर ये मुमकिन नहीं हो पा रहा है। हालांकि इसकी लगातार खोज की जा रही है। आपसे आज हम एड्स की ऐसी सच्चाई बताने जा रहे है जो आप अभी तक नहीं जानते होगें।

वैसे तो अधिकतर मामलों में एड्स असुरक्षित यौन संबंध बनाने से ही होती है। लेकिन इस बात को देखकर आपके मन में एक सवाल तो आता ही होगा की आखिर सबसे पहले एड्स कब और किससे फैला होगा।

आज हम आपको बताएंगे कि कैसे एड्स फैला है। दरअसल एड्स की शुरुआत किसी इंसान से नहीं बल्कि जानवर से हुई थी। जी हां आज हम आपको इसकी पूरी सच्चाई बताएगे।

चिंपैजी में पाई गई थी ये बीमारी

चिंपैजी में पाई गई थी ये बीमारी

एड्स जैसी खतरनाक बीमारी की शुरुआत किसी इंसान से नहीं बल्कि जानवर से हुई थी। आपको बता दें कि ये खतरनाक बीमारी सबसे पहले बंदरो की एक प्रजाति चिंपैजी में पाई गई थी। सर्वप्रथम कांगो देश के बंदरों मे ये बीमारी पाई गई थी। इसके बाद से ही ये हर जगह फैला है।

19वीं शताब्दी में हुई थी शुरुआत में

19वीं शताब्दी में हुई थी शुरुआत में

आपको बता दें कि एड्स की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई थी। इसके बाद से ही इसको लेकर लगातार शोध चल रहे है पर किसी भी तरह से आज तक इसका इलाज मिलना संभव नहीं हो पाया है। अभी तक काफी लोग इस खतरनाक बीमारी से मर चुके है।

इतने लोगों की हो चुकी है मौत

इतने लोगों की हो चुकी है मौत

एड्स एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिसके कारण अब तक करीब 3 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है। अगर वर्तमान की बात करें तो करीब 10 करोड़ से भी ज्यादा लोग इससे पीड़ित है। अगर आने वाले समय में इनको इलाज ना मिला तो इन लोगों की भी मौत निश्चित है।

1959 में कांगो देश में मिला पहला संक्रमित व्यक्ति

1959 में कांगो देश में मिला पहला संक्रमित व्यक्ति

इसकी शुरुआत 1959 में कांगों देशों में हुई थी और वहीं पर सबसे पहला संक्रिमित व्यक्ति पाया गया था। जब डॉक्टरों ने इसका चेकअप किया और 5 लोगों पर चेकअप किया जिनको निमोनिया था। इस टेस्ट में पता चला कि उन लोगों के मुकाबले में एड्स सक्रमित व्यक्ति की रोगो से लड़ने की क्षमता कम हो चुकी थी। इसके बाद से ही इसके एड्स का नाम दिया गया।

पहले ग्रिड था इसका नाम

पहले ग्रिड था इसका नाम

आपको बता दें कि पहले डॉक्टरों को ये लगा कि ये बीमारी केवल समलैंगिकों में ही पाई जाती है तो इसका नाम ग्रिड रखा गया था। लेकिन जब पता चला कि ये बीमारी विषमलैगिकों के भी पाई जाती है तब इसका नाम बदलकर एड्स रखा गया था।

मिल गया एड्स का वायरस

मिल गया एड्स का वायरस

जब इसकी समस्या ज्यादा बढ़ने लगी तब वैज्ञानिको ने 1983 से 1985 तक इसकी खोज की और सफल भी हुए। ये दोनो वैज्ञानिक फ्रांस के थें।

अमेरिका है पहले स्थान पर

अमेरिका है पहले स्थान पर

ये वायरस जब अस्तित्व में आया तो देखते ही देखते 85 देशों में फैल गया। इन देशों की सूची में अमेरिका सबसे पहले नम्बर पर है। सबसे ज्यादा इसके मरीज अमेरिका में ही पाए जाते है।

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