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Lockdown In India: क्यों गूगल पर ट्रेंड कर रहा 'लॉकडाउन'? बंद हुआ सब तो इन चीजों की सप्लाई पर होगा असर
Why Is Lockdown Trending On Google After PM Modi Speech: क्या भारत में फिर से तालाबंदी होने वाली है? यह सवाल आज हर भारतीय के मन में तब कौंध रहा है। अब चिंता बढ़ना तो स्वाभाविक है ही न क्योंकि गूगल ट्रेंड्स में लॉकडाउन इन इंडिया (Lockdown In India) अचानक टॉप पर आ गया। दरअसल, यह हलचल किसी नई महामारी के कारण नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में दिए गए एक गंभीर संबोधन के बाद शुरू हुई है। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण युद्ध को वैश्विक चुनौती बताते हुए देशवासियों को आगाह किया कि हमें 'कोरोना काल जैसी' मानसिक और रणनीतिक तैयारी रखनी होगी।
इस बयान ने जहां एक ओर पुरानी यादें ताजा कर दीं, वहीं दूसरी ओर दुनिया पर मंडरा रहे 'एनर्जी क्राइसिस' (ऊर्जा संकट) ने भविष्य की चिंता बढ़ा दी है। आखिर क्या है पीएम के इस बयान के पीछे का असली डर और अगर हालात बिगड़े, तो आपकी रसोई से लेकर गाड़ी की टंकी तक इसका क्या असर होगा? आइए समझते हैं आसान भाषा में...

क्या सच में लगने वाला है लॉकडाउन?
अचानक से गूगल पर भारत में लॉकडाउन ट्रेंड करने लगा है और सोशल मीडिया पर अनगिनत रील वायरल हो रही हैं जो लोगों की चिंता को बढ़ा रही हैं। दरअसल, लोकसभा में प्रधानमंत्री ने कहा था कि एक बार फिर से एकजुट होना है जैसे कोविड के समय हुआ था। पीएम की इस बात को लोगों ने लॉकडाउन से कनेक्ट कर लिया। हालांकि प्रधानमंत्री ने ये स्पष्ट किया था कि इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच गहराता तनाव केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा।
उन्होंने 'कोरोना' का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि उस दौरान पूरी दुनिया की सप्लाई चेन ठप हो गई थी। पीएम का इशारा 'तालाबंदी' की ओर नहीं, बल्कि 'आत्मनिर्भरता और स्टॉक' की ओर था। उन्होंने देश को भरोसा दिलाया कि सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है और देश में 'पैनिक' जैसे हालात नहीं होने दिए जाएंगे।
हर दिन हो रहा करोड़ों का नुकसान
फर्स्ट पोस्ट की रिपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़े डराने वाले हैं। वर्तमान में दुनिया हर दिन 1.1 करोड़ बैरल तेल का नुकसान झेल रही है। यह संकट 1970 के दशक के उस ऐतिहासिक तेल संकट से भी दोगुना बड़ा है, जिसने तब वैश्विक अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला दिया था। तब नुकसान 50 लाख बैरल प्रति दिन था, लेकिन आज का आंकड़ा तेल और गैस की कीमतों में आग लगाने के लिए काफी है।
अगर हुआ लॉकडाउन तो इन चीजों की सप्लाई पर पड़ सकता है सीधा असर
पेट्रोल और डीजल
भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। सप्लाई रुकने पर कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती हैं।
रसोई गैस (LPG)
गैस की किल्लत से आम आदमी का बजट बिगड़ सकता है। हाल में भी ऐसे हालात देखने को मिल ही रहे हैं जो आगे चलकर बद से बदतर हो सकते हैं।
रसोई और खाने-पीने का सामान होंगे महंगे
ईंधन की कीमतों का सबसे पहला और सीधा असर आपकी रसोई पर पड़ता है। ईंधन महंगा होने पर इनका ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ जाता है, जिससे आलू, प्याज और टमाटर जैसी बेसिक चीजें महंगी हो जाती हैं। दूध की सप्लाई बाधित हो सकती है।
ट्रांसपोर्ट होगा महंगा
पेट्रोल-डीजल-सीएनजी महंगी होने पर ऑटो और टैक्सी चालक किराया बढ़ा देते हैं। इसी तरह, डीजल महंगा होने पर सरकारी और प्राइवेट बसों के टिकट महंगे हो जाते हैं। दरअसल ईंधन महंगा होने पर ये कंपनियां 'फ्यूल सरचार्ज' लगा देती हैं, जिससे आपका ऑफिस जाना महंगा हो जाता है।
बढ़ सकती है स्कूल-कॉलेज फीस
ईंधन महंगा होने पर बच्चों की स्कूल-कॉलेज फीस भी बढ़ सकती है क्योंकि स्कूल बस और वैन की फीस में सालाना या छमाही बढ़ोतरी का यह सबसे बड़ा कारण होता है।
ऑनलाइन शॉपिंग और कूरियर पर असर
आजकल हम सुई से लेकर टीवी तक ऑनलाइन मंगाते हैं। ये सामान बड़े ट्रकों और डिलीवरी वैन के जरिए आप तक पहुंचते हैं। ईंधन महंगा होने पर ई-कॉमर्स कंपनियां (Amazon, Flipkart) 'डिलीवरी चार्ज' बढ़ा देती हैं या मुफ्त डिलीवरी के लिए न्यूनतम ऑर्डर की सीमा बढ़ा देती हैं।
घर बनाना होगा महंगा
सीमेंट और सरिया भारी सामान होने के कारण इनके रेट में ट्रांसपोर्टेशन का बड़ा हिस्सा होता है। डीजल महंगा होने पर घर बनाना महंगा हो जाता है।
हवाई सफर हो सकता है महंगा
हवाई जहाज के ईंधन (ATF) की कीमतें भी कच्चे तेल से जुड़ी होती हैं। अगर कच्चा तेल महंगा होता है, तो एयरलाइंस टिकट की कीमतें बढ़ा देती हैं। ऐसे में यात्रा करना भी आपकी जेब पर असर डाल सकता है।



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