Latest Updates
-
World Lung Cancer Day 2026: स्मोकिंग न करने वालों को भी हो सकता है लंग कैंसर, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव -
August 2026 Vrat Tyohar: सावन शिवरात्रि से लेकर रक्षाबंधन तक, देखें अगस्त में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट -
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम
Ash Wednesday 2023: जानिए क्यों ऐश वेडनेसडे के दिन ईसाई अपने माथे पर लगाते हैं राख और मांगते हैं माफी
ऐश वेडनेसडे प्रार्थना और उपवास का एक ईसाई पवित्र दिन है। ईसाइयों के चालीस दिन के व्रत का प्रथम दिवस है, जो इस साल 22 फरवरी यानी कि आज के दिन है। ऐश वेडनेसडे को पारंपरिक रूप से पश्चिमी ईसाइयों द्वारा मनाया जाता है।

इस खास दिन ईसाई, विशेष रूप से कैथोलिक अपने माथे पर राख से क्रॉस का निशान चिन्हित करते हैं। लेंट के पहले दिन को ऐश वेडनेसडे के रूप में मनाया जाता है और पूरे दिन उपवास रखा जाता है। तो चलिए जानते हैं इस खास दिन के महत्व के बारे में-

क्या है ऐश वेडनेसडे
ऐश वेडनेसडे को आधिकारिक तौर पर एशेज के दिन के रूप में जाना जाता है। यह एक पश्चाताप का दिन है, जब ईसाई अपने पापों को स्वीकार करते हैं और भगवान के प्रति अपनी भक्ति को मानते हैं। इस दिन लोग एक मास में रूप में इकट्ठा होते हैं और एक पुजारी एक क्रॉस के आकार में एक उपासक के माथे पर राख डालता है। इस समारोह में स्वयं पादरी द्वारा भी यह किया जाता है। यह एक व्यक्ति के दुः ख और उनके पापों के लिए शोक का भी प्रतिनिधित्व करता है। ईसाइयों को विश्वास है कि उनके पाप के कारण ही यीशु मसीह ने अपना जीवन दिया था। ऐश वेडनेसडे हमेशा हमेशा श्रोव मंगलवार के तुरंत बाद वाले दिन आता है। हालांकि, बाइबिल में ऐश वेडनेसडे या लेंट का कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन तपस्या की निशानी के रूप में राख दान करने की परंपरा यीशु से मिलती है।

ऐश वेडनेसडे का इतिहास
जबकि श्रोव मंगलवार को ईसाई रिच फूड्स जैसे कि चीनी, अंडे और मक्खन खाना पसंद करते हैं। लेकिन लेंट के पहले दिन यानी ऐश वेडनेसडे संयम के इस 40 दिवसीय अवधि की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक है। बता दें कि लेंट ईसाई लोगों का आध्यात्मिक समय होता है। जो करीबन 40 दिनों तक चलता है और ईस्टर संडे पर खत्म होता है। इन दिनों ईसाई परंपरागत रूप से मीट और डेयरी जैसे खाद्य पदार्थों से अधिक परहेज करते हैं। साथ ही अपनी बुरी आदतों को छोड़ने की कोशिश करते हैं। बाइबिल के अनुसार, ये बलिदान उन 40 दिनों और 40 रातों को प्रतिबिंबित करने के लिए हैं जो यीशु ने जुडियन रेगिस्तान में उपवास पर बिताए थे। इसलिए ईसाई धर्म के अनुयायी ऐश वेडनेसडे के दिन ईश्वर से अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए 40 दिन के उपवास की शुरूआत करते हैं।

ऐश वेडनेसडे का महत्व
ऐश वेडनेसडे महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे लेंटन अवधि की शुरुआत होती है और यह ईस्टर तक जाती है। राख मृत्यु और पश्चाताप दोनों का प्रतीक है। दुनिया भर के पादरी ईसाई व्यक्तियों के माथे पर राख से क्रॉस बनाकर इस खास दिन का महत्व समझाते हैं। उनका मानना है कि हम सभी वास्तव में मिट्टी और आखिरी में वापिस मिट्टी में ही मिल जाएंगे।



Click it and Unblock the Notifications