Latest Updates
-
लंच में बनाएं उत्तर प्रदेश की चना दाल कढ़ी, उंगलिया चाटते रह जाएंगे घरवाले -
Gangaur Ke Geet: 'आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै'...इन मधुर गीतों के बिना अधूरी है गौरा पूजा, यहां पढ़ें पूरे लिरिक्स -
प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीनों में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, वरना बच्चे की सेहत पर पड़ेगा बुरा असर -
Viral Video: टीम इंडिया की T20 वर्ल्ड कप जीत पर पाकिस्तान में जश्न, काटा केक और गाया 'जन-गण-मन' -
कौन हैं Mahieka Sharma? जिसके प्यार में 'क्लीन बोल्ड' हुए Hardik Pandya, देखें वायरल वीडियो -
कौन हैं Aditi Hundia? T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद Ishan Kishan के साथ डांस Video Viral -
काले और फटे होंठों से हैं परेशान? तो पिंक लिप्स पाने के लिए आजमाएं ये घरेलू नुस्खे -
Chaitra Navratri 2026: 8 या 9 दिन जानें इस बार कितने दिन के होंगे नवरात्र? क्या है माता की सवारी और इसका फल -
Gangaur Vrat 2026: 20 या 21 मार्च, किस दिन रखा जाएगा गणगौर व्रत? नोट करें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त -
घर में लाल चीटियों का दिखना शुभ है या अशुभ? जानें शकुन शास्त्र के ये 5 बड़े संकेत
Ash Wednesday 2023: जानिए क्यों ऐश वेडनेसडे के दिन ईसाई अपने माथे पर लगाते हैं राख और मांगते हैं माफी
ऐश वेडनेसडे प्रार्थना और उपवास का एक ईसाई पवित्र दिन है। ईसाइयों के चालीस दिन के व्रत का प्रथम दिवस है, जो इस साल 22 फरवरी यानी कि आज के दिन है। ऐश वेडनेसडे को पारंपरिक रूप से पश्चिमी ईसाइयों द्वारा मनाया जाता है।

इस खास दिन ईसाई, विशेष रूप से कैथोलिक अपने माथे पर राख से क्रॉस का निशान चिन्हित करते हैं। लेंट के पहले दिन को ऐश वेडनेसडे के रूप में मनाया जाता है और पूरे दिन उपवास रखा जाता है। तो चलिए जानते हैं इस खास दिन के महत्व के बारे में-

क्या है ऐश वेडनेसडे
ऐश वेडनेसडे को आधिकारिक तौर पर एशेज के दिन के रूप में जाना जाता है। यह एक पश्चाताप का दिन है, जब ईसाई अपने पापों को स्वीकार करते हैं और भगवान के प्रति अपनी भक्ति को मानते हैं। इस दिन लोग एक मास में रूप में इकट्ठा होते हैं और एक पुजारी एक क्रॉस के आकार में एक उपासक के माथे पर राख डालता है। इस समारोह में स्वयं पादरी द्वारा भी यह किया जाता है। यह एक व्यक्ति के दुः ख और उनके पापों के लिए शोक का भी प्रतिनिधित्व करता है। ईसाइयों को विश्वास है कि उनके पाप के कारण ही यीशु मसीह ने अपना जीवन दिया था। ऐश वेडनेसडे हमेशा हमेशा श्रोव मंगलवार के तुरंत बाद वाले दिन आता है। हालांकि, बाइबिल में ऐश वेडनेसडे या लेंट का कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन तपस्या की निशानी के रूप में राख दान करने की परंपरा यीशु से मिलती है।

ऐश वेडनेसडे का इतिहास
जबकि श्रोव मंगलवार को ईसाई रिच फूड्स जैसे कि चीनी, अंडे और मक्खन खाना पसंद करते हैं। लेकिन लेंट के पहले दिन यानी ऐश वेडनेसडे संयम के इस 40 दिवसीय अवधि की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक है। बता दें कि लेंट ईसाई लोगों का आध्यात्मिक समय होता है। जो करीबन 40 दिनों तक चलता है और ईस्टर संडे पर खत्म होता है। इन दिनों ईसाई परंपरागत रूप से मीट और डेयरी जैसे खाद्य पदार्थों से अधिक परहेज करते हैं। साथ ही अपनी बुरी आदतों को छोड़ने की कोशिश करते हैं। बाइबिल के अनुसार, ये बलिदान उन 40 दिनों और 40 रातों को प्रतिबिंबित करने के लिए हैं जो यीशु ने जुडियन रेगिस्तान में उपवास पर बिताए थे। इसलिए ईसाई धर्म के अनुयायी ऐश वेडनेसडे के दिन ईश्वर से अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए 40 दिन के उपवास की शुरूआत करते हैं।

ऐश वेडनेसडे का महत्व
ऐश वेडनेसडे महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे लेंटन अवधि की शुरुआत होती है और यह ईस्टर तक जाती है। राख मृत्यु और पश्चाताप दोनों का प्रतीक है। दुनिया भर के पादरी ईसाई व्यक्तियों के माथे पर राख से क्रॉस बनाकर इस खास दिन का महत्व समझाते हैं। उनका मानना है कि हम सभी वास्तव में मिट्टी और आखिरी में वापिस मिट्टी में ही मिल जाएंगे।



Click it and Unblock the Notifications











