Winter Solstice 2020: साल का सबसे छोटा दिन आज, साथ ही होगा बृहस्पति और शनि का मिलन

आज यानि 21 दिसंबर 2020 (सोमवार) के दिन इस वर्ष का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होने वाली है। इस खगोलीय घटना को शीतकालीन संक्रांति या विंटर सोलस्टाइस (Winter Solstice) कहा जाता है।

Winter solstice 2020

इस दौरान सूर्य की किरणें बहुत कम समय के लिए पृथ्वी पर पड़ती है। सूर्य की मौजूदगी लगभग 8 घंटे तक रहती है, वहीं सूर्य अस्त होने के बाद लगभग 16 घंटे की रात होती है। सूर्य इस दिन कर्क रेखा से मकर रेखा की तरफ उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर प्रवेश करता है। इस घटना के बाद से ही पृथ्वी पर चंद्रमा की रोशनी ज्यादा देर तक रहने लगती है।

शीतकालीन संक्रांति कब होती है?

शीतकालीन संक्रांति कब होती है?

उत्तरी गोलार्ध में शीतकालीन संक्रांति की बात करें तो सामान्य तौर पर यह 19 से 23 दिसंबर के बीच होती है। साल 2020 में ये 21 दिसंबर को पड़ रहा है। जानकारों के मुताबिक भारत में, शीतकालीन संक्रांति का समय 3.32 (pm) बजे से शुरू होगा।

आपको बता दें कि विंटर सोलस्टाइस की भांति समर सोल्सटिस (Summer Solstice) भी होता है जो 20 से 23 जून के बीच में पड़ता है। यह साल का सबसे लंबा दिन होता है और इस मौके पर रात सबसे छोटी होती है।

वहीं 21 मार्च और 23 सितंबर पर दिन और रात का समय बराबर होता है।

गिरता है तापमान

गिरता है तापमान

Winter Solstice के बाद से ठंड काफी बढ़ जाती है। इसकी वजह है पृथ्वी पर चंद्रमा की रौशनी ज्यादा देर तक रहना और वहीं सूर्य की किरणें अपना पूरा प्रकाश धरती पर नहीं बिखेर पाती है। गौरतलब है कि Winter Solstice को सर्दियों के पहले दिन के रूप में भी जाना जाता है।

साल 2020 का विंटर सोलस्टाइस है खास

साल 2020 का विंटर सोलस्टाइस है खास

साल 2020 का Winter Solstice अर्थात शीतकालीन संक्रांति विशेष है। इसी दिन बृहस्पति और शनि 'महान संधि' का निर्माण करने वाले हैं। 21 दिसंबर को बृहस्पति और शनि ग्रहों के बीच की कोणीय दूरी लगभग 0.06 डिग्री रह जाएगी। इन दोनों ग्रहों के बीच नजदीकी इतनी बढ़ जाएगी कि ये एक-दूसरे में मिलते हुए दिखाई देंगे। लगभग 400 सालों के बाद बृहस्पति और शनि ग्रह के मिलन की ये अद्भुत खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। गौरतलब है कि इससे पहले 1923 में ये दोनों ग्रह इतने नजदीक आए थे। अब 15 मार्च 2080 की रात को बृहस्पति और शनि को इतने करीब से देखा जा सकेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार सोमवार को होने वाली ये घटना सूर्यास्त के बाद खास उपकरणों के मदद के बिना भी देखी जा सकेगी।

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