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परमाणु परीक्षण के बाद एक इंजीनियर ने बनाई थी दुनिया की पहली बिकिनी
आइए आज हम आपको बिकिनी के सफर से जुड़ी कुछ मजेदार तथ्य बताते है, जो शायद आपको भी नहीं मालूम होंगे।
हॉलीवुड और बॉलीवुड में बिकिनी का फैशन इन दिनों बहुत आम हो गया है, लेकिन कभी आपके दिमाग में आया है कि आखिर किसने सबसे पहले बिकिनी पहनी होगी? और ये फैशन किस के दिमाग की उपज रही होगी?
हालांकि बिकिनी का फैशन कई दशकों पुराना हैं लेकिन आज भी हमारे देश में खुलेआम किसी लड़की और एक्ट्रेस के बिकिनी पहनती है तो हर जगह हल्ला मच जाता हैं। बिकिनी शब्द पिछले कुछ सालों में इतना फेमस हो गया है कि जैसे ही इसका जिक्र होता है तो सबके कान खड़े हो जाते हैं।
आपको अंदाजा भी नहीं होगा कि अमेरिका में 1946 में हुए परमाणु बम के परीक्षण से है बिकिनी का रिश्ता और इसे बनाने वाला कोई डिजाइनर नहीं एक ऑटोमोबाइल इंजीनियर था। आइए आज हम आपको बिकिनी के सफर से जुड़ी कुछ ऐसे ही मजेदार फैक्ट बताएंगे जो शायद आपको भी नहीं मालूम होंगे।

अमेरिका की परमाणु परीक्षण साइट पर पड़ा नाम
दरअसल आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बिकिनी के डिजाइनर लुइस रेअर्ड ने अपनी इस बोल्ड ड्रेस का नाम US Pacific Nuclear साइट बिकिनी के नाम पर रखा था। 5 जुलाई को लुईस ने दुनिया के सबसे छोटे बाथिंग ड्रेस को लॉन्च किया था।
इससे ठीक 4 दिन पहले यूएस मिलिट्री ने यूएस पेसिफिक न्यूक्लियर साइट बिकनी एटॉल पर परमाणु का परीक्षण हुआ था। इस परीक्षण के बाद ये जगह 1940 के दशक में कभी न भूलने वाला नाम बना दिया।

ऑटोमोबाइल इंजीनियर था डिजाइनर
बिकिनी किसी फैशन डिज़ाइनर नहीं, एक इंजीनियर के दिमाग की उपज थी। वैसे इसे बनाने के बाद लुईस का नाम दुनिया के सबसे बड़े डिज़ाइनर की गिनतियों में होने लगा।

एक डांसर थी बिकनी मॉडल
लुइस को अपनी इस बोल्ड ड्रेस के लिए कोई मॉडल नहीं मिल रही थी इसलिए उन्होंने न्यूड डांस करने वाली डांसर मिशेलिन बर्नार्डिनी को दुनिया की पहली बिकिनी मॉडल बनाया।

किया था रिंग टेस्ट
Louis का मानना था कि बिकिनी को एक अंगूठी के अंदर से निकल जाना चाहिए और उनका पहला बिकिनी पीस ऐसा ही था। मिशेलिन ने जब पहली बार इसके लिए पोज़ किया था, तो उनके हाथ में एक बेहद छोटा बॉक्स था, जिसमें शायद रुमाल जितनी जगह हो. इस बॉक्स में बिकिनी आसानी से आ जाती थी।

फ़िल्मों ने फ़ेमस की बिकिनी
बिकिनी को ट्रेंड बनाने में सबसे बड़ा रोल हॉलीवुड फ़िल्मों का था। इन सभी फ़िल्मों में बीच के बिकिनी दिखा कर, इसे Popularize करने की कोशिश की गयी।

1951 के बाद बैन लग गया बिकनी पर
वर्ष 1951 में लंदन में आयोजित पहले मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के बाद बिकनी में दुनियाभर में बैन लगा दिया गया था। क्योंकि वेटिकन ने इसे पहनना धर्म के विरुद्ध पाप बताया गया था।

बिकनी की बदौलत तैराक से एक्ट्रेस बनी
इसके बाद फिल्मों में स्विमसूट के चलन ने जोर पकड़ा। अमेरिकी तैराक एस्थर विलियम्स 1940 की ओलंपिक प्रतियोगिता की तैयारी कर रही थीं वो बिकिनी में ही तैराकी करती थी। लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के चलते यह प्रतियोगिता रद्द हो गई। इसी दौरान हॉलीवुड एजेंटों का ध्यान उनकी ओर गया और आगे चलकर वह हॉलीवुड की सबसे रईस अभिनेत्रियों में से एक बनीं।

बिकिनी की वजह से मर्लिन मुनरो हुई हिट
1940 के दशक में मर्लिन मुनरो ने मशहूर पिरेली कैलंडर के लिए फोटोशूट किया। इसमें स्विमसूट वाली उनकी तस्वीरों की काफी चर्चा हुई पर साथ ही नग्न तस्वीरों के कारण उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी। अभिनेत्री के तौर पर उनका करियर इसके बाद ही शुरू हुआ।

शार्मिला टेगोर थी पहली एक्ट्रेस
कहा जाता है कि भारतीय सिनेमा में शर्मिला टेगोर वो पहली एक्ट्रेस थी जिसने बिकिनी का ट्रेंड शुरु किया। 1966 में फिल्मफेयर मैग्जीन के कवर पेज से लेकर 1967 में एन इवनिंग इन पेरिस में बिकनी के शॉट देकर बॉलीवुड में बिकनी के लिए दरवाजे खोल दिए।

रोमनकाल जितना पुराना है इतिहास
क्या आपको पता है बिकिनी का इतिहास रोमन काल जितना पुराना है, यह एक प्राचीन आविष्कार था। पर असली पहचान बिकिनी को1946 में मिली। रोमन काल में जिमनास्टिक आयोजन मोजेक (महिलाओं का फुटबाल प्रतियोगिता ) में भाग लेने वाली महिलाएं इसे पहना करती थी। रोम और इटली के कई पुराने लेखों और अभिलेखों में इस खेल और बिकिनी का उल्लेख भी किया गया है।

इंटरनेशनल बिकिनी डे
5 जुलाई 1946 को शुरू हुआ था बिकिनी का सफर, उसके बाद से इस तारीख़ को अंतराष्ट्रीय बिकिनी दिवस के रूप में मनाया जाता है।



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