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हम काम करने के लिए दफ्तर जाते हैं और मिलने वाले वेतन से अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। परंतु कई बार यह तनख्वाह नफरत की वजह बन जाती है।
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हमारे साथ खाना खाने वाले, मीठी-मीठी बातें बोलने वाले सहकर्मी हमारे दुश्मन बन जाते हैं। हालांकि अपॉइंटमेंट के वक्त यह बताया जाता है कि अपने वेतन की चर्चा औरों के साथ ना करें।

लेकिन जिस तरह मीठे से मक्खियों को भिनकने से नहीं रोका जा सकता उसी तरह ये लोग भी आप तक पहुंच जाते हैं। कुछ लोग इतने शातिर होते हैं कि आपकी तनख्वाह से आपकी बचत का अंदाज़ा लगा लेते हैं।
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इसलिए इसकी चर्चा करना सही नहीं है। आपका वेतन दफ्तर की गपशप का कारण बन सकता है। जिससे आपको परेशानी हो सकती है।

1 मन को अशांत करता है
यह पता चलने पर कि आपको ज्यादा वेतन मिल रहा है आपके सहकर्मी का मन अशांत हो सकता है। वह अपना मन काम में नही लगाता तथा उसके काम करने का स्तर नीचे गिर सकता है। ये त्रुटियां उसकी तरक्की में बाधाएं पैदा करेंगी एवं दफ्तर के काम में रूकावट बनेंगी।

2 शत्रुता
जो सहकर्मी कल तक आपका मित्र था वह आज आपका दुश्मन बन जाता है। कुछ हजार रुपये उनके मन में ईष्या उत्पन्न करते हैं। वह हर समय आपको हराने की दौड में लग जाता है। सब के सामने आपकी गलतियों को प्रदर्शित करता है।

3 तुलना
कुछ लोगों को अपनी क्षमताओं की तुलना करने की आदत होती है। इस तुलना के माध्यम से वे अपनी श्रेष्ठता को मापने की कोशिश करते हैं। जब उन्हें अपना कौशल औरों से अधिक लगने लगता है तब वे जताते हैं कि कम तनख्वाह में काम करना उनका बड़प्पन है। अपनी तुलना करके हम स्वयं को बेहतर नहीं बना सकते हैं। यदि आपको लगता है कि कंपनी में आपको अपेक्षित तवज्जो नही दी जा रही है। आपको बाज़ार में मौजूद अन्य कंपनियों की और अपना रूख कर लेना चाहिए।

4 नकारात्मकता
अक्सर लोग नकारात्मकता से बचने के लिए अपने वेतन को लेकर झूठ बोलते हैं। चूंकि वे जानते हैं कि वेतन को लेकर सहकर्मियों के मन में दवेष बढेगा जो उनके लिए हानिकारक हो सकता है।



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