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ये मामूली से दिखने वाले लक्षण हो सकते हैं शिशु के लिए जानलेवा
जब आप माता पिता बन जाते हैं तो बच्चे की ज़िम्मेदारी आप पर होती है। कई बार ज़रा सी लापरवाही भी बच्चे पर भारी पड़ जाती है। आपको मुसीबत और बच्चे को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कोशिश करें कि आप बच्चे पर पूरा ध्यान दें और उसकी छोटी से छोटी बात का ध्यान रखें ताकि आनन-फानन में आपको हॉस्पिटल न भागना पड़े।
शिशु के बीमार होने या उन्हें कोई परेशानी होने पर आपको नहीं मालूम चलता है कि उसे क्या तकलीफ है क्योंकि शिशु बोल नहीं सकते हैं। ऐसे में उनके रोने या अन्य शारीरिक लक्षणों को देखकर आप जान सकते हैं कि उसे क्या समस्या है। इसलिए कभी भी बच्चे की कुछ आदतों, लक्षणों या हरकतों को इग्नोर नहीं करना चाहिए, क्या पता कि वो किसी बीमारी का संकेत दे रहे हों और आप उसे हल्के में ले रहे हों।

जब शिशु की उम्र बढ़ती है तो उनके खाने-पीने में बदलाव होता है जिसकी वजह से भी कई बार कुछ समस्याएं आती हैं लेकिन चूंकि वो इसके बारे में कह नहीं पाते हैं तो ये आपकी ज़िम्मेदारी होती है कि आप उनकी बात को समझें। माता पिता होने के नाते ये आपकी ज़िम्मेदारी है कि उसके संकेतों को पहचानें। इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं जो बच्चे में किसी प्रकार की समस्या या बीमारी को दर्शाते हैं। ये लक्षण निम्न प्रकार हैं:
1. बुखार: अगर आपके बेबी को कुछ समय से हल्का बुखार रहता है या उसका शरीर तपता है तो इग्नोर न करें। अगर शिशु 4 महीने से बड़ा है और उसे 38 डिग्री सेल्सियस का ताप है तो उसके लिए घातक हो सकता है। 4 महीने से अधिक आयु के बेबी पर बुखार के समय ज़्यादा ध्यान दें, ये उसके लिए किसी खतरे से कम नहीं है। पर अगर आपका बच्चा एक्टिव है और उसके व्यवहार में कोई चेंज नहीं है तो चिंता की कोई बात नहीं है।
2. सांस लेने में तकलीफ: कभी भी बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो या उसकी छाती से आवाज आ रही हो, तो देर न करें और तुंरत डॉक्टर के पास जाएं। अगर आपको धड़कन भी तेज़ महसूस होती है तो बच्चे को देखभाल और डॉक्टरी परामर्श की आवश्यकता है। आप शिशु की नाक के सिरे यानि नथुने पर ध्यान दें, उससे आपको अपने नन्हे की समस्या का अंदाज़ा लग जाएगा क्योंकि सांस लेने की स्पीड बढ़ जाती है। हो सकता है कि बच्चे को अस्थमा की दिक्कत हो, जोकि शुरूआत में ही ठीक हो सकती है। इसके अलावा, कफ, निमोनिया, ब्रोनकाईटिस आदि में से भी कुछ दिक्कत हो सकती है।
3. हरी या पीली उल्टी: अगर बच्चे को हरी या पीली में से कोई उल्टी आती है तो आपको चिंता करने की ज़रूरत है। हो सकता है कि उसकी आंतों में कोई समस्या हो। वैसे पेट में कोई समस्या होने पर ऐसी उल्टियां आती हैं इसलिए देर न करें और शीघ्र ही डॉक्टर के पास ले जाएं।
4. नीले होंठ: अगर आपको अपने बेबी के होंठ नीले से दिखते हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। ऐसा शरीर में ऑक्सीजन की कम मात्रा के कारण होता है क्योंकि शरीर में ऑक्सीजन का संचार कम हो जाता है। कई बार ऐसा शरीर के किसी अंग में अंदरूनी समस्या के कारण भी होता है। ये लक्षण घातक होते हैं इसलिए लापरवाही बिल्कुल न बरतें।
5. बहुत ज़्यादा प्यास लगना: अगर आपका शिशु 6 महीने से छोटा है और आपको महसूस होता है कि अब उसे पहले से ज़्यादा प्यास लगती है तो ये ठीक नहीं है। गर्मी के मौसम में ऐसा हो सकता है लेकिन एक हद से ज़्यादा नहीं। आपको इस स्थिति के बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए। कई बार ऐसे बच्चों को डायबिटीज़ की समस्या होने पर भी होता है जो कि टाइप 1 प्रकार का होता है। इस प्रकार की डायबिटीज़ के लक्षण हैं- वज़न कम होना, भूख ज़्यादा लगना, थकान, सुस्ती।
6. ब्लीडिंग: बच्चों को चोट लगना आम बात है। लेकिन अगर आपके शिशु को चोट लगती है और निकलने वाला खून नहीं रूकता है या देर से रूकता है तो डॉक्टर को दिखा लें। तब तक चोट को किसी साफ कॉटन कपड़े से दबाकर रखें।
7. बार-बार पेशाब आना: अगर आपका शिशु नॉर्मल से ज़्यादा बार पेशाब कर रहा है तो उसे कुछ समस्या हो सकती है। गर्मी के दिनों में ज़्यादा पानी पीने के कारण ऐसा हो सकता है लेकिन सर्दी के दिनों में इस बात का ख़ास ध्यान रखना होगा। साथ ही ये देखें कि क्या यूरिन में ब्लड भी आ रहा है। अगर ऐसा है तो डॉक्टर से शीघ्र सम्पर्क करें।
8. वज़न कम होना: बच्चे का वज़न पहले से 7 प्रतिशत से अधिक कम होना ठीक लक्षण नहीं है। ऐसा होना इंगित करता है कि शिशु के पेट में कीड़े हैं या कोई अन्य समस्या होने पर भी वज़न घट सकता है। देर न करें और बच्चे को अच्छे डॉक्टर को दिखा लें।



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