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इन वजहों से प्रसव के दौरान फंस जाता है बच्चा
अकसर प्रसव के दौरान बच्चे के बड़े आकार के कारण सी-सेक्शन द्वारा डिलीवरी करवानी पड़ती है। वहीं कुछ बच्चे गर्भ में पूरी तरह से विकसित ही नहीं हो पाते हैं।
गर्भावस्था के आखिरी हफ्तों में बच्चे के विकास के बारे में पता लगाया जा सकता है। साथ ही डिलीवरी का समय भी जाना जा सकता है।
कई बार प्रसव के दौरान बच्चा फंस जाता है या उसे बाहर निकालने में दिक्कत होती है। इस बारे में आपको कुछ जरूरी बातें जान लेनी चाहिए।

गलत पोजीशन
प्रसव के समय बच्चे का सिर हमेशा नीचे की तरफ होना चाहिए और उसका मुंह मां की पीठ की ओर रहना चाहिए। बच्चे की ठोड़ी उसके सीने से लगी होती चाहिए और उसका सिर पेल्विस की ओर रहना चाहिए ताकि वो आराम से बाहर निकल सके। इसे सेफालिक प्रस्तुति कहते हैं। गर्भावस्था के 32वें और 36वें सप्ताह में बच्चा इस पोजीशन में आ जाता है।
लेकिन कुछ मामलों में बच्चा गलत पोजीशन ले लेता है जिसकी वजह से बच्चे को बाहर निकलने में दिक्कतें आती हैं। जब प्रसव के लिए बच्चा सही स्थिति में नहीं होता है तब डॉक्टर सी-सेक्शन की सलाह देते हैं। अगर बच्चा पहले सही पोजीशन में हो लेकिन बाद में वो अपनी पोजीशन बदल ले तो ऐसे में सिजेरियन ऑपरेशन किया जाता है।

बच्चे का बड़ा आकार
जब बच्चे का सिर और शरीर पेल्विस के लिए बहुत बड़ा होता है तो इसे सिफालिक पेल्विक डिस्प्रपोर्शन कहते हैं। ऐसी स्थिति बहुत ही कम देखी जाती है। प्रसव से पूर्व अगर बच्चे के आकार के बारे में पता चल जाए और पेल्विस के अनुसार वह बहुत बड़ा लगे तो ऐसे में सी-सेक्शन द्वारा बच्चे को बाहर निकाला जाता है।

कंधे में परेशानी
इस स्थिति को शोल्डर गिर्डल डिस्टोकिया कहते हैं जब बच्चे का कंधा और सिर एक-दूसरे से सामंजस्य नहीं बना पाता है। प्रसव से पहले से बेहद मुश्किल समय होता है। जननमार्ग में नाभि के संकुचन के कारण ऐसा होता है। योनि से जन्मे लेने वोल 0-3-1 प्रतिशत बच्चों में ऐसा होता है।
प्रसव के दौरान पोजीशन
प्रसव के दौरान आपकी पोजीशन बहुत महत्व रखती है। अगर आप प्रसव के समय भी एक्टिव रहती हैं तो इससे जननागों में पेल्विस के लिगामेंट्स को बढ़ने में मदद मिलती है। प्रसव के दौरान आप जितना ज्यादा क्रियाशील रहेंगीं उतना ही ज्यादा आसानी से प्रसव हो जाएगा। कुछ मामलों में पीठ के बल लेटने से सामान्य प्रसव में देरी और मुश्किलें आ सकती हैं।

पेल्विस का अनियमित आकार
हर मनुष्य के अंगों और शरीर में भिन्नता पाई जाती है। उसी प्रकार महिलाओं की पेल्विस का आकार और आकृति भी अलग-अलग होती है।
सामान्य तौर पर पेल्विस का आकार चार तरह का होता है – गायनेसॉइड, प्लैटिपॉइड, एंथ्रोपॉइड और एंड्रॉइड। पेल्विस का आकार आनुवांशिक, वंशानुगत और नस्लीय विशेषता पर आधारित होता है। महिलाओं में प्रसव उनकी पेल्विस के आकार पर ही निर्भर करता है।
किसी चोट, ट्रॉमा या आपके जन्म के तरीके के कारण भी पेल्विस का आकार छोटा या अनियमित हो सकता है। प्रसव के दौरान बच्चे को बाहर आने में दिक्कत हो सकती है। प्रसव से पहले गर्भावस्था के हर चरण का पूरी तरह से ध्यान रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सी-सेक्शन करवाया जाता है।



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