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कुंडली में प्रेत दोष होने पर बुरी शक्तियां हो सकती है हावी, ये उपाय आएंगे काम
क्या आप भूत-प्रेत में विश्वास रखते है, और जिन लोगों ने इन्हें महसूस किया है क्या आप उनकी बातों पर यकीन करते है। देखा जाए तो आधुनिक युग में ये बात तो साबित हो गई है कि कुछ अदृश्य आत्माएं हैं, जो भले ही हमें दिखाई नहीं देती, लेकिन ये धरती पर मौजूद है। ये अदृश्य आत्माएं धरती पर मौजूद किसी भी इंसान के जीवन पर प्रभाव ड़ाल सकती हैं।
ये व्यक्ति को डरा सकते हैं और उनकी जिंदगी को नैगेटिव एनर्जी से भर सकते हैं। ये व्यक्ति को मेंटली और फिजिकली कमजोर बना सकते है। तो जब किसी व्यक्ति के कुछ अजीबोगरीब घटनाएं होती है तो इसके पीछे मुख्य कारण कुंडली में उपस्थित प्रेत दोष हो सकता है। यहां हम आपको प्रेत दोष के प्रभाव और उससे राहत देने वाले कुछ उपाय बताने जा रहे है।

प्रेत दोष क्या होता है?
जब किसी प्रेत या आत्मा की छाया मनुष्य के शरीर के ऊपर आ जाती है, तो उसे प्रेत दोष कहते हैं। ये बुरी शक्तियां पीड़ित को कई तरह से प्रताड़ित करती हैं। व्यक्ति को असहनीय दर्द या पीड़ा के दौर से गुजरना पड़ सकता है। यानि इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति को कई मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और सही समय पर सही इलाज न होने से कई दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।
प्रेत दोष का प्रभाव
जिस पर प्रेत दोष होता है वो ना सिर्फ खुद को बल्कि अपने परिजनों और आसपास के लोगों को भी चोट पहुंचा सकता है। साफ शब्दों मे कहें तो ऐसे लोग दूसरों के लिए खतरा बन जाते हैं। वे दूसरों के कंट्रोल से बाहर हो जाते है। क्यूंकि इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन पूरी तरह से खो देते हैं। वे हिंसक स्वभाव के हो जाते है। और बात-बात पर चिल्लाना शुरू कर देते है। प्रेत दोष मनुष्य के जीवन में सभी प्रकार के दुर्भाग्य लाता है। और व्यक्ति नैगेटिव एनर्जी से घिर जाता है। प्रेत दोष का प्रभाव पीड़ित की सांस लेने की क्षमता पर भी पड़ता है। जो उन्हें बीमार बना देता है।
कुंडली में प्रेत दोष की पहचान
- जिनकी कुंडली में राहु प्रथम घर में चंद्रमा के साथ है और कोई भी क्रूर ग्रह 5 वें और 9 वें घर में स्थित है, तो समझें जातक पर भूत या बुरी आत्माओं का प्रभाव है।
- अगर जन्मकुंडली में शनि, राहु, केतु, या मंगल 7 वें घर में हैं, तो जातक भूत, बाधा या बुरी आत्माओं आदि से पीड़ित होंगे।
- किसी जातक की कुंडली में शनि-मंगल-राहु किसी दोष का कारण बनता है। ऐसे व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानी से ग्रस्त होते हैं।
- अगर चंद्रमा की अंतरदशा राहु की महादशा में है या राहु 6 वें, 8 वें या 12 वें घर में चंद्रमा को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है, तो यह प्रेत दोष बनाता है।
प्रेत दोष के उपाय
- पीड़ित को बताए बिना, उसके बिस्तर के पास एक चाकू, माचिस और हनुमान चालीसा रखें।
- उसके कमरे में भगवान हनुमान, देवी दुर्गा और माँ काली की तस्वीर लगाएं।
- पूरे घर में गंगाजल छिड़कें और पीड़ित के कमरे में अगरबत्ती जलाएं।
- पीड़ित को रुद्राक्ष की माला पहनाएं।
- नैगेटिविटी दूर करने के लिए रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- घर के मुख्य द्वार पर सफेद पौधा लगाएं।



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