Latest Updates
-
Akshaya Tritiya पर किस भगवान की होती है पूजा? जानें इस दिन का महत्व और पौराणिक कथा -
Parshuram Jayanti 2026 Sanskrit Wishes: परशुराम जयंती पर इन संस्कृत श्लोकों व संदेशों से दें अपनों को बधाई -
कौन हैं जनाई भोंसले? जानें आशा भोसले की पोती और क्रिकेटर मोहम्मद सिराज का क्या है नाता? -
Amarnath Yatra Registration 2026: शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन, घर बैठे कैसे करें आवेदन, क्या हैं जरूरी डॉक्यूमेट्स -
Akshaya Tritiya पर जन्म लेने वाले बच्चे होते हैं बेहद खास, क्या आप भी प्लान कर रहे हैं इस दिन डिलीवरी -
उत्तराखंड में 14 साल की लड़की ने दिया बच्चे को जन्म, जानें मां बनने के लिए क्या है सही उम्र -
गर्मियों में भूलकर भी न खाएं ये 5 फल, फायदे की जगह पहुंचा सकते हैं शरीर को भारी नुकसान -
Himachal Day 2026 Wishes In Pahadi: 'पहाड़ां री खुशबू, देओदारे री छां', अपनों को भेजें पहाड़ी शुभकामनाएं -
Pohela Boishakh 2026 Wishes: 'शुभो नबो बोर्शो' के साथ शुरू करें नया साल, अपनों को भेजें ये शानदार संदेश -
Himachal Day 2026 Wishes: हिमाचल है हमारा अभिमान...हिमाचल दिवस पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश
पाकिस्तान जैसे हालत न हो इसलिए आधी रात को फहराया था तिरंगा, कुंडली ने तय किया था आजादी का समय
Astrological Mystery Behind India Independence : देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त, 1947 को दिल्ली में लालकिले के लाहौरी गेट के ऊपर तिरंगा फहराया था। देशभर में खुशियां छाई हुई थी। आजाद देश में चारों तरफ तिरंगा लहरा रहा था।
लेकिन आपको जानकर अचम्भा होगा कि जिस तरह आज के समय में हर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुबह के समय ध्वजारोहण होता है, 15 अगस्त 1947 को आजाद भारत में पहली बार ध्वजारोहण सुबह नहीं बल्कि पहली बार आधी रात को 12 बजकर 1 मिनट पर हुआ था।
इसके पीछे ज्योतिषीय कारण थे। उज्जैन (मध्य प्रदेश) के क्रांतिकारी, लेखक और ज्योतिषाचार्य पं. सूर्यनारायण व्यास ने भारत को आजाद करने के लिए शुभ मुर्हूत निकाला था। उनकी ज्योतिषीय गणना के बाद ही शुभ मुर्हूत पर पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया।

लॉर्ड माउंटबेटन ने क्यों चुनी थी 15 अगस्त की तारीख?
स्वतंत्रता दिवस के लिए आखिर 15 अगस्त की तारीख क्यों चुनी गई इसके पीछे ' फ्रीडम एट मिडनाइट' में लॉर्ड माउंटबेटन के हवाले से बताया गया था कि भारत को आजाद करने के लिए 15 अगस्त की तारीख चुनने की पीछे यह वजह थी कि विश्व युद्ध के दौरान जापान के आत्मसमर्पण करने की ये दूसरी बरसी थी। माउंटबेटन के लिए एक नए लोकतांत्रिक एशिया के जन्म के लिए जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ से अच्छी तिथि और क्या हो सकती थी। इसके बाद ही भारत की आजादी के बिल में 15 अगस्त की तारीख तय की गई। लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख तय कर दी थी। हालांकि ज्योतिषी इस तारीख को लेकर नाखुश थे।
ज्योतिषाचार्य पं. सूर्यनारायण व्यास डॉ. ने दिया था शुभ मुहूर्त
अंग्रेजों से दो तारीखें मिली थीं 14 और 15 अगस्त, जिनमें से भारत की आजादी के लिए एक दिन चुना जाना था। ज्योतिषाचार्य पं. सूर्यनारायण व्यास डॉ. राजेंद्र प्रसाद के काफी नजदीकी थे। उनके सामने सवाल ये रखा गया कि ज्योतिषीय गणना के मुताबिक किस दिन भारत को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाना चाहिए। मोहम्मद जिन्ना ने 14 अगस्त का दिन पाकिस्तान के लिए चुना। जबकि पं. व्यास ने उन्हें चेताया था कि 14 अगस्त के दिन ग्रह स्थितियां ठीक नहीं हैं। अगर 14 अगस्त को पाकिस्तान बना तो संभव है वो हमेशा अस्थिर रहेगा, लेकिन जिन्ना नहीं माने।
मुहूर्त जैसी बातों को नहीं मानते थे। पं. व्यास ने जिन्ना को आगाह करने के बावजूद उन्होंने 14 अगस्त का दिन ही चुना। गौरतलब है कि जिन्ना की पत्नी रतनबाई पं. सूर्यनारायण व्यास को मानती थीं, लेकिन 1929 में ही उनका निधन हो चुका था।

14-15 की रात 12 बजे का समय तय किया गया
पं. सूर्यनारायण व्यास की सलाह पर ही डॉ. राजेंद्र प्रसाद और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 14-15 अगस्त की दरमियानी रात 12 बजे का समय भारत की आजादी के लिए तय किया। कारण था उस दिन भारत की कुंडली में स्थिर वृषभ राशि का लग्न होना, ये लग्न स्थिर माना जाता है। पं. व्यास का तर्क था, स्थिर लग्न में देश आजाद हुआ तो आजादी और लोकतंत्र दोनों स्थिर रहेंगे।
15 अगस्त को आधी रात को फहराया गया तिरंगा
वैसे तो स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने की परंपरा सुबह की है, लेकिन 15 अगस्त 1947 को रात 12 बजे पं. जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर तिरंगा फहराया। हालांकि, इतिहास के पन्नों में ये दर्ज नहीं हो सका, लेकिन इसकी सलाह भी पं. व्यास ने ही दी थी। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद से कहा कि अगर हम आधी रात को आजादी का समय ले रहे हैं, तो इसी समय में ध्वजारोहण किया जाए। स्वतंत्रता के औपचारिक कार्यक्रम भले ही सुबह किए जाएं, लेकिन पहला ध्वजारोहण आधी रात में ही होगा। पं. नेहरू ने उनकी बात मानी और आधी रात में लाल किले पर ध्वजारोहण किया।
संसद का हुआ था शुद्धिकरण
पं. सूर्यनारायण व्यास ने ही सलाह दी कि 15 अगस्त की रात को संसद भवन का शुद्धिकरण किया जाए। इसकी जिम्मेदारी गोस्वामी गिरधारीलाल को दी गई। उन्होंने संसद भवन को धुलवाया और उसका शुद्धिकरण करवाया।

ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण के लिए भी रखा था मुहूर्त
इतना ही नहीं ज्योतिष चाहते थे कि सत्ता के परिवर्तन का संभाषण 48 मिनट की अवधि में संपन्न किया जाए हो जो कि अभिजीत मुहूर्त में आता है। ये मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 15 मिनट तक पूरे 24 मिनट तक की अवधि का था। ये भाषण 12 बजकर 39 मिनट तक दिया जाना था। इस तय समय सीमा में ही जवाहरलाल नेहरू को भाषण देना था। ये वो ही भाषण था जिसे हम Tryst with destiny (नियति से साक्षात्कार) के नाम से जानते हैं।
1930 में की थी भविष्यवाणी 1947 में आजाद होगा देश
उज्जैन में 1902 में जन्मे पं. सूर्यनारायण व्यास 1921-1922 से ही आजादी की लड़ाई में सक्रिय हो गए थे। ज्योतिषी भी थे, तो इस पर लेख भी लिखा करते थे। 1930 में आज नाम की पत्रिका के एक लेख में उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि भारत अगस्त 1947 में आजाद हो जाएगा।



Click it and Unblock the Notifications











