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शिशु को एलर्जी से दूर रखने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जरूर करवाएं स्तनपान
शिशु के जन्म के बाद छह माह तक बच्चे को मां का दूध पिलाने की ही सलाह दी जाती है। स्तन का दूध पोषक तत्वों के साथ पूरा तरह पैक होता है जो शिशुओं की जीआई प्रणाली द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाती है। स्तनपान का एक लाभ यह भी होता है कि यह शिशु को तत्काल व लॉन्ग टर्म के लिए एलर्जी से प्रोटेक्शन देता है। आपको शायद पता ना हो लेकिन मां के दूध में प्रोटीन होते हैं जो नवजात शिशुओं में एलर्जी के विकास को रोकने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं, इसे शिशु की आंत माइक्रोबायोम आकार देने के लिए भी जाना जाता है। स्तन के दूध के कई घटक हैं जो बच्चे की प्रतिरक्षा को प्रभावित करते हैं। यह एलर्जी के जोखिम को कम करने में भी एक भूमिका निभाता है। स्तनपान से शिशु को एक नहीं बल्कि कई बेहतरीन लाभ होते हैं। तो चलिए आज हम आपको छोटे बच्चों में एलर्जी और स्तनपान की भूमिका के बारे में बता रहे हैं-

होता है प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत
शिशुओं में स्तनपान से वैसे तो कई लाभ मिलते हैं। यह मां व बच्चों में आपसी बॉन्ड बनाने के साथ-साथ बच्चों के दिमाग विकास व मजबूत हड्डियां आदि प्रदान करता है। हालांकि स्तनपान का एक सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि यह बच्चों के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है। आपको शायद पता ना हो लेकिन एक बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली का विकास उसके विकास के पहले कुछ वर्षों में होता है। ऐसे में अगर बच्चे को शुरूआती महीनों में अगर केवल स्तनपान ही करवाया जाए तो इससे उसकी मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली उसे ना केवल बचपन में बल्कि भविष्य में भी एलर्जी आदि से बचाव करती है।

क्या कहता है अध्ययन
पिछले कुछ दशकों में दुनिया भर में एलर्जी से होने वाली बीमारियों में लगातार वृद्धि देखी गई है। एनसीबीआई अर्थात् नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन, यूनाइटेड स्टेट्स द्वारा किए गए अध्ययनों में कहा गया है कि बच्चे को रेग्युलर फार्मूला मिल्क की जगह कम से कम चार महीने के लिए स्तनपान करवाने से बच्चों में दो वर्षों तक मिल्क एलर्जी व एग्जिमा आदि से प्रोटेक्शन मिलती है।
एनआईसी अर्थात् राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, भारत सरकार के अनुसार, पिछले एक दशक से लो एयर क्वालिटी के कारण 1.5 करोड़ से अधिक भारतीय अस्थमा से पीड़ित हैं। उनमें से अधिकांश बचपन से अस्थमा से पीड़ित हैं। हालांकि इसका कोई ठोस सबूत नहीं है। लेकिन शोधकर्ता संकेत देते हैं कि शिशुओं को जीवन के शुरुआती चरण में केवल स्तनदूध पर पिलाया जाता है तो इससे अस्थमा से संबंधित लक्षण विकसित होने का खतरा कम हो जाता है। इतना ही नहीं, ब्रेस्ट मिल्क संज्ञानात्मक विकास को भी बढ़ावा देता है।

मां को भी मिलता है लाभ
अगर आप यह मानती हैं कि स्तनपान शिशु के लिए लाभकारी है तो आप गलत है। न केवल स्तनपान कराने से शिशु को मदद मिलती है, बल्कि यह माँ के लिए भी उतना ही लाभकारी है। मेडिकल शोध से पता चला है कि जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं, उनमें डिम्बग्रंथि और स्तन कैंसर, हृदय रोगों और टाइप 2 मधुमेह के विकास का खतरा कम होता है।



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