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जानिए क्या है पारेकोवायरस, जिसके चलते एक महीने के बच्चे ने गंवा दी अपनी जान
नवजात शिशु और कम उम्र के बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत अधिक मजबूत नहीं होती है और इसलिए कई तरह के वायरस अक्सर उन्हें बीमार कर देते हैं। अधिकतर वायरस कम समय के लिए अटैक करते हैं और बच्चे को दवाई देने से वह जल्द ही ठीक भी हो जाते हैं। लेकिन पारेकोवायरस, एक ऐसा वायरस है, जो बहुत अधिक घातक हो सकता है।
यह एक ऐसा वायरस है, जो छोटे बच्चों को अटैक करता है। खासतौर से, 3 महीने से कम उम्र के शिशुओं में इसके अधिक गंभीर और घातक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। यहां तक कि शिशु को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। ऐसा ही एक मामला हाल ही में यूएस में सामने आया है। जब बेबी रोनन का जन्म हुआ, तो वह एक हेल्दी बेबी था। लेकिन लेकिन रोनन के जन्म के लगभग 10 दिन बाद ही उसके चेहरे पर रेडनेस नजर आने लगी। लेकिन उसे कोई बुखार नहीं था। कुछ दिनों बाद बेबी रोनन चिड़चिड़ा हो गया और हर वक्त रोने लगा। जल्द ही उसकी छाती पर भी लालिमा आ गई थी। उसने कुछ भी खाना बंद कर दिया था। जल्द ही उसे दौरे पड़ने लगे और जन्म के एक महीने बाद उसका निधन हो गया। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको इस गंभीर वायरस के जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं-

पारेकोवायरस क्या है?
पारेकोवायरस पिकोर्नविरिडे परिवार में वायरस का एक जीनस है। जीनस में वर्तमान में छह स्वीकृत प्रजातियां शामिल हैं। वायरस का एक समूह जो आमतौर पर बच्चों को संक्रमित करता है। मानव पारेकोवायरस शिशुओं में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल या श्वसन संबंधी बीमारी का कारण हो सकता है। इसके कारण शिशुओं को कई न्यूरोलॉजिकल मुद्दे जैसे दौरे या मेनिन्जाइटिस आदि का भी सामना करना पड़ सकता है।

पारेकोवायरस के सामान्य लक्षण क्या हैं?
पारेकोवायरस की स्वीकृत छह प्रजातियां हैं, और उनमें से कई अलग-अलग प्रकार हैं। सी.डी.सी. के अनुसार, वायरस इतना आम है कि अधिकांश बच्चे किंडरगार्टन के समय तक इससे संक्रमित हो चुके होते हैं। बता दें कि पारेकोवायरस एंटरोवायरस नामक वायरस के एक बड़े समूह का हिस्सा हैं, और ये सभी वायरस काफी समान लक्षण पैदा करते हैं। जिनमें कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं-
• कॉमन कोल्ड होना
• गले में खराश होना
• नाक बहना
• खांसी-जुकाम
• डायरिया
• तेजी से सांस लेना व चिड़चिड़ापन
• उनींदापन
• अत्यधिक थकान
• दौरे पड़ना
पारेकोवायरस के अन्य सामान्य लक्षणों में बुखार, मतली, उल्टी या दस्त, और एक वायरल रैश शामिल हैं। हालांकि, यहां यह भी ध्यान रखें कि पारेकोवायरस बेहद ही हल्के लक्षण या बिल्कुल भी लक्षण प्रकट नहीं कर सकता है, लेकिन फिर भी यह गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।

गंभीर बीमारी का खतरा किसे है?
यूं तो पारेकोवायरस कभी ना कभी छोटे बच्चों को अपनी चपेट में लेता ही है। लेकिन 3 महीने से कम उम्र के बच्चे और विशेष रूप से 1 महीने से कम उम्र के बच्चों को गंभीर बीमारी का अनुभव होने की अधिक संभावना है। सी.डी.सी. के अनुसार, उन्होंने वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं की है, जो दूषित सतहों या हवा के माध्यम से फैल सकता है। यह वायरस रक्त-मस्तिष्क के बैरियर को पार कर सकता है और मेनिन्जेस, या यहां तक कि मस्तिष्क के ऊतकों में सूजन में सूजन पैदा कर सकता है। इन स्थितियों को मेनिन्जाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को ढंकने वाली झिल्लियों की सूजन) और एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) के रूप में जाना जाता है। यह स्थितियां बच्चों में बेहद घातक हो सकती हैं। यहां तक कि इससे उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।

बच्चे को बीमार होने से कैसे बचाएं
चूंकि अभी तक पारेकोवायरस के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, इसलिए बचाव के उपायों को अपनाकर ही बच्चे के स्वास्थ्य का ख्याल रखा जा सकता है। पारेकोवायरस छींकने या खांसने से मल, लार और सांस की बूंदों से फैल सकता है। ऐसे में माता-पिता के लिए उचित स्वच्छता का पालन करना महत्वपूर्ण है। छोटे बच्चे वायरस के प्रति अति संवेदनशील होते हैं और इसलिए पैरेंट्स को यह कोशिश करनी चाहिए कि वायरस तक उन तक ना पहुंचा पाए। ऐसे में बच्चे को गंदे हाथों से छूने या बार-बार किस करने से बचें। इसके अलावा, बाथरूम जाने के बाद, डायपर बदलने के बाद, खाने से पहले, शिशु को दूध पिलाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से हैंडवॉश की मदद से धोना ना भूलें।



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