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चेन्नई के इस शख्स ने गूगल की जॉब छोड़ देश की नदियों को साफ करने का उठाया बीड़ा
धरती पर जितने भी जल स्रोत हैं उनका मानव जाति द्वारा शोषण और दुरुपयोग किया जा रहा है। अब नौबत यहां तक आ चुकी है कि इन पर खतरा मंडरा रहा है। चेन्नई के अरुण कृष्णमूर्ति ने इस बात को अनदेखा ना करते हुए अहम कदम उठाया है।
गूगल की नौकरी छोड़कर कृष्णमूर्ति ने इको-एनवायरमेंट लॉन्च किया है जिसके तहत देश के 14 राज्यों के 93 जल स्रोतों को साफ किया जाएगा।

गैर-लाभकारी वन्यजीव संरक्षण और आवास बहाली समूह भारतीय पर्यावरणविद् फाउंडेशन द्वारा यह कदम उठाया गया है। जल स्रोतों के बीच पले-बड़े 32 वर्षीय अरुण की जिंदगी को इस फैसले ने बदल कर रख दिया। आईएएनएस के मुताबिक उनका लक्ष्य सभी जल स्रोतों में पारिस्थितिकी संतुलन लाना है।
उन्होंने यह भी दावा किया अपने लग्जरी जीवन को छोड़ना उनके लिए कभी भी मुश्किल नहीं रहा है। सबसे पहले उन्होंने चेन्न्ई के जल स्रोत को साफ किया था जिसमें स्थानीय पंचायत ने भी उनकी मदद की थी और उनके इस प्रयास को लगभग पूरे देश में फैलाया।
अरुण ने बताया कि “हम राज्य और केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। अभी हमें किसी भी तरह का कोई फंड नहीं मिला है लेकिन हम सरकार की मंजूरी और आज्ञा पर निर्भर हैं। ये एक सकारात्मक मुद्दा है जिस पर सरकार भी नदी और तालाबों को साफ करने में हमारी मदद कर रही है।”

अरुण स्कूल जाने वाले बच्चों और पर्यावरण संरक्षण के दिग्गजों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। अब ये सब मिलकर ईएफआई के स्लोगन 'वॉलंटियर फॉर इंडिया एंड हर एनवायरमेंट विद ईएफआई’ के साथ देश के जल स्रोतों को साफ करने का काम कर रहे हैं।
सरकार के अलावा द हिंदुजा फाउंडेशन, द मुरुगुप्पा ग्रुप, श्रीराम ग्रुप भी इस प्रयास में अपना योगदान दे रहे हैं। कृष्णमूर्ति को अपने प्रयासों के लिए वर्ष 2012 में 'द रोलेक्स अवार्ड्स’ से नवाजा गया था। ये अवॉर्ड उन लोगों को दिया जाता है जो उन परियोजनाओं पर काम करते हैं जो हमारे ग्रह पर जीवन को बेहतर बनाने और बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समर्पित हैं। उन्होंने यह भी कहा, "धरती पर पानी के संरक्षण की आवश्यकता को समझने में स्थानीय समुदाय को समझना जरूरी है। स्थानीय समुदाय के योगदान के बाद जल स्रोतों की चिंता करने की जरूरत नहीं है। प्रदूषण, अतिक्रमण से संबंधित सभी समस्याओं को इस प्रकार सुलझाया जा सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि वह भारत के पर्यावरण को आकर्षक पाते हैं और लोगों को आज के समय में इसे संरक्षित करने के लिए देश के प्राकृतिक इतिहास को समझने की आवश्यकता है।
ईएफआई पहले ही चेन्नई, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, पुणे, हैदराबाद, कोयंबटूर, पुडुचेरी, तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु, तिरुनेलवेली और अहमदाबाद जैसे शहरों में सफलतापूर्वक काम कर चुका है।



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