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Mother Day 2026: सलाम है इस मां के जज्बे को! पार्किंसंस के बावजूद रोज 100 लोगों को कराती हैं भोजन
Mother Day 2026: मदर्स डे पर हम अक्सर मां के त्याग और ममता की बात करते हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो इन शब्दों को एक नई पहचान दे देती हैं। महाराष्ट्र के पालघर की रहने वाली 64 वर्षीय किरण कामदार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। लोग उन्हें प्यार से 'खिचड़ी आजी' कहते हैं, क्योंकि वह हर दिन जरूरतमंद मरीजों के लिए अपने हाथों से खाना बनाकर उन्हें खिलाती हैं। पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद किरण कामदार ने खुद को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। हर सुबह तड़के उठकर वह खिचड़ी तैयार करती हैं और अस्पताल पहुंचकर मरीजों को अपने हाथों से परोसती हैं। उनकी यह सेवा सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं, बल्कि एक मां के उस रूप को दिखाती है जो हर हाल में दूसरों का ख्याल रखना जानती है।

जब बीमारी बनी चुनौती, लेकिन हिम्मत बनी ताकत
मदर्स डे के इस मौके पर किरण कामदार की कहानी यह सिखाती है कि एक मां हर मुश्किल से लड़ना जानती है। करीब सात साल पहले जब उन्हें पार्किंसंस की बीमारी का पता चला, तो यह उनके और परिवार के लिए बड़ा झटका था। परिवार को लगा कि अब उनका सक्रिय जीवन शायद रुक जाएगा। लेकिन किरण ने हालात को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। वह पहले से ही समाज सेवा में सक्रिय थीं और कई सालों से जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रही थीं। बीमारी के बाद भी उन्होंने खुद को नहीं रोका, बल्कि सेवा को ही अपनी ताकत बना लिया।
एक मां का दिल और सेवा की शुरुआत
बीमारी के बाद कुछ समय उन्होंने घर पर बिताया, लेकिन उनका मन हमेशा कुछ अच्छा करने के लिए बेचैन रहता था। साल 2021 में, जब वह अपनी बेटी के साथ अस्पताल पहुंचीं, तो वहां का नजारा देखकर उनका दिल भर आया। कोविड के समय अस्पताल में भीड़ थी और कई मरीजों को सही भोजन तक नसीब नहीं हो रहा था। यही वह पल था, जब एक मां का दिल पिघल गया और उन्होंने ठान लिया कि वह इन लोगों के लिए कुछ करेंगी। इसके बाद उन्होंने अनुमति लेकर अपने घर से ही खिचड़ी बनानी शुरू की और अस्पताल जाकर मरीजों व उनके परिजनों को परोसने लगीं। धीरे-धीरे यह काम उनकी रोज की आदत बन गया और आज वह हर करीब 100 लोगों तक खाना पहुंचाती हैं।

मरीजों के लिए मां जैसी ममता
पालघर के अस्पताल में दोपहर होते ही कई मरीजों को किरण का इंतजार रहता है। जब वह खिचड़ी लेकर पहुंचती हैं, तो उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। वह हर वार्ड में जाकर अपने हाथों से खाना परोसती हैं, जैसे कोई मां अपने बच्चों को खाना खिलाती है। कई मरीज ऐसे भी होते हैं, जिनका कोई सहारा नहीं होता, लेकिन किरण की वजह से उन्हें रोज भरपेट भोजन और अपनापन मिलता है। उनके लिए यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि एक मां का स्नेह होता है।

जज़्बे को सलाम, हर मां के लिए प्रेरणा
किरण कामदार की कहानी यह साबित करती है कि सेवा और ममता से बढ़कर कुछ नहीं होता। वह सिर्फ खिचड़ी नहीं बांटतीं, बल्कि लोगों के बीच उम्मीद और हौसला भी फैलाती हैं। खिचड़ी आजी आज एक ऐसी प्रेरणा बन चुकी हैं, जो हर मां को यह सिखाती हैं कि उम्र या बीमारी कभी भी उनके जज़्बे को नहीं रोक सकती।

परिवार बना सबसे बड़ा सहारा
हर मजबूत मां के पीछे एक मजबूत परिवार भी होता है, और किरण के साथ भी ऐसा ही है। बीमारी के बाद उनका इलाज कई डॉक्टरों से कराया गया और उन्हें सक्रिय रहने की सलाह दी गई। उनके बच्चों और परिवार ने उनके इस फैसले का पूरा समर्थन किया और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। उनकी बेटी बताती हैं कि सेवा में लगे रहने से उनकी सेहत में भी सुधार हुआ है।
मां की ममता की सबसे खूबसूरत मिसाल
मदर्स डे के इस खास मौके पर किरण कामदार की कहानी हमें यह सिखाती है कि मां सिर्फ अपने परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी ममता और सेवा की मिसाल बन सकती है। उनका जीवन बताता है कि अगर दिल में दूसरों के लिए प्यार और मदद करने की इच्छा हो, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।



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