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World Milk Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व दुग्ध दिवस? जानिए इसका इतिहास, महत्व और थीम
World Milk Day 2026: दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है, क्योंकि इसमें शरीर के लिए जरूरी कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। दूध में कैल्शियम, प्रोटीन और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के विकास और मजबूती में अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि इसे स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा माना जाता है। दूध के पोषण मूल्य और डेयरी क्षेत्र के योगदान को रेखांकित करने के लिए हर साल 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस (World Milk Day) मनाया जाता है। यह दिन लोगों को दूध के महत्व से परिचित कराने के साथ-साथ डेयरी उद्योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी अवसर प्रदान करता है। आइए, जानते हैं विश्व दुग्ध दिवस के इतिहास, उद्देश्य और महत्व के बारे में -

विश्व दुग्ध दिवस का इतिहास
दूध के पोषण महत्व और डेयरी क्षेत्र के योगदान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2001 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा की गई थी। इसके लिए 1 जून की तारीख तय की गई, क्योंकि कई देशों में इस दिन पहले से ही दूध से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। तब से हर साल यह दिवस दुनिया के अनेक देशों में मनाया जाता है, जहां दूध के स्वास्थ्य लाभों और डेयरी उद्योग की भूमिका के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है।
विश्व दुग्ध दिवस का उद्देश्य
विश्व दुग्ध दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को दूध और डेयरी उत्पादों के पोषण संबंधी महत्व के बारे में जागरूक करना है। इसके साथ ही यह दिन डेयरी क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक भूमिका को भी रेखांकित करता है। दूध न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है, बल्कि डेयरी उद्योग दुनिया भर में लाखों परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार भी है। इसी कारण हर साल 1 जून को विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों के माध्यम से दूध के महत्व तथा डेयरी क्षेत्र के योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
विश्व दुग्ध दिवस 2026 की थीम
विश्व दुग्ध दिवस 2026 की थीम 'महिला किसानों का सम्मान' (Celebrating Women Farmers) रखी गई है। इस वर्ष का अभियान डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। पशुपालन, दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महिलाओं का योगदान बेहद अहम माना जाता है। इस थीम के माध्यम से डेयरी उद्योग में कार्यरत महिला किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि क्षेत्र में उनके योगदान को वैश्विक स्तर पर पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है।



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