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नवजात शिशुओं के साथ ध्यान रखने वाली 7 बातें
बच्चों का पालन पोषण करना आसान काम नही है। अक्सर नई माताओं को कहा जाता है कि वे अपने बच्चों की देखभाल करने की आदी हो जायेंगी तथा जल्द ही अपने बच्चे को जानने लगेंगी। परन्तु कहना आसान है तथा करना कठिन।
7 सामान्य बातें जिनकी चिंता सभी नए माता-पिता करते हैं
विशेष रूप से जब कोई स्त्री पहली बार मां बनती है तो उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई माताओं को यह पता नहीं होता कि उन्हें अपने बच्चे की देखभाल कैसे करनी है क्योंकि उनके लिए यह एक पूर्णत: नवीन अनुभव होता है। बच्चों की देखभाल के सन्दर्भ में उनके दिमाग में कई प्रकार की शंकाएं और उत्सुकता होती है।
बार-बार गर्भपात कराने के शारीरिक नुकसान
नवजात शिशु बहुत नाज़ुक होते हैं तथा उनकी देखभाल बहुत सावधानी से करनी पड़ती है। थोड़ी सी भी असावधानी से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यह बहुत आवश्यक है कि आप अपने बच्चे की आवश्यकताओं को समझें, उसकी दिनचर्या को स्वीकार करें तथा बच्चे की दिनचर्या के अनुसार अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करें।

सलाह #1
कई माता पिता बच्चों का रोना बंद करने के लिए उन्हें जोर जोर से झुलाते हैं। यह बहुत नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि ऐसा करने से उनके कई नाज़ुक आंतरिक अंग क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। अत: बच्चों को धीरे धीरे झुलाना चाहिए।

सलाह #2
विशेषज्ञों का मानना है कि आवश्यकता से अधिक जल्दी स्तनपान बंद करने से नवजात शिशुओं में कुपोषण और पाचन संबंधी समस्याएं आ सकती हैं। भले ही बच्चों को अन्य संपूरक आहार दिया जाए परन्तु मां का दूध बच्चों के लिए सबसे अधिक पोषक होता है।

सलाह #3
कई बार माएं दूध की बोतल बच्चे के मुंह में ही भूल जाती है तथा बच्चा उसे मुंह में लेकर ही सो जाता है। इससे अनजाने में ही दूध के कारण बच्चे का दम घुट सकता है।

सलाह #4
विशेषज्ञ कहते हैं कि 6 महीने से कम आयु के शिशुओं को पानी की कम मात्रा ही देनी चाहिए क्योंकि इसके कारण उनके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का असंतुलन हो सकता है तथा उनके शरीर में बढ़ने वाले सोडियम का स्तर भी कम हो सकता है।

सलाह #5
बच्चों को करवट पर या पेट के बल न सुलाएं क्योंकि ऐसा करने से उनके शरीर के वायुमार्ग बाधित हो सकते हैं जो जानलेवा तक हो सकता है। अत: आपको सलाह दी जाती है कि बच्चों को पीठ के बल ही सुलाएं।

सलाह #6
ऐसा कहा जाता है कि प्रारंभिक महीनों में बच्चों को सुलाते समय तकिया नहीं रखना चाहिए क्योंकि उनकी गर्दन तथा रीढ़ की हड्डी नाज़ुक होती है तथा ऊंचाई मिलने के कारण श्वसन नलिकाओं में रूकावट आ सकती है।

सलाह #7
कई बार माता पिता रोते हुए बच्चे को चुप नहीं करते तथा ऐसा मानते हैं कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालाँकि विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसा करने से बच्चे को मानसिक आघात पहुँच सकता है तथा बच्चे में बहरेपन जैसी समस्याएं आ सकती हैं।



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