Mahakumbh 2025: IIT बाबा के बाद सामने आए MTech बाबा, लाखों का पैकेज छोड़ बने वैरागी

Who is MTech Baba : प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान देश-विदेश से कई अनोखे साधु-संत नजर आ रहे हैं। हाल ही में एमटेक बाबा ने सबका ध्यान खींचा। ये बाबा पहले एक नामी कंपनी में 40 लाख रुपए सालाना के पैकेज पर काम करते थे, जहां उनकी मासिक सैलरी तीन लाख रुपए से अधिक थी। मोह-माया त्याग कर अब उन्होंने निरंजनी अखाड़े से जुड़कर नागा सन्यासी का जीवन अपना लिया है।

इससे पहले आईआईटी बाबा की प्रसिद्धि भी काफी चर्चा में रही थी। महाकुंभ में ऐसे संतों की कहानियां श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं, जो अपनी सुख-सुविधाओं और प्रतिष्ठित करियर को छोड़ अध्यात्म का मार्ग चुन रहे हैं।

Who is MTech Baba

कौन हैं एमटेक बाबा?

एमटेक बाबा, जिनका असली नाम दिगंबर कृष्ण गिरि है, इनका जन्‍म तेलुगू ब्राह्मण परिवार में हुआ था और कर्नाटक यूनिवर्सिटी से एमटेक की पढ़ाई की थी। अब अपनी अनोखी कहानी से सभी को हैरान कर रहे हैं। एमटेक की पढ़ाई के बाद उन्होंने नामी कंपनियों में कई वर्षों तक काम किया, जहां 400 लोग उनके अधीन कार्यरत थे। वे जीएम के पद पर भी रहे और लाखों रुपये मासिक कमाते थे। लेकिन 2010 में उन्होंने संन्यास का मार्ग अपनाया और 2019 में नागा साधु बने। संन्यास के शुरुआती दिनों में उन्होंने हरिद्वार में 10 दिन तक भीख भी मांगी। भौतिक सुख-सुविधाएं छोड़, अब वे अध्यात्म की राह पर हैं। महाकुंभ में उनकी जीवन यात्रा सुनने लोग जुट रहे हैं, जो सांसारिक मोह-माया त्यागने की प्रेरणा देती है।

लाखों का पैकेज छोड़, जब 10 दिन तक भीख मांगी

दिगंबर कृष्ण गिरि ने बताया कि सभी अखाड़ों को मेल कर जुड़ने की इच्छा जताई, लेकिन जवाब नहीं मिला। हरिद्वार जाकर अपनी सारी संपत्ति गंगा में प्रवाहित कर दी और साधु वेश धारण कर 10 दिन तक भीख मांगी। उनका मानना है कि अधिक धन से आदतें बिगड़ती हैं और शांति नहीं मिलती।

निरंजनी अखाड़े से जुड़ गए

एमटेक बाबा ने बताया कि उन्होंने निरंजनी अखाड़े के बारे में गूगल पर जानकारी ली थी। इसके बाद निरंजनी अखाड़ा पहुंचकर महंत श्री राम रतन गिरी महाराज से दीक्षा ली। 2019 में दीक्षा लेने के बाद, आग लगने की घटना के कारण 2021 में उन्हें अल्मोड़ा छोड़ना पड़ा। फिलहाल, वे उत्तरकाशी के एक छोटे से गांव में रहते हैं और साधना में समय बिताते हैं। उनकी यह यात्रा मोह-माया से विरक्ति और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करने वाली है।

Story first published: Tuesday, January 21, 2025, 10:00 [IST]
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