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सुषमा स्वराज के 10 ऐसे कोट्स जो देते हैं उनकी मजबूत छवि का परिचय
भारतीय राजनीति में सुषमा स्वराज का कद बहुत बड़ा और सम्मानीय है। अपने पद के साथ उन्होंने अंतराष्ट्रीय मंचों पर भारत की गरिमा को बनाए रखा। किसी भी मुद्दे पर बोलते समय जो भरोसा, इत्मीनान और तेज उनके चेहरे पर होता था उससे देश का हर नागरिक जुड़ा हुआ महसूस करता था। भाषा पर उनकी मजबूत पकड़ जटिल बातों को भी ऐसे समझा जाती थी जैसे घर परिवार का कोई बड़ा सदस्य सलाह दे रहा हो। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता और हाजिरजवाबी ने युवाओं के दिलों में भी उनकी खास जगह बनाई।

मगर अब उनकी सलाह से भारतीय जनता वंचित रह जाएगी। 6 अगस्त 2019 को सुषमा स्वराज का दिल्ली में निधन हो गया। वो 67 वर्ष की थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें हार्ट अटैक आया और उसके बाद उन्हें एम्स अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वो काफी समय से बीमार भी चल रही थीं और स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्होंने 2019 में चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था।
भारतीय राजनीति में ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने संसद से लेकर विदेशों तक अपनी बात पहुंचाई। विपक्ष हो या विदेशी नेता, उनके जवाब देने की कला के सभी कायल रहे। इस लेख में उनके दस ऐसे कोट्स को सहेजने की कोशिश कर रहे हैं जो उनकी निडरता, देश के प्रति समर्पण, मजबूत और तेज तर्रार छवि को दर्शाता है।

1.
"एक दूसरे को दोषारोपण करके किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता बल्कि एक साथ होकर होता है।" --सुषमा स्वराज

2.
"दुनिया की सबसे बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान होता तो सिर्फ संवाद से ही है, युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।"

3.
"हम आतंकवाद की परिभाषा तय करने में उलझे हुए हैं, हमें ये समझना होगा कि आतंकवादियों में अच्छे या बुरे के आधार पर अंतर नहीं किया जा सकता।"

4.
"क्या हमने विश्व के संसाधनों का अपनी आवश्यकता के अनुसार उपयोग किया है, या लालच में आकर उनका शोषण किया है।"

5.
"मेरी यह आशा है कि जो हमने बीज बोया है, वो एक दिन बहुत बड़ा पेड़ बनेगा।"

6.
"आप आक्रामक से आक्रामक बात संयमित भाषा में कर सकते हैं और इसलिए हम भाषा संयम बनाये रखें, तो अच्छा होगा।"

7.
"यदि हम अपनी जीवन-शैली को परिवर्तित कर सकें और अनावश्यक खपत को घटा सकें तो हमारी दिशा ठीक हो सकती है।"

8.
"सामाजिक और आर्थिक प्रगति भी हमारा एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है, मानव के न्यूनतम आवश्यकताओं की यदि पूर्ति कर दी जाए तो शांतिप्रिय समाज की स्थापना हो सकती है।"

9.
"आतंक के साथ बात नहीं हो सकती, लेकिन आतंक के बारे में बातचीत कर सकते हैं।

10.
"राजनीति में सफलता मेरी अपनी संघर्ष की यात्रा है, और ईश्वर की कृपा है।"



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