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उसकी वजह से मैं 6 बार प्रेग्नेंट हुई और फिर मैंने फैसला किया कि...
अकसर मलयाली लोगों का नाम सुनते ही किसी काले रंग के व्यक्ति का चेहरा सामने आने लगता है। इस वजह से मुझे हमेशा लोग चिढ़ाया करते थे। इसकी शुरुआत मेरे बचपन से ही हो गई थी जब मेरी दादी मेरे साथ भेदभाव किया करती थी।
मेरी चार सुंदर बहने भी थीं और इसी वजह से हमेशा मुझे ताने मारे जाते थे। इस सबके बावजूद मेरी मां मुझसे बहुत प्यार करती थी। मेरे रंग को लेकर चिढ़ाने की वजह से मुझमें आत्मविश्वास बहुत कम होने लगा था और अब ये साफ तौर पर मेरे व्यवहार में भी दिखने लगा था। दूसरों से बात करने में मैं झिझकने लगी थी।
फिर एक शादी में मेरी मुलाकात राजू से हुई। वो मेरा फैमिली फ्रेंड था और हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। शुरुआत में एक-दूसरे से मिलते थे और फिर हमने नोट्स बदलने शुरु किए। धीरे-धीरे हम दोनों की पसंद मिलने लगी और हम एक-दूसरे के काफी करीब आ गए।
उस वक्त पर मोबाइल फोन का ज़माना नहीं था इसलिए मुझे उससे बात करने की बहुत बेचैनी रहती थी। वो पहला ऐसा इंसान था जिसे मैं अपना पक्का दोस्त कह सकती थी।

एक दिन उसने मुझसे अपने दिल की बात का इज़हार कर दिया और मैंने उसके प्रस्ताव को स्वीकार भी कर लिया। उस समय मेरी उम्र 21 हुआ करती थी और हम दोनों ने एक-दूसरे को लगभग 4 साल तक डेट किया। राजू ने हम दोनों के बारे में अपनी मां को बताने का फैसला लिया लेकिन वो हमारे प्यार के खिलाफ थीं। हमारे प्यार के खिलाफ होने की उनकी सबसे बड़ी वजह मेरा काला रंग ही थी।
राजू ने अपनी मां को मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं मानीं। हम दोनों का ब्रेकअप मेरे लिए बहुत दुखदायी था। नदी में जितना पानी होता है शायद उस समय मेरी आंखों से भी उतने आंसू बहे होंगें। मैंने आत्महत्या तक करने की कोशिश की थी लेकिन मेरी मां ने मुझे बचा लिया।

मेरी शादी किसी और से कर दी गई
23 की उम्र में अपनी पढ़ाई पूरी करने तक मुझे शादी के लिए कई लड़कों ने रिजेक्ट किया और फिर इसके बाद मेरी शादी सुधीर से हुई। मेरे पति मुंबई में काम करते थे इसलिए मुझे भी उनके साथ मुंबई आना पड़ा। हमारी शादीशुदा जिंदगी बहुत अच्छी चल रही थी और मेरी एक बेटी भी हुई जिसका नाम हमने अम्मू रखा लेकिन फिर भी मेरे दिल से राजू की याद नहीं गई।

एक दिन मुझे मेरा पुराना प्रेमी मिला
एक दिन मार्केट में मेरी मुलाकात राजू से हुई। उसने मुझसे मेरे बच्चे और पति के बारे में पूछा। मैंने भी उससे पूछा कि उसकी लाइफ कैसी चल रही है। उसने बताया कि सब कुछ ठीक है। किसी तरह राजू ने मेरा फोन नंबर निकालकर मुझे कॉल किया। उसने कहा कि वो आज भी मुझे याद करता है। मैंने उसे कहा कि अब मैं सिर्फ सुधीर से प्यार करती हूं और अपनी जिंदगी में खुश हूं। उसके कुछ कहने से पहले ही मैंने फोन रख दिया।

मेरे पति को हमारे बारे में सब कुछ पता चल गया और...
इसके बाद रोज़ाना की तुलना में उस दिन सुधीर घर जल्दी आ गए थे और उन्होंने मुझ पर चिल्लाना शुरु कर दिश। उन्हें शादी से पहले राजू के साथ मेरे रिलेशनशिप के बारे में पता चल गया था। जिसे वो एक सीधी-सादी लड़की समझते थे वो अब उन्हें धोखेबाज़ लगने लगी थी। उस वक्त मेरी सास भी वहीं थी और वो भी इस सबसे बहुत दुखी हुईं। मेरे माता-पिता ने भी सुधीर को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं मानें। मैंने उनसे एक बार हमारी बेटी के बारे में सोचने के निए भीख तक मांगी लेकिन वो अपने फैसले पर अड़े रहे। आखिर में हमारा तलाक हो गया और वो मेरी बच्ची को भी अपने साथ ले गए।

पति को छोड़ने के बाद प्रेमी से की शादी
उस वक्त राजू मेरी जिंदगी में वापिस आया और मेरे परिवार से शादी के लिए मेरा हाथ मांगा। तब उसका भी तलाक हो चुका था। मैं उससे नफरत करती थी और चाहती थी कि वो मुझे अकेला छोड़ दे। उसकी वजह से मेरी पूरी दुनिया उजड़ गई थी। वहीं दूसरी ओर मेरी मां उससे शादी करने के लिए मुझ पर दबाव बनाने लगीं। उन्होंने मुझे अपनी चार बहनों की खातिर राजू से शादी करने के लिए मजबूर कर दिया।

वह मेरा रेप करता था
राजू से शादी के बाद मैंने कभी भी उससे प्यार नहीं जताया लेकिन इस वजह से राजू के अंदर गुस्सा भरता जा रहा था। हर रात वो पलंग से मेरे हाथ और पैर बांधकर मेरा रेप करता रहा। शादी के एक महीने के बंदर ही मैं दोबारा प्रेग्नेंट हो गई और मैंने एक लड़के को जन्म दिया। राजू ने मेरी जिंदगी से प्यार को पूरी तरह से खत्म कर दिया था। उसके पास बहुत जमीन-जायदाद थी इसलिए वो कुछ काम नहीं करता था और पूरा समय घर पर ही रहता था। कभी-कभी वो मेरा ध्यान भी रखता तो कभी बिलकुल पलट जाता था और मुझ पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार करता था।

उसकी वजह से मैं पांच बार प्रेग्नेंट हो गई थी
मेरी तीसरी डिलीवरी सी सेक्शन हुई थी और एक साल में ही मैं दोबारा प्रेग्नेंट हो गई। डॉक्टर ने राजू और मुझे बहुत डांट लगाई। मैं पूरी तरह से क्षुब्ध हो गई थी। जब छठी बार मैं गर्भवती हुई तो मैं जानबूझकर सीढियों से गिर गई और मुझे ब्लीडिंग भी हुई लेकिन इसके बारे में मैंने किसी से कुछ नहीं कहा। रात को दर्द बहुत ज्यादा बढ़ गया और मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ। तब डॉक्टरों ने मेरा यूट्रेस निकालने को कहा। ये गलत होता है लेकिन मेरे केस में ये ही सही रास्ता था।



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